Tejashwi Yadav in Bihar: रैलियों में सबसे ज्यादा भीड़ खींचने वाले तेजस्वी क्या बना पाएंगे सरकार?

इस बार बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान किसी की सबसे ज्यादा चर्चा रही तो वो तेजस्वी यादव थे
इस बार बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान किसी की सबसे ज्यादा चर्चा रही तो वो तेजस्वी यादव थे

बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम 2020 (Bihar Assembly Election Result 2020): इस बार बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान अगर किसी ने सबसे ज्यादा भीड़ जुटाई तो वो आरजेडी (RJD) के तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) थे. एग्जिट पोल (Bihar Exit Polls) के नतीजे कहते हैं कि महागठबंधन मजबूती से उभरेगा और सरकार बनाएगा. अगर ऐसा हुआ तो इसका श्रेय लालू यादव के बेटे तेजस्वी को दिया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 10, 2020, 6:42 AM IST
  • Share this:
अब बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Polls) के नतीजों का समय है. इस बार बिहार में चुनावों के दौरान अगर किसी शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा रही, तो वो आरजेडी नेता और लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव थे. उनकी चुनावी सभाओं में जितनी भीड़ जुटी और जिस तरह से उन्होंने भाषण दिए, उससे हर किसी की जुबान पर उनका नाम सबसे ऊपर रहा. अगर एग्जिट पोल्स में महागठबंधन को सबसे ज्यादा सीटें देने का अनुमान लगाया गया है तो उसके काफी हद तक हकदार तेजस्वी हैं.

बिहार चुनावों के दौरान लगातार ही ये कहा जाता रहा कि नीतीश कुमार सरकार (Bihar Government) के लिए सबसे बड़ा खतरा लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी ही हो सकते हैं. तेजस्वी ने जहां हमेशा बिहार में नई सरकार बनाने का दावा किया वहीं ये वादा भी किया कि सरकार बनते ही वो युवकों को '10 लाख नौकरियां' देंगे.

31 वर्षीय तेजस्वी यादव की राजनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं. जानिए तेजस्वी यादव के बारे में 10 खास बातें.



bihar election 2020, bihar election news, bihar election opinion poll, bihar assembly elections 2020, बिहार चुनाव 2020, बिहार चुनाव समाचार, बिहार चुनाव ओपिनियन पोल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020
न्यूज़18 क्रिएटिव

1. रिकॉर्ड
महज़ 27 साल की उम्र में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहे तेजस्वी सबसे कम उम्र के अपोजिशन लीडर बने. उससे पहले 26 साल की उम्र में तेजस्वी उप मुख्यमंत्री के पद पर रह चुके थे. इससे पहले लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी ने अपनी मां राबड़ी देवी की विधानसभा सीट राघोपुर से चुनाव 2015 में अपने 26वें जन्मदिन के मौके पर जीता था.

2. शिक्षा
तेजस्वी ने हाल में जब चुनावी रैली में 10 लाख नौकरियां देने का वादा किया तो विरोधियों ने उनकी आलोचना यह कहकर की कि 'वो क्या नौकरी देंगे, जिन्होंने कभी खुद कोई नौकरी नहीं की'. इससे पहले भी, कम शिक्षित होने के लिए तेजस्वी पर कटाक्ष किए गए हैं. कक्षा 9 में ही स्कूल छोड़ देने वाले तेजस्वी ने जब उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी, तब भी उनके खिलाफ यही मुद्दा उठा था. लेकिन उनके समर्थकों का जवाब था कि खिलाड़ी खेल के लिए अकादमिक शिक्षा छोड़ते रहे हैं.

3. खिलाड़ी
राजनीति में आने से पहले तेजस्वी ने क्रिकेट में ज़ोर आज़माइश की थी. झारखंड की राज्य टीम से खेलने वाले तेजस्वी ने रणजी ट्रॉफी खेली और साल 2008 से 2012 तक वो आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स टीम का हिस्सा रहे, हालांकि आईपीएल में उन्होंने मैच एक भी नहीं खेला. क्रिकेट में तेजस्वी को कामयाबी नहीं मिली और वह राजनीति में आ गए.

