Bihar Elections Result 2020: नीतीश कुमार की परीक्षा है यह विधानसभा चुनाव, क्या होगा सुशासन बाबू का

नीतीश कुमार
नीतीश कुमार

बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम 2020 (Bihar Assembly Election Result 2020) : नीतीश कुमार (nitish kumar) को बदले हुए बिहार (Bihar) का चेहरा कहा जाता रहा है लेकिन इस चुनावों में महागठबंधन के सामने उनकी एनडीए की नैया हिचकोले ले रही है. नीतीश ने लंबे समय तक बिहार पर राज किया है

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  • Last Updated: November 10, 2020, 6:00 AM IST
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बिहार विधानसभा का चुनाव जिन 04-05 चेहरों के चारों ओर घुमा, उसमें केंद्र में थे नीतीश कुमार. वह बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री हैं. उनकी पार्टी जेडीयू ने बीजेपी के साथ गठबंधन करके एनडीए के तले चुनाव लड़ा. वो बिहार के कद्दावर नेता कहलाते हैं. उन्हें बिहार की तस्वीर बदलने वाला नेता भी कहा जाता था लेकिन इस चुनाव में जनता उनसे नाराज दिखी. एक समय में वह सुशासन बाबू (Sushasan Babu) कहे जाते थे लेकिन इस बार उनकी नैया डांवाडोल है.

बिहार की राजनीति में पिछले 15 सालों से मुख्य भूमिका निभा रहे नीतीश कुमार 2014 से पहले तक नरेंद्र मोदी की टक्कर के नेता और प्रधानमंत्री पद तक के लिए दावेदार माने जा चुके थे. लेकिन उनके बारे में लगातार ये भी कहा जाता रहा है कि उनका सारा ध्यान केवल अपनी छवि चमकाने के लिए होता है.

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एक नज़र में नीतीश कुमार
* नीतीश के पिता कविराज रामलखन सिंह एक वैद्य और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. उनकी मां का नाम परमेश्वरी देवी था और नीतीश खेती किसानी से जुड़ी कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते हैं.
* बिहार कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद आधे मन से उन्होंने बिजली बोर्ड में नौकरी की थी, लेकिन जल्द ही वो राजनीति में आ गए.
* जयप्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया, एसएन सिन्हा, कर्पूरी ठाकुर और वीपी सिंह जैसे दिग्गजों के मार्गदर्शन में नीतीश कुमार ने 1971 में राजनीति की शुरूआत लोहिया की यूथ विंग समाजवादी युवजन सभा से जुड़कर की थी.

* 1985 में पहली बार विधायक और 1989 में पहली बार सांसद बनने के बाद नीतीश पांच बार संसद पहुंचे तो कुल छह बार बिहार के मुख्यमंत्री बने. साल 2000 में पहली बार सीएम बनने के बाद से बीच में अगर 10 महीने का वक्त छोड़ दिया जाए तो पिछले 15 सालों से नीतीश बिहार के सीएम हैं.

* कई समाचार समूहों और फोर्ब्स व फॉरेन पॉलिसी जैसी पत्रिकाएं समय समय पर नीतीश को सम्मानित कर राजनीति का अग्रणी चेहरा करार देती रही हैं. नीतीश की अब तक की आधिकारिक जीवनी का टाइटल 'सिंगल मैन' उनके बारे में काफी कुछ कहता है.

ऐसी है नीतीश की पर्सनल लाइफ
नीतीश को घर में प्यार मुन्ना नाम से पुकारा जाता रहा. शराब और सिगरेट जैसी आदतों से दूर रहने वाले नीतीश को ​किताबें पढ़ने का शौक रहा है. एक समय में उन्हें फिल्में देखना बहुत पसंद था और वह राज कपूर व वैजयंती माला की फिल्में ज़रूर देखा करते थे. 1973 में नीतीश की शादी मंजू कुमारी सिन्हा के साथ हुई थी. उनके एक बेटा निशांत है, लेकिन पत्नी अब नहीं हैं.



बिहार की राजनीति और नीतीश
1970 के दशक में देश भर में चर्चित रहे बिहार आंदोलन के प्रोडक्ट रहे नेता ही आधुनिक बिहार के प्रमुख चेहरे बनकर सामने आए. इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ स्टूडेंट्स और युवाओं को साथ लेकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने जो आंदोलन छेड़ा था, वहां से लालू प्रसाद यादव, रामविलास पासवान, सुशील कुमार मोदी, बशिष्ठ नारायण सिंह, शहाबुद्दीन जैसे युवाओं के साथ ही, नीतीश का सियासी करियर भी शुरू हुआ था.

साल 1989 में जब जनता दल का गठन हुआ, तब नीतीश महासचिव बनाए गए. बिहार की राजनीति में नाम कमा रहे नीतीश केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में मंत्री भी रहे. वहीं, 1994 में जॉर्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर नीतीश ने समता पार्टी बनाई थी, हालांकि इस पार्टी का 2003 में जनता दल में विलय हो गया. नया नाम जनता दल यूनाइटेड हुआ.

क्यों होती है नीतीश की आलोचना?
बिहार में सुशासन के लिए चर्चित रह चुके नीतीश कुमार अपने बर्ताव और नीतियों को लेकर आलोचना के शिकार भी होते रहे हैं. बिहार के विकास पुरुष को समय समय पर कई तरह के आरोप झेलने पड़े हैं.

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नीतीश सरकार को निशाना बनाने के लिए आरजेडी ने इस तर​ह के पोस्टर लगवाए थे.


  • बिहार में जाति के आधार पर वोटों की राजनीति के लिए जातिगत आधार पर वर्गीकरण करवाने का आरोप लगा.

  • इस वर्गीकरण के चलते नीतीश पर आरोप था कि रामविलास पासवान के साथ व्यक्तिगत तकरार के कारण 'पासवान' जाति को उन लाभों से वंचित किया गया जो अन्य अनुसूचित जातियों को मिले.

  • सीएम हाउस में सरकारी फंड से इफ्तार पार्टी कराने वाले नीतीश को तुष्टिकरण के आरोप झेलने पड़े.

  • चुनावों से नीतीश को डर लगता है, ऐसा भी कहा गया और यह भी कि नीतीश सत्ता के लिए कोई भी समझौता करने से परहेज़ नहीं करते.

  • नीतीश को बेहद आत्मकेंद्रित नेता कहा जाता है और इसी कारण उन्हें जनता दल के पतन का ज़िम्मेदार भी माना गया था.

  • पासवान का किस्सा हो, मोदी के साथ फोटो को लेकर डिनर पार्टी रद्द करने की घटना हो, बाढ़ पीड़ितों के लिए गुजरात की मदद से इनकार हो, मांझी की सीएम पद से विदाई की घटना हो, अक्सर नीतीश पर इल्ज़ाम रहे हैं कि वो बेहद अक्खड़पन, घमंड और ईगो से काम लेते रहे हैं.


बहरहाल, बिहार से अपराध और भ्रष्टाचार को कम करने, शराबबंदी जैसी व्यवस्था लागू करवाने और शिक्षा व आय के मामले में बिहार को देश के नक्शे पर सम्मान दिलवाने के लिए नीतीश की तारीफ जी खोलकर सबने की. लेकिन अबकी बार बिहार विधानसभा के चुनावों ने जरूर उनके नीचे की जमीन को कमजोर किया.
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