Bihar Panchayat Chunav: बिहार में कब होंगे पंचायत चुनाव? इस तारीख को मिलेगा जवाब..

बिहार में कब पंचायत चुनाव होंगे, इसका इंतजार सभी प्रत्याशियों को है.

बिहार में कब पंचायत चुनाव होंगे, इसका इंतजार सभी प्रत्याशियों को है.

Bihar Panchayat Chunav: पंचायत चुनाव कब होगा, इस सवाल का जवाब बिहार के वो तमाम उम्मीदवार जानना चाह रहे हैं जो पंचायत चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन जवाब उन्हें नहीं मिल पा रहा है. पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी कहते हैं सरकार पूरी तरह से तैयार है.

  • Last Updated: April 12, 2021, 12:02 AM IST
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पटना. बिहार में पंचायत चुनाव (Bihar panchayat Election) की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सभी उम्मीदवार जोर-शोर से तैयारियों में जुटे हुए हैं. चुनाव की डेट्स को लेकर सस्पेंस बरकरार है. पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से हों या EVM से, इसे लेकर भी पेंच फंसा हुआ है. अब पटना हाई कोर्ट में बिहार और केंद्रीय निर्वाचन आयोग के बीच EVM और बैलेट पेपर को लेकर याचिका दाखिल की गई है. फिलहाल इस पर कोई फैसला आया नहीं है, अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी, जिसमें तारीखों के ऐलान के साथ ही चुनाव ईवीएम से होगा या बैलेट पेपर से इस पर भी निर्णय हो सकता है.

राज्य निर्वाचन आयोग ने पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर कर रखा है. अभी तक सात बार इस मामले में सुनवाई हो चुकी है लेकिन कोई फ़ैसला नही हो पाया है. अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होने वाली है. जिस पर राज्य निर्वाचन आयोग से लेकर बिहार के पंचायत चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और उनके समर्थकों की निगाहें भी टिकी हुई हैं. 10 चरणों में पंचायत चुनाव होंगे, लेकिन ईवीएम को लेकर पेंच फंसा हुआ है. अब 21 अप्रैल को पटना हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई है और उस दिन फ़ैसला क्या आता है उस पर पंचायत चुनाव समय पर होगा की नहीं, फ़ैसला हो पाएगा.

वहीं, बिहार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी कहते हैं, राज्य सरकार के तरफ़ से कोई समस्या नहीं है, जब भी चुनाव हो हम तैयार हैं, लेकिन आगे जो भी कदम उठाना होगा वो हम हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद ही तय करेंगे. दरअसल पंचायतों की जो वर्तमान में जितने भी कमिटी है उसकी मियाद 15 जून तक ही है. अगर 15 जून से पहले चुनाव नही हुए तो सरकार के सामने कई समस्याएं आ सकती हैं.

ऐसी स्थिति में सरकार क्या विकल्प आजमाएगी, इस पर एक नजर...


  • अगर समय पर चुनाव नहीं होते हैं तो राज्य सरकार प्रखंड के प्रशासनिक अधिकारियों के अधीन पंचायत करे देगी ताकि विकास कार्य पर असर ना पड़े.


  • 15 साल बाद ऐसे हालात बन सकते हैं जब से नीतीश कुमार शासन में है.




  • तदर्थ व्यवस्था में ज़रूरी कार्य हो सकते है, पंचायत के विकास कार्य ज़्यादा प्रभावित ना हो इसके लेकर अधिकारी सीमित दायरे में विकास कार्य से जुड़े फ़ैसले ले सकते हैं.


  • पंचायत के लिए कोई बड़ा फ़ैसला लेने के लिए अधिकारियों को ज़िला मुख्यालय और राज्य सरकार से आदेश लेना पड़ सकता है.


  • इसके पहले पंचायत के विकास से जुड़ा कोई भी फ़ैसला पंचायत के निर्वाचित सदस्य ग्राम सभा और ग्राम पंचायत की बैठक में फ़ैसला लेते थे, छोटे मोटे विवाद का निपटारा भी हो जाता था.


  • पंचायत चुनाव में देर होने से नीतीश कुमार के महत्वकांक्षी योजना सात निश्चय पर भी असर पड़ सकता है , जल कल योजना, गली नली योजना, सहित विकास के कई और विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं.



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