बिहार चुनाव: LJP के रुख से किसको होगा फायदा? जानें BJP की चुप्पी से क्यों असहज है JDU

पिछले एक साल में जेडीयू और एलजेपी के बीच रिश्ते खराब होते चले गए. (PTI)
पिछले एक साल में जेडीयू और एलजेपी के बीच रिश्ते खराब होते चले गए. (PTI)

एलजेपी (LJP) के ताजा रुख से बीजेपी और जेडीयू (BJP-JDU) में एक नया विवाद जन्म ले सकता है. 2019 का लोकसभा चुनाव तीनों पार्टियों ने मिलकर लड़ा था, लेकिन पिछले एक साल में जेडीयू और एलजेपी के बीच रिश्ते खराब होते चले गए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 4:01 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन की तस्वीर अब बिल्कुल साफ हो गई है. हालांकि, एलजेपी (LJP) के रुख के बारे में अभी भी साफ-साफ अंदाजा लगाना मुश्किल है. इसके बावजूद एलजेपी ने साफ कर दिया है कि वह बीजेपी (BJP) प्रत्याशियों के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी. एलजेपी के इस रुख से बीजेपी और जेडीयू (BJP-JDU) में एक नया विवाद जन्म ले सकता है. 2019 के लोकसभा चुनाव में भी तीनों पार्टियों ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन पिछले एक साल में जेडीयू और एलजेपी के बीच रिश्ते खराब होते चले गए. ऐसे में सवाल यह उठता है कि अगर एलजेपी जेडीयू के खिलाफ चुनाव लड़ेगी तो किसको नुकसान और किसको फायदा होगा? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एलजेपी के इस कदम से जेडीयू को नुकसान झेलना पड़ सकता है.

एलजेपी के अलग चुनाव लड़ने से किसका नुकसान
मंगलवार को बीजेपी ने एलजेपी से साफ कह दिया है कि वह अपनी पार्टी के किसी बैनर, पोस्टर या भाषण में पीएम मोदी और बीजेपी का नाम नहीं ले. बीजेपी ने कहा है कि जब कोई पार्टी एनडीए से अलग हो गई है तो उसे पीएम मोदी या अमित शाह के नाम का इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

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एलजेपी ने साफ कर दिया है कि वह बीजेपी प्रत्याशियों के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी. (PTI Photo)

बीजेपी के प्रति प्रेम के क्या हैं मायने


बीजेपी के इस बयान के बाद एलजेपी ने भी प्रतिक्रिया दी है. एलजेपी ने कहा है कि प्रधानमंत्री किसी पार्टी के नहीं बल्कि देश के हैं. प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए विकास के मॉडल हैं. मोदी हमारे लिए विकसित देश के विचार के रूप मे हैं. प्रधानमंत्री मोदी देश के प्रतीक हैं. उनका इस्तेमाल नहीं बल्कि हम उनके विचारों को लेकर देश दुनिया मे जाएंगे. चुनाव हम बिहारियों के नाज के लिए लड़ रहे हैं. उन्हें सम्मान दिलाना प्रधानमंत्री मोदी भी चाहते हैं.

जेडीयू की मांग बीजेपी रुख साफ करे
वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, 'एलजेपी के रुख पर बीजेपी नेताओं की चुप्पी ने जेडीयू को आत्ममंथन के लिए विवश कर दिया है. अगले एक-दो दिनों में बीजेपी को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी ही होगी. एलजेपी का ये कहना है कि नीतीश कुमार के प्रति लोगों में नाराजगी है जेडीयू इसको बर्दाश्त नहीं करेगी. इस स्थिति में नीतीश कुमार को अपने आपको सुरक्षित रखना अच्छी तरह आता है. नीतीश कुमार एक चालाक नेता हैं. हो सकता है कि अगले एक-दो दिनों में बीजेपी एलजेपी को लेकर कोई बड़ा ऐलान करे. बीजेपी किसी भी कीमत पर नहीं चाहती है कि नीतीश कुमार विपक्षी खेमे का हिस्सा बन जाएं.'

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अमित शाह, नीतीश कुमार और चिराग पासवान (फाइल फोटो)


एलजेपी का क्या है प्लान
दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने एक ऐसा दांव चला है जिसने विपक्षी पार्टियों के साथ-साथ जेडीयू को भी अचरज में डाल दिया है. जेडीयू चाह कर भी अब अलग हटकर चुनाव नहीं लड़ सकती. दूसरी तरफ एलजेपी के अलग चुनाव लड़ने के फैसले ने विपक्षी पार्टियों में भी कुछ आस जगाई है. एलजेपी 20 से 25 सीट जीतती है तो सत्ता की चाबी अपने हाथ में रख कर केंद्र सरकार के साथ-साथ आरजेडी-कांग्रेस के साथ भी सौदेबाजी कर सकती है.

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कुल मिलाकर जेडीयू अंदर खाने बीजेपी की इस चाल से नाराज है. जेडीयू मांग कर रही है कि बीजेपी आधिकारिक तौर पर एलजेपी से नाता तोड़ने का ऐलान करे. जेडीयू नेताओं की इस संबंध में बीजेपी आलाकमान से बात चल रही है. जबकि, बिहार बीजेपी के एक बड़े धड़े का मानना है कि एलजेपी से नाता नहीं तोड़ा जाए.
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