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Bihar Exit Poll Results 2019: बिहार एग्जिट पोल में BJP-JDU को 34-36 सीटें, कांग्रेस गठबंधन को 4-6 सीटें

तस्वीर: News18

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Bihar Exit Poll/Opinion Polls Results 2019: बिहार के एग्जिट पोल रिजल्ट आ चुके हैं. बिहार की 40 सीटों के लिए NEWS 18- IPSOS एग्जिट पोल के नतीजे सामने आए हैं. बिहार के लोकसभा चुनाव परिणाम 23 मई को आएंगे. Lok Sabha Elections Exit Polls Out.

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Bihar Lok Sabha Election exit poll results 2019: लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 सीटों पर NEWS 18-IPSOS एग्जिट पोल में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन को 34-36 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि यूपीए को 4-6 सीटें मिल सकती हैं. एग्जिट पोल में अन्य के खाते में कोई सीट जाती नहीं दिख रही है.

पिछली बार महज 2 सीटों पर जीतने वाली एनडीए की अहम घटक जेडीयू ने 17 सीटों पर तो 22 सीटों पर जीतने वाली बीजेपी ने भी 17 ही सीटों पर उम्मीदवार उतारे, जबकि एलजेपी ने 6 सीटों पर चुनावी लड़ाई लड़ी है. वहीं महागठबंधन में आरजेडी 19, कांग्रेस 9, आरएलएसपी 5, हम 3, वीआईपी 3 और एक सीट पर आरजेडी ने भाकपा माले को समर्थन दिया.

ये हैं बिहार की 'हॉट सीट' और बड़े चेहरे



इस चुनाव में बिहार से कई केंद्रीय मंत्रियों की किस्मत दांव पर है. इनमें पूर्वी चम्पारण से राधामोहन सिंह, बेगूसराय से गिरिराज सिंह, आरा से आरके सिंह, बक्सर से अश्विनी कुमार चौबे, पटना साहिब से रविशंकर प्रसाद, बक्सर से अश्विनी कुमार चौबे, पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव चुनाव मैदान में हैं. वहीं हॉट सीटों में वैशाली से आरजेडी के रघुवंश प्रसाद सिंह, काराकाट और उजियारपुर से उपेन्द्र कुशवाहा, उजियारपुर से ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय, गया से जीतन राम मांझी, बेगूसराय से कन्हैया कुमार, मधेपुरा से शरद यादव और सुपौल से रंजीत रंजन की सियासी किस्मत दांव पर है.
इन मुद्दों पर लड़ा गया चुनाव

चुनाव की शुरुआत में तो विकास की बात जोर-शोर से उठाई गई, लेकिन बदलते वक्त के साथ एनडीए के घटक दलों में बीजेपी और एलजेपी ने जहां पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक के बहाने राष्ट्रवाद को मुद्दा बनाया तो सामाजिक विकास की भी बात को नहीं छोड़ा. सवर्ण आरक्षण, शौचालय योजना, उज्ज्वला योजना की भी खूब वकालत की गई. वहीं जेडीयू ने अपने किए विकास कार्यों पर फोकस रखा. वहीं महागठबंधन में कांग्रेस ने राफेल मुद्दे को तरजीह दी और अपनी न्याय योजना का खूब प्रचार किया. वहीं आरजेडी ने शुरुआती लड़ाई तो आरक्षण के मुद्दे पर लड़ी, लेकिन बाद में लालू यादव के जेल जाने के मुद्दे को इमोशनलन बनाने की कोशिश की.

कैसा है राज्य का परिसीमन

बिहार को चुनावी दृष्टि से मोटे तौर पर सात भागों- सीमांचल, कोसी, चम्पारण, सारण, मगध, तिरहुत और मिथिलांचल के क्षेत्रों में बांटा जाता है. इसी के आधार पर रणनीति बनाई जाती है. इस बार सात चरणों में चुनाव करवाने का मकसद भी यही था. भाषा, बोली और स्थानीय संस्कृति के आधार पर सभी क्षेत्र एक दूसरे से भिन्न हैं. इसी तरह इन क्षेत्रों का राजनीतिक मिजाज भी अलग है. पिछली बार जहां सीमांचल, कोसी और मिथिलांचल में एनडीए का सफाया हो गया था वहीं इस बार जमीन पर स्थिति उलट मानी जा रही है.

राज्य में किसने लगाया कितना जोर

बिहार का चुनाव कितना मायने रखता है इसका अंदाजा इस बात से समझा जा सकता है कि चुनाव की घोषणा के बाद पीएम मोदी आठ बार बिहार आए और उन्होंने प्रदेश में 10 बड़ी रैलियों को संबोधित किया. राहुल गांधी ने भी बिहार में छह चुनावी सभाओं को संबोधित किया है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी हर दिन तीन से चार चुनावी सभाएं रोज करते रहे. जबकि तेजस्वी यादव ने करीब 218 से अधिक चुनावी सभाएं कीं. वहीं रविशंकर प्रसाद अपने क्षेत्र में लगभग 200 गांवों का दौरा कर चुके हैं. बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह ने तो आरा और पटना साहिब में रोड शो भी किया, जबकि राहुल गांधी ने भी पटना साहिब क्षेत्र में शत्रुघ्न सिन्हा उर्फ बिहारी बाबू के लिए रोड शो किया.
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