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News18 Special: प्रशासन की नाक के नीचे खेला गया यौन शोषण का घिनौना खेल

बिहार शेल्टर होम रेपकांड: मामलों के खुलासे पर अपनी पीठ थपथपा रही है सरकार

बिहार शेल्टर होम रेपकांड: मामलों के खुलासे पर अपनी पीठ थपथपा रही है सरकार

राज्य के समाज कल्याण मंत्रालय में प्रधान सचिव अतुल प्रसाद के मुताबिक टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) को सरकार ने ही सोशल ऑडिट करने के लिए कहा था जिसकी रिपोर्ट से गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है.

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    मुजफ्फरपुर चिल्ड्रन होम (बालिका गृह) में 29 बच्चियों के साथ यौन उत्पीड़न की सनसनीखेज घटना के बाद राज्य भर में फैले चिल्ड्रन होम और शॉर्ट स्टे होम के संचालन के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. बच्चियों के यौन शोषण की घटनाएं कैमूर, छपरा और हाजीपुर के अल्पावास गृह समेत राज्‍य के ऐसे अन्‍य ठिकानों पर भी होने की खबर है. अलबत्‍ता, यौन हिंसा के इन खुलासों के लिए राज्‍य सरकार अपनी ही पीठ थपथपा रही है. राज्य के समाज कल्याण मंत्रालय में प्रधान सचिव अतुल प्रसाद के मुताबिक टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) को सरकार ने ही सोशल ऑडिट करने के लिए कहा था, जिसकी रिपोर्ट से गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है.

    मुजफ्फरपुर की घटना इतनी व्यापक और सुनियोजित है कि इसने प्रशासनिक मशीनरी के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी तूफान ला दिया है. दरअसल कुछ लड़कियों ने ये बताया है कि बाहरी लोग भी बालिका गृह में आते थे और जोर-जबर्दस्ती करते थे. उन्हें बालिका गृह के बाहर भी ले जाया जाता था.

    तभी विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने इसकी सीबीआई जांच कराने की मांग की और इसे संगठित सेक्स ट्रेड बताते हुए कुछ सफेदपोशों के शामिल होने का दावा किया. उधर संसद में पप्पू यादव ने गृह मंत्री राजनाथ सिंह से उच्चस्तरीय जांच की मांग की. उन्होंने सदन में कहा कि लड़कियों ने मूंछ वाले अंकल और पेट वाले अंकल का नाम लिया था. ये कौन हैं, इसकी जांच होनी चाहिए.

    ये भी पढ़ें-मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौन शोषण कांड में नया खुलासा, पिटाई से हुई थी लड़की की मौत

    टिस की रिपोर्ट में बच्चियों को दी गई शारीरिक यातना का ब्यौरा है. उन्हें जलाया जाता था और शारीरिक संबंध बनाने से पहले हर रोज इंजेक्शन से ड्रग दिया जाता था. 21 बच्चियों के साथ रेप की पुष्टि पीएमसीएच में गठित मेडिकल बोर्ड ने की है. आठ बच्चियों की रिपोर्ट अभी पुलिस को नहीं मिली है.

    पुलिस बालिका गृह चलाने वाले एनजीओ सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संरक्षक ब्रजेश ठाकुर समेत 10 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. बाद में जिला बाल संरक्षण अधिकारी रवि रौशन को भी गिरफ्तार कर लिया गया. इन सभी के खिलाफ चार्जशीट की तैयारी चल रही है.

    (Exclusive : सदमे में हैं यौन उत्पीड़न की शिकार 30 लड़कियां, कुछ ने सुसाइड की कोशिश की)

    छपरा में रेप के बाद गर्भवती हुई महिला
    यहां नारी उत्थान केंद्र द्वारा मौना मोहल्ले में संचालित अल्पावास गृह में एक विक्षिप्त लड़की का गार्ड द्वारा यौन शोषण किया गया और वह लड़की गर्भवती हो गई. सबसे बड़ी बात यह है कि इस मामले को अल्वासगृह संचालिका द्वारा महीनों तक दबाए रखा गया. जब यह मामला उजागर हुआ तो अल्पावास गृह की संचालिका सरोज कुमारी और आरोपी गार्ड रामस्वरूप पंडित को गिरफ्तार कर लिया गया. इस मामले में नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. परियोजना प्रबंधक मनमोहन को इस मामले का शक हुआ था जिसके बाद एक राज्यस्तरीय टीम ने छपरा के अल्पावास गृह का मुआयाना किया और यह मामला सामने आया.

    एनजीओ सचिव रणधीर कुमार की तलाश में रविवार को भी छापेमारी की गई. एनजीओ नारी कल्याण संस्था के सचिव रणधीर कुमार के दिघवारा सहित कई ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है. इस मामले में दो लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है.

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    कैमूर अल्पावा गृह में छेड़खानी पर कोई गिरफ्तारी नहीं
    कैमूर और रोहतास जिले का इकलौता अल्पावास गृह जो कैमूर जिले के कुदरा प्रखंड के लालापुर में स्थित है जहां अभी 22 लड़कियां रहती हैं. अल्पावास गृह की संचालक ग्राम स्वराज संस्थान को लगभग सवा दो लाख रुपए प्रतिमाह तो मिलता है, लेकिन व्यवस्था के नाम पर कुछ भी दिखाई नहीं देता है.

    एक ही कमरे में सभी लड़कियों को ठूंस कर जैसे-तैसे लकड़ी की चौकी पर बिना बेड के ही रखा जाता है. वहीं खाने-पीने की भी कोई सुख-सुविधा दिखाई नहीं देती. पास के बाथरूम से दुर्गंध इतनी ज्यादा निकल रही थी की नाक रखना भी मुश्किल है.

    एक माह पूर्व एक लड़की ने फोन से शिकायत दर्ज कराई थी कि अल्पावास गृह का एक गार्ड उसके साथ छेड़खानी करता है. भभुआ महिला थाना प्रभारी और मोहनिया डीएसपी ने संयुक्त रुप से जांच की और मामला सही पाया गया था जिसमें तीन लोगों को हटा दिया गया था और उस पीड़िता को वहां से बक्सर अल्पावास गृह में शिफ्ट कर दिया गया.

    लेकिन आश्चर्यजनक तौर पर किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई. यही नहीं इस घटना से पहले ही टिस ने अपनी रिपोर्ट में बेहद बुरी इंतजामों का हवाला देते हुए एनजीओ को ब्लैकलिस्ट करने और अल्पावास गृह को अविलंब कहीं और शिफ्ट करने का सुझाव दिया था लेकिन अमल नहीं हुआ.

    हाजीपुर में सरकारी अधिकारी पर ही छेड़खानी का आरोप
    20 जुलाई को हाजीपुर अल्पावास गृह में रह रहीं लड़कियों ने जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीओ) पदाधिकारी मनमोहन प्रसाद सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए. घटना नगर थाना के बाग दुल्हन मोहल्ले की है. लड़कियों के आरोप के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया.

    लड़कियों का आरोप है कि जांच के नाम पर डीपीओ मनमोहन प्रसाद सिंह अल्पावास गृह आकर लड़कियों के साथ अश्लील हरकत करते थे और मुंह खोलने पर उन्हें जान से मारने की धमकी देते थे. पीड़ित लड़की ने यहां तक बताया कि मना करने पर उन्होंने एक पीड़ित लकड़ी के कपड़े भी फाड़ दिए. लड़कियों का कहना है कि आरोपी अधिकारी अकेले कमरे में आ जाते थे और हाथ पैर दबाने के लिए दबाव बनाते थे और फिर अश्लील हरकत करते थे.

    इधर, अल्पावास गृह की संचालिका करूणा कुमारी का कहना है कि जांच के नाम पर अधिकारी सभी स्टाफ को नीचे रहने का निर्देश देते थे और अल्पावास गृह के ऊपर के कमरे में जांच के नाम पर अकेले चले जाते थे. लड़कियों का आरोप है कि यह कारनामा लंबे समय से चल रहा था, लेकिन जब सरकार की ओर से इस अल्पावास गृह को समस्तीपुर तबादला किए जाने का आदेश आया उसके बाद लड़कियां अधिकारी के खिलाफ भड़क गईं और अल्पावास गृह का काला सच उजागर कर दिया.

    एक एनजीओ पर औसत खर्च 30 लाख रुपए
    बालिका गृह में 6 से 18 साल की बच्चियों को रखा जाता है जबकि बाल गृह में भी 6-18 साल के बच्चों को रखने का प्रावधान है. बालिका और बाल गृह की तरह महिलाओं के लिए अल्पावास गृह का निर्माण किया गया है. अल्पावास गृह में 18 साल से ऊपर की लड़कियों और महिलाओं को रखा जाता है.

    बिहार में लगभग 11 बालिका गृह, 24 बाल गृह और 15 अल्पावास गृह फिलहाल चलाए जा रहे हैं. बिहार सरकार अपने स्तर के अलावा एनजीओ के जरिए इन संस्थानों का संचालन करती है. एक बालिका गृह में कुल 50 बच्चियों को रखने का प्रावधान है. इसका संचालन बिहार सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाता है.

    एक बालिका गृह/ बाल गृह पर लगभग 30 लाख रुपए का सालाना खर्च आता है जिसमें मकान का किराया और बच्चे/ बच्चियों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था की जाती है. गृहों के संचालन में एक काउंसलर के साथ-साथ 10 लोगों को रखने का प्रावधान है. इन गृहों के संचालन में 90 फीसदी सरकार और 10 फीसदी संबंधित एनजीओ के द्वारा खर्च करने का प्रावधान है.

    समाज कल्याण विभाग समय-समय पर इन संस्थानों का निरीक्षण करता है. जिले स्तर पर चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट का गठन किया है. जिले के बालिका गृह और बाल गृह के निरीक्षण की जिम्मेदारी एडिनशल डायरेक्टर (चाइल्ड प्रोटेक्शन) की होती है. साथ ही दो चाइल्ड प्रोटेक्शन अधिकारी भी होते हैं जो उनकी मदद करते हैं.

    एक एनजीओ से 11 महीने का कॉन्ट्रैक्ट किया जाता है और फिर रिकॉर्ड को देखते कर कॉन्ट्रैक्ट को आगे बढ़ाया जाता है. अनियमितता की रिपोर्ट मिलने पर एनजीओ का कॉन्ट्रैक्ट कैंसल कर दूसरे को मौका दिया जाता है. किसी एनजीओ के सलेक्शन में 10 लाख का टर्न ओवर के साथ बाल कल्याण और बाल प्रोटेक्शन के क्षेत्र में तीन साल का अनुभव होना जरूरी होता है.

    (कैमूर से प्रमोद कुमार, छपरा से संतोष और हाजीपुर से राजीव मोहन के साथ आलोक कुमार की रिपोर्ट)

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