बिहार चुनाव परिणाम: महागठबंधन के लिए कमजोर कड़ी साबित हुई कांग्रेस! जानें तेजस्वी को कैसे लगा झटका

बिहार में महागठबंधन के लिए कांग्रेस कमजोर कड़ी साबित हुई.
बिहार में महागठबंधन के लिए कांग्रेस कमजोर कड़ी साबित हुई.

कांग्रेस (Congress) का किला मिथिलांचल को कहा जाता रहा है, लेकिन यहां की 60 में से 42 सीटें एनडीए के खाते में चली गई हैं. वहीं सीमांचल का गणित भी ओवैसी ने बिगाड़ दिया और कांग्रेस के लिए सेटबैक साबित हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 10:26 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के रुझानों/परिणामों से यह अब लगभग साफ हो गया है कि महागठबंधन और एनडीए (NDA) के बीच मुकाबला कांटे का रहा है. साथ ही एक बात और साबित हो रही है कि जहां जदयू का एनडीए के भीतर खराब प्रदर्शन रहा है वहीं महागठबंधन (Mahagathbandhan) में कांग्रेस कमजोर कड़ी साबित हुई है. वर्ष 2015 में जहां कांग्रेस (Congress) ने 40 सीटों में 27 सीटें जीती थीं, वहीं इस चुनाव में कांग्रेस 70 सीटों पर लड़ी और महज 20 से 22 सीटें जीतती दिख रही है. यानी कांग्रेस का स्ट्राइक रेट इस बार बेहद बुरा रहा है.

कांग्रेस के खराब प्रदर्शन को देखते हुए वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस ने जिद कर ज्यादा सीटें तो लीं, लेकिन उसके पास न तो कार्यकर्ता थे और न ही ऐसे उम्मीदवार जो मज़बूती से लड़ सकें. यही नहीं कांग्रेस का किला मिथिलांचल को कहा जाता है, लेकिन यहां की 60 में से 42 सीटें एनडीए के खाते में चली गई हैं. वहीं सीमांचल का गणित भी ओवैसी ने बिगाड़ दिया और कांग्रेस के लिए सेटबैक साबित हुआ है.


अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि कांग्रेस अगर 20-22 सीटों पर भी जीत रही है तो यह वाम दलों और आरजेडी के वोटों का कमाल है न कि कांग्रेस का. हालांकि कांग्रेस ने तेजस्वी पर गठबंधन में 70 सीटें देने का दबाव बनाया था और ऐसा न करने की स्थिति में गठबंधन से अलग होने की चेतावनी भी दी थी. अगर कांग्रेस गठबंधन से अलग होती तो वो तेजस्वी के लिए और भी ख़राब स्थिति हो सकती थी. हालांकि साथ लेने का भी बहुत फायदा नहीं हुआ.



बता दें कि कांग्रेस के 2010 243 सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन सिर्फ़ चार जीती थीं. 2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए. फरवरी में कांग्रेस ने 84 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ दस पर जीत हासिल की वहीं अक्तूबर में 51 सीटों पर लड़कर सिर्फ़ 9 सीटें जीती थीं. वर्ष 2000 में अविभाजित बिहार में कांग्रेस ने 324 में 23 सीटें जीती थीं.  लालू यादव के शासनकाल के समय 1995 में कांग्रेस ने 320 में 29 जीती थीं.


वहीं, 1990 में कांग्रेस ने 323 में से 71 सीटें जीतीं थीं. 1985 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने 323 में से 196 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया था. बता दें कि यही वह समय था जब कांग्रेस ने बिहार में बहुमत हासिल किया था. अब इस बात को अब 35 साल हो चुके हैं और उसका गया दौर वापस लौटता नहीं दिख रहा है.







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