नहीं रुका पलायन, कोसी-मिथिलांचल से बड़े पैमाने पर मज़दूर हरियाणा-पंजाब रवाना

बस में लगभग चालीस लोग थे जिनमें अधिकांश लोग क़ोसी इलाक़े के थे.

बस में लगभग चालीस लोग थे जिनमें अधिकांश लोग क़ोसी इलाक़े के थे.

बिहार सरकार ने दावा किया था की उनके रोज़गार की व्यवस्था बिहार में ही की जाएगी. दावा ये भी था कि श्रमिकों के लिए मनरेगा के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही है जिसमें रोज़गार दिया जा रहा है. सरकार के दावे से ठीक उलट कोसी-, मिथिलांचल जैसे इलाक़े से बड़े पैमाने पर मज़दूरों का पलायन जारी है.

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पटना. कोरोना संक्रमण के दौर के बीच जो अप्रवासी बिहारी श्रमिक देश के दूसरे राज्यों में काम छूटने के बाद बिहार वापस लौट आए थे, उन लोगों के लिए बिहार सरकार ने दावा किया था की उनके रोज़गार की व्यवस्था बिहार में ही की जाएगी. दावा ये भी था कि श्रमिकों के लिए मनरेगा के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही है जिसमें रोज़गार दिया जा रहा है. सरकार के दावे से ठीक उलट कोसी-, मिथिलांचल जैसे इलाक़े से बड़े पैमाने पर मज़दूरों का पलायन जारी है. NEWS 18 की टीम को दरभंगा-मधुबनी फ़ोर लेन पर कई बसें नज़र आईं जो बिहारी मज़दूरों को बिठाकर पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में ले कर जा रहा थीं. बसों में बैठे मज़दूरों और पंजाब से आए ठेकेदार से बातचीत हुई. जो जानकारियां सामने आईं वो सरकार के दावे पर सवाल तो उठा ही रही थी, साथ ही हैरान भी कर रही थीं.

बस में सुपौल और सहरसा के कई मज़दूर सवार थे. उनसे जब पूछा गया कि आख़िर घर छोड़कर क्यूं जा रहे हैं? श्रमिक संतोष ने जवाब दिया, "क्या करें! गांव में रोज़गार मिल नहीं रहा है. लॉकडाउन की वजह से पहले ही परेशान थे, अब बारिश का समय भी है और कोशी इलाक़े में बाढ़ की समस्या भी रहती है. सो

आने वाले समय में समस्या और बढ़ने वाली है. पंजाब में जाने पर हमें ठीक ठाक काम मिल जाता है, पैसे भी ठीक मिल जाते हैं. इसलिए जा रहे हैं. ये हाल सिर्फ़ संतोष की नहीं है. बस में लगभग चालीस लोग थे जिनमें अधिकांश क़ोसी इलाक़े के थे.

मधेपुरा के रहने वाले मोहन कहते हैं, "गांव में रोज़गार है ही नहीं. पिछले कई साल से इस इलाक़े के लोग रोज़गार के लिए बाहर जाते हैं, हम भी जा रहे हैं. जब उनसे पूछा गया कि मनरेगा का काम भी तो मिल रहा होगा गांव में तो कहते हैं कि 200 रुपये में क्या होगा. वो भी कब तक मिलेगा, उसमें भी तो काम नहीं मिल रहा है. पंजाब में हमारे साथ कई लोग जा रहे हैं और अभी और लोग जाने की तैयारी कर रहे हैं. पंजाब में हमें ठीक ठाक पैसा मिल जाता है. इस वजह से बड़ी संख्या में हमारे यहां के लोग जाते हैं लेकिन साथ ही ये भी कहना नहीं भूलते कि क्या करें, अपने घर को छोड़कर इतनी दूर, कौन जाना चाहता है लेकिन परिवार का पेट भी तो पालना है."
बस में सवार ऐसे कई मज़दूर थे जो अपनी बेबसी जताना चाहते थे कि अगर रोज़गार बिहार में ही मिल जाता तो पलायन नहीं करना पड़ता. इन लोगों को लेकर जा रहे पंजाब से आए करमवीर से जब हमने बातचीत की तो उन्होंने कहा, "पंजाब और हरियाणा में बिहार के मज़दूरों की खूब डिमांड है. इसी वजह से इन्हें ले जा रहे हैं. पिछले कई वर्षों से कोसी इलाक़े से मज़दूर जाते रहे हैं लेकिन इस बार लॉकडाउन की वजह से ट्रेन से समस्या हुई तो पंजाब और हरियाणा से कई बसें भेजी गई हैं जिससे मज़दूर वहां जा रहे हैं."

बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का कहना है कि हम बड़े पैमाने पर रोज़गार मुहैया करवा रहे हैं. मनरेगा की कई योजनाएं चल रही हैं. श्रमिक काम कर रहे है, लेकिन अगर बावजूद इसके कोई कही जाना चाहता है तो उन्हें रोका नहीं जा सकता है. हमारा प्रयास होगा कि वैसे लोगों को भी रोका जाए और उन्हें बिहार में ही रोज़गार दिलाया जाए.

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