'कौन है लालू यादव का तीसरा बेटा? जिसके नाम पर ली जमीन', जन्मदिन पर JDU का बड़ा हमला
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'कौन है लालू यादव का तीसरा बेटा? जिसके नाम पर ली जमीन', जन्मदिन पर JDU का बड़ा हमला
मंत्री नीरज कुमार ने पूछा कि तेजप्रताप के साथ जिस तरुण यादव के नाम पर जमीन खरीदी गई, वह कौन हैं. लालू परिवार को ये बताया चाहिए

मंत्री नीरज कुमार (Neeraj Kumar) ने कहा कि साल 1993 में फुलवरिया में 3 कट्ठा 11 धुर और 6 कट्ठा जमीन लिखवाई गयी. जिसमें खरीदार के रूप में तेजप्रताप यादव (Tajpratap Yadav) और तरुण कुमार यादव पिता लालू प्रसाद यादव दर्ज है.

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पटना. बिहार सरकार के मंत्री नीरज कुमार (Neeraj Kumar) ने जमीन रजिस्ट्री के मामले को लेकर राजद सुप्रीमो लालू यादव (Lalu Yadav) और उनके परिवार पर बड़ा हमला बोला. उन्होंने कहा कि लालू यादव ने अपने शासन काल में एक जमीन की रजिस्ट्री कराई थी. जिसमें उनके बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव (Tejpratap Yadav) और तरुण यादव के नाम दर्ज हैं. आखिर ये तरुण यादव कौन है? लालू प्रसाद के परिवार में कोई तरुण यादव नहीं है, तो फिर यह व्यक्ति कौन है. इसका जवाब लालू परिवार को देना चाहिए.

मंत्री नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि लालू यादव ने अपने सगे बड़े भाई स्वर्गीय मंगरु यादव के बेटों से दिनांक 04.11.2003 को नाबालिग तेजप्रताप के नाम पर 8 कट्ठा 17 धुर जमीन लिखवा ली. साथ ही साथ फुलवरिया के कई लोगों से भी नौकरी के बदले जमीन लिखवाई. मंत्री ने आरोप लगाया कि लालू जी को बेनामी संपत्ति अर्जित करने की इस कदर भूख थी कि उन्होंने तेजप्रताप और तेजस्वी के अलावा एक और तीसरे बेटे तरुण कुमार यादव के नाम जमीन लिखवा ली. जिसका कहीं कोई अता पता नहीं है. उन्होंने पूछा है की आखिर ये तरुण यादव कौन और कहां हैं.

तेजप्रताप के साथ खरीदार के रूप में दर्ज है तरुण यादव का नाम 



मंत्री ने जमीन निबंधन के प्रमाणिक दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि साल 1989 में पैदा हुए तेजप्रताप के नाम से साल 1993 में मात्र 4 वर्ष की उम्र में फुलवरिया के लोगों से नौकरी के बदले 3 कट्ठा 11 धुर और 6 कट्ठा जमीन लिखवा ली. जिसमें खरीदार के रूप में तेजप्रताप यादव और तरुण कुमार यादव वल्द लालू प्रसाद यादव दर्ज है. आखिर तरुण कुमार यादव कौन हैं, कहां हैं और तेजप्रताप के साथ साझे में ली गई जमीन में दोनों के पिता की जगह लालू यादव का नाम कैसे दर्ज है. इसके अलावा तेजप्रताप के नाम 01.02.94 को भी बलम चौधरी से 2 कट्ठा 16 धुर जमीन लिखवाया गया. इन सभी रजिस्ट्री में अभिभावक के रूप में किसी का कोई उल्लेख नहीं, जो कि सीधे-सीधे बाल उत्पीड़न का मामला बनता है कि आखिर नाबालिग के नाम बिना अभिभावक के उल्लेख इन्होंने जमीन कैसे लिखवाई.
उन्होंने कहा कि कैदी नंबर-3351 पर बेनामी संपत्ति बनाने का आरोप लगता रहा है, लेकिन अब तो तीसरे बेटे तरुण कुमार यादव को गुमनाम और गुमशुदा रखने का आरोप प्रकट होता है.



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