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OPINION: मजदूर से लेकर MBA तक बने मुखिया, क्या बिहार में बदल रहा पंचायत चुनाव का ट्रेंड

बिहार पंचायत चुनाव में दो फेज की वोटिंग और गिनती हो चुकी है

बिहार पंचायत चुनाव में दो फेज की वोटिंग और गिनती हो चुकी है

Bihar Panchayat Election: बिहार में जारी पंचायत चुनाव में इस बार कई बड़े चेहरों को मुंह की खानी पड़ी है. परिवर्तन की बयार ऐसी बही है कि अभी तक डिप्टी सीएम के भाई और बिहार सरकार के एक मंत्री की भाभी को भी पंचायत चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है.

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पटना. बिहार में पंचायत चुनाव (Bihar Panchayat Election) का शोर जारी है. ग्यारह चरणों में चुनाव होना है जिसमें दो चरण के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और परिणाम भी आ गये हैं. अब तक के चुनाव के ट्रेंड को देख कर कई बातें सामने आ रही है. मसलन, चुनाव के दौरान महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, पुराने चेहरों की जगह नए चेहरे सामने आये हैं, तकनीकी शिक्षा प्राप्त प्रत्याशियों ने भी चुनाव में बाजी मारी है वहीं समाज के निचले वर्ग के लोगों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की है.

नए चेहरों पर भरोसा
पंचायत चुनाव परिणाम को देखने से लगता है कि मतदाताओं ने चुनाव में पुराने चेहरे की जगह नए चेहरों को तरजीह दी है. चुनाव परिणाम से बदलाव की लहर साफ तौर पर दिख रही है. दूसरे चरण में 34 जिलों के 48 प्रखंडों की 692 पंचायतों की मतगणना हुई. अधिकांश प्रखंडों में मतदाताओं ने नए उम्मीदवारों पर अधिक भरोसा जताया है, जिसमें युवा और महिलाओं की संख्या अच्छी खासी है. नवादा में 70% से अधिक नए प्रत्याशियों को कामयाबी मिली है. हाजीपुर में मुखिया और जिला परिषद पदों पर 90% नए चेहरे चुनाव जीते हैं. बेगूसराय के भगवानपुर में तो 15 में से 14 मुखिया को हार का मुंह देखना पड़ा. उत्तर बिहार के सात जिलों के 15 प्रखंडों में अधिकतर सीटों पर वोटरों ने पुराने चेहरे को नकार दिया है. कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार के इलाकों में भी ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिले हैं.

पढ़े-लिखे लोगों को भी तरजीह
बिहार पंचायत चुनाव में मतदाताओं ने पढ़े-लिखे लोगों को भी तरजीह दी है. रिटायर्ड डीएसपी से लेकर एमबीए डिग्रीधारी युवाओं ने भी जीत का परचम लहराया है. पश्चिम चंपारण में एमबीए पास अरविंद कुमार महतो ने मुखिया पद पर कब्जा जमाया तो जमुई के अलीगंज प्रखंड के कोलहना पंचायत में एमबीए और एलएलबी पास सत्यम कुमार ने चुनाव में जीत हासिल की है. रिटायर्ड डीएसपी परशुराम राम ने भी मुखिया पद के लिए जीत हासिल की. इसी तरह खगड़िया के अगुवानी पंचायत से इंजीनियर स्मृति कुमारी मुखिया पद पर काबिज हुई. स्मृति कुमारी लाखों की नौकरी छोड़कर चुनाव मैदान में उतरीं थी.

मजदूर बनी मुखिया
समाज के निचले वर्ग के लोगों ने भी चुनाव में जीत हासिल की है. जमुई जिले की सहोड़ा पंचायत में ईंट भट्ठा पर काम करने वाली रेखा देवी ने चुनाव में जीत हासिल कर सबको चौंका दिया. रेखा देवी 5 प्रत्याशियों को पराजित कर मुखिया बनी. रेखा को गांव के लोगों ने ही चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया और हर तरह से मदद भी की.

राजनीतिक घराने को मिली हार
पंचायत चुनाव में राजनीतिक परिवार के लोगों ने भी किस्मत आजमायी लेकिन उन्हें हार नसीब हुई. मुंगेर जिला के तारापुर प्रखंड की मानिकपुर पंचायत में पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी की भाभी मीना देवी मुखिया का चुनाव हार गईं वहीं उपमुख्यमंत्री रेणु देवी के भाई रवि कुमार को भी जिला परिषद के चुनाव में हार मिली है.

दोनों चरणों में अच्छा मतदान
पंचायत चुनाव के दोनों चरण में 50 फीसदी से ज्यादा मतदान हुआ है. पहले चरण में जहां 60 फीसदी मतदान हुआ वहीं दूसरे चरण में 55.02 फीसदी मतदान हुआ. मतदान के दौरान कई जगह लंबी-लंबी कतारें देखने को मिली. कई जगह तो समय सीमा समाप्त हो जाने के बाद भी लोग मतदान के लिए कतार में खड़े दिखे, जिन्होंने देर शाम तक मतदान किया. लोगों में मतदान को लेकर उत्साह इस कदर रहा है कि गया केे गुरारु प्रखंड के शंकरबिगहा गांव में ग्रामीणों ने मतदान केन्द्र तक जाने में बाधा बन रहे एक बरसाती नदी के उपर पुल बना डाला ताकि लोग आसानी से मतदान कर सकें.

महिलाओं की सशक्त भागीदारी
पंचायत चुनाव में महिलाओं को मिले आरक्षण ने चुनाव में उनकी सक्रियता बढ़ा दी है. दोनों चरणों में महिलाओं ने मतदान में बढ़-चढ़ कर भाग लिया है. पुरुषों की तुलना में महिलाओं ने अधिक संख्या में मतदान किया. आंकड़ों के अनुसार दूसरे चरण में जहां 46.02 प्रतिशत पुरुषों ने मतदान किया, वहीं 60 प्रतिशत महिलाओं ने वोट दिया. जिउतिया पर्व के दौरान उपवास के बाद भी महिलाएं मतदान करने में पीछे नहीं रही.

छिटपुट हंगामे की खबर को छोड़कर दोनों चरण के चुनाव अब तक शांतिपूर्ण रहे हैं. इस बार के पंचायत चुनाव में हाईