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'सुशासन बाबू' के राज में खाली हुआ खजाना, ट्रेजरी से पैसे निकालने पर रोक

'सुशासन बाबू' के राज में खाली हुआ खजाना, ट्रेजरी से पैसे निकालने पर रोक

वित्तीय वर्ष 2014-15 के आखिरी दिन यानि 31 मार्च को बिहार की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गयी. राज्य का सरकारी पचना खजाना मंगलवार को लगभग खाली हो गया. मालूम हो कि सुशासन बाबू के नाम से लोकप्रिय नीतीश कुमार करीब नौ साल से बिहार के मुख्‍यमंत्री हैं.

वित्तीय वर्ष 2014-15 के आखिरी दिन यानि 31 मार्च को बिहार की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गयी. राज्य का सरकारी पचना खजाना मंगलवार को लगभग खाली हो गया. मालूम हो कि सुशासन बाबू के नाम से लोकप्रिय नीतीश कुमार करीब नौ साल से बिहार के मुख्‍यमंत्री हैं.

वित्तीय वर्ष 2014-15 के आखिरी दिन यानि 31 मार्च को बिहार की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गयी. राज्य का सरकारी पचना खजाना मंगलवार को लगभग खाली हो गया. मालूम हो कि सुशासन बाबू के नाम से लोकप्रिय नीतीश कुमार करीब नौ साल से बिहार के मुख्‍यमंत्री हैं.

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वित्तीय वर्ष 2014-15 के आखिरी दिन यानि 31 मार्च को बिहार की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गयी. राज्य का सरकारी पचना खजाना मंगलवार को लगभग खाली हो गया. मालूम हो कि सुशासन बाबू के नाम से लोकप्रिय नीतीश कुमार करीब नौ साल से बिहार के मुख्‍यमंत्री हैं.

सरकारी खजाने में पैसा न रहने के कारण कई विभागों का पैसा निकालने का प्रस्ताव रोक दिया. वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन कई अहम विभागों ने अपने बजट की राशि निकालने की कोशिश की, लेकिन वित्त विभाग ने इस पर रोक लगा दिया.

खजाना खाली होने के कारण सरकार के कई अहम विभागों का इस वित्तीय वर्ष का खर्च लटक गया. वैसे पैसे के संकट से जूझ रही सरकार ने पिछले चार दिनों से सूबे के कोषागारों से किसी तरह की निकासी पर रोक लगा दिया था. वेतन को छोड़कर बाकी किसी काम के लिए पैसा निकालने की इजाजत नहीं थी.

सरकारी सूत्रों ने बताया कि अप्रैल महीने में भी केंद्र से पैसा आने के बाद ही राज्य सरकार किसी तरह का खर्च कर पाने में संभव होगी.

31 मार्च को राज्य की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गयी है. बिहार सरकार का खजाना लगभग खाली हो गया है. वहीं चार दिनों से ट्रेजरी से पैसा निकालने पर रोक लगी थी. कई विभागों के बजट का पैसा नहीं निकला. बिजली का 900 करोड़, एससीएसटी का 110 करोड़, पंचायती राज का 10 अरब, उद्योग का 10 करोड़ अट गया है.

वाणिज्य कर विभाग का 18 करोड़ भी नही निकल सका है. वित्तीय व्यवस्था सुधरने में समय लगेगा, केंद्र से पैसा आने के बाद ही स्थिति सुधर पायेगी.

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