कांग्रेस के कारण तेजस्वी नहीं बन सके बिहार के सीएम, महागठबंधन में सबसे कम रहा स्ट्राइक रेट

Bihar Elections: स्ट्राइक रेट में कांग्रेस बनी लूज़र
Bihar Elections: स्ट्राइक रेट में कांग्रेस बनी लूज़र

मिथलांचल में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलना काफी बड़ा झटका है. खास बात यह है कि प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा (State Congress President Madan Mohan Jha) भी इसी क्षेत्र से आते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 8:18 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में कांग्रेस पार्टी के खराब प्रदर्शन के साइड इफेक्ट सामने आने लगे हैं. उम्मीद से कमत प्रदर्शन पर अब पार्टी नेताओं में काफी असंतोष है और इसका गुस्सा प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा (State Congress President Madan Mohan Jha) पर फूटा है. कांग्रेस नेता और पूर्व एमएलसी ऋषि मिश्रा (Congress leader and former MLC Rishi Mishra) ने कांग्रेस अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को कांग्रेस की करारी हार का जिम्मेदार ठहराते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) से हस्तक्षेप करने की मांग की है और उनसे इस्तीफा लेने का आग्रह किया है.

कांग्रेस नेता ने कहा कि अपने गढ़ मिथलांचल में भी कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिलना काफी बड़ा झटका है. खास बात यह है कि  प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा भी इसी क्षेत्र से आते हैं. बता दें कि कांग्रेस का प्रदर्शन पिछले चुनाव से भी खराब रहा है.

पार्टियों के प्रदर्शन पर गौर करें तो एनडीए की ओर से पूरे बिहार में भाजपा 110 सीटों पर लड़ी और 74 जीत के साथ 67 प्रतिशत स्ट्राइक रेट किया. उनका वोट शेयर 19.5 प्रतिशत रहा. जदयू 115 सीटों पर  लड़ी और 43 विधानसभा सीट में जीत के साथ 37 प्रतिशत स्ट्राइक रेट रहा और उनका  वोट शेयर 37 प्रतिशत रहा.




वहीं, महागठबंधन की ओर से राजद ने 144 सीटों पर चुनावी लड़ाई लड़ी और और 75 सीटों पर जीत के साथ 52.8 प्रतिशत स्ट्राइक रेट रहा. वहीं उनका वोट शेयर 23.1 प्रतिशत था. जबकि  कांग्रेस  70 सीटों पर लड़ी और 19 जीत के साथ 27 प्रतिशत स्ट्राइक रेट ही रखा और उनका वोट शेयर 27.1 प्रतिशत रहा.

सबसे खास बात यह कि कांग्रेस ने साल 2015 का विधानसभा चुनाव आरजेडी और जेडीयू के गठबंधन में लड़ा था और उसे 27 सीटें हासिल हुई थीं. इससे पहले कांग्रेस ने 2010 का चुनाव अकेले लड़ा था और उसे निराशा हाथ लगी थी. तब उसको सिर्फ 2.9 फीसदी वोट और चार सीटें मिली थीं.

बता दें कि इस बार कांग्रेस के उम्मीदवार 19 सीटों पर जीत सके, जबकि वाम दल कुल 29 सीटों में से 16 पर जीत दर्ज करने में कामयाब रहे. लेफ्ट का स्ट्राइक रेट 55.17 रहा. विशेषज्ञों का कहना है कि कांग्रेस अगर इस चुनाव में अच्छे तरीके से आरजेडी के साथ मिलकर लड़ती तो नतीजे कुछ और हो सकते थे.
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