4. समानता
क्रिकेट में फ्लॉप होने के बाद तेजस्वी का राजनीति में आना और बिहार के एक राजनीतिक घराने से ताल्लुक रखना उन्हें प्रतिद्वंद्वी युवा नेता चिराग पासवान के साथ जोड़ता है. रामविलास पासवान के बेटे और लोक जनशक्ति पार्टी का नेतृत्व कर रहे चिराग भी बॉलीवुड में किस्मत आज़माने के बाद नाकाम होकर राजनीति में आए थे. यह भी संयोग है कि दोनों युवा नेता इस बार बिहार चुनाव में सुर्खियों में बने हुए हैं.

bihar election 2020, bihar election news, bihar election opinion poll, bihar assembly elections 2020, बिहार चुनाव 2020, बिहार चुनाव समाचार, बिहार चुनाव ओपिनियन पोल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020
न्यूज़18 क्रिएटिव


5. शादी
अक्टूबर 2016 में बिहार के सड़क निर्माण मंत्री के तौर पर तेजस्वी ने लोगों से समस्याएं जानने के लिए अपना वॉट्सअप नंबर शेयर किया था, तब समस्याएं तो क्या लेकिन उन्हें शादी के लिए करीब 44,000 प्रस्ताव मिले थे. लेकिन तेजस्वी ने उस वक्त साफ कहा था कि वो 2019 के आम चुनाव के बाद ही शादी करेंगे.

6. मूंछ
आईआरसीटीसी केस में सीबीआई जांच ने बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल को भारी झटका पहुंचाया. इस केस की जांच में 2004 में रेल मंत्री रहते हुए लालू प्रसाद पर रेलवे होटलों के ठेके के बदले ज़मीन के कब्ज़े लेने के आरोप लगे थे. तेजस्वी पर भी इस केस में आरोप लगे, लेकिन तेजस्वी यह कहकर नकारे कि 2004 में उनकी मूंछ तक नहीं आई थी, वो टीनेज की शुरुआत में थे, कैसे अपराधी हो सकते हैं!

7. आरोप
राजनीतिक आरोपों की बात की जाए तो एक गंभीर आरोप भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी ने लगाया था और तेजस्वी को ज़मीनों के सौदों में संदिग्ध बताया था. कहा गया था कि तेजस्वी ने चुनाव के समय अपने शपथ पत्र में संपत्ति की पूरी जानकारी नहीं दी. तब तेजस्वी ने कहा था कि 'ऐसा है तो जांच करवाइए, सब कुछ जनता के सामने है.'

8. मैच्योर!
लालू प्रसाद के उत्तराधिकारी के तौर पर न केवल राष्ट्रीय जनता दल, बल्कि इस बार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को साधने को लेकर विशेषज्ञ तेजस्वी को ज़्यादा मैच्योर बता रहे हैं. जिस तरह से उन्होंने कांग्रेस सहित अन्य सहयोगी दलों को साधा है और सीट शेयरिंग को लेकर एक पूरा प्लान तैयार किया है, उससे राजनीतिक गलियारों में तेजस्वी को लेकर काफी उम्मीदें जग रही हैं. साथ ही उन्होंने बिहार चुनावों के दौरान जिस तरह से अपना चुनाव अभियान चलाया, उससे भी उन्होंने धाक जमा दी.

bihar election 2020, bihar election news, bihar election opinion poll, bihar assembly elections 2020, बिहार चुनाव 2020, बिहार चुनाव समाचार, बिहार चुनाव ओपिनियन पोल, बिहार विधानसभा चुनाव 2020

9. जोखिम
इस विधानसभा चुनाव में राजद के उम्मीदवारों की लिस्ट बता रही है कि तेजस्वी ने पार्टी के पुराने धुरंधरों को किस तरह डील किया है. अब्दुल बारी सिद्दीकी की बात हो या भोला यादव की, या फिर रामचंद्र पूरबी जैसे नेताओं की, तेजस्वी ने कुशलता से नये चेहरों से पुरानों को रिप्लेस किया है. हालांकि इस लिस्ट में कुछ कथित 'अपराधियों की पत्नियों' के नाम भी दिखे हैं. तो यह वोट की राजनीति का दबाव है या..? यह प्रयोग जोखिम और बैलेंस की क्षमता तो दर्शा रहा है.

10. एजेंडा
तेजस्वी ने इस बार चुनाव के चलते लॉकडाउन के दौर में पहले बिहार में कोविड 19 के खराब प्रबंधन और बिहार के माइग्रेंट मज़दूरों के मुद्दे उठाए थे, लेकिन चुनावी लहर के ज़ोर पकड़ने तक उन्होंने बेरोज़गारी को मुद्दा बनाया. नौकरियों के वादे किए और जब उनके बयानों और वादों पर विरोधियों ने तीखे हमले किए तो तेजस्वी ने साफ कहा कि वो बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और राज्य में अयोग्य सरकार के एजेंडे पर कायम रहेंगे. इस दृढ़ता ने भी तेजस्वी की छवि को मज़बूत किया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज