बिहार चुनाव परिणाम: NDA की जीत के बाद अचानक 'नीतीश की नैतिकता' पर क्यों हो रही चर्चा?

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सिद्धांतों के पक्के माने जाते हैं.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने सिद्धांतों के पक्के माने जाते हैं.

वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election) के बाद का है. यह वाकया अब भी बिहारवासियो के जेहन में जिंदा है जब नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की अगुवाई में जेडीयू (JDU) की बिहार में करारी हार हुई थी और जेडीयू महज 2 सीटों पर सिमट गई थी. इसके बाद नीतीश कुमार ने नैतिकता की दुहाई देकर पद से इस्तीफा दे दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 2:44 PM IST
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पटना. नैतिकता के आधार पर नीतीश कुमार (Nitish Kumar) को मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहिए? बिहार के सियासी हलकों में यह सवाल विधानसभा चुनाव परिणामों के सामने आने के बाद से ही तैर रहा है. दरअसल इस बार के चुनाव परिणामों में भाजपा (NDA) को 74 तो जेडीयू को 43 सीटें मिली हैं. साथ ही नीतीश मंत्रिपरिषद के 9 मंत्रियों की करारी हार भी हुई है. यानी एक तो बिहार में बिग ब्रदर की भूमिका नहीं रही, दूसरा यह कि एनडीए की जीत को पीएम मोदी (PM Modi) के नाम मिला मैंडेट बताया जा रहा है. हालांकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार बिहार एनडीए का चेहरा थे और वही मुख्यमंत्री बनेंगे. अब सवाल उठता है कि आखिर सीएम नीतीश की नैतिकता की बात क्यों उठने लगी है? सवाल यह भी कि क्या यह वास्तविक सवाल है या फिर विपक्ष द्वारा इसे जान बूझकर उछाला जा रहा है ताकि एनडीए कमजोर हो?

वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विषयों के जानकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि इस सवाल के उठने के पीछे नीतीश कुमार का इतिहास है. सीएम नीतीश कुमार कई मौकों पर नैतिकता का परिचय देते हुए कुर्सी छोड़ते रहे हैं, ऐसे में ये सवाल उठना लाजिमी भी है. दरअसल नीतीश की राजनीति में कई ऐसे मौके आए हैं जब सियासत में वह सत्ता से अधिक नैतिकता को तरजीह देते हुए नजर आए हैं.

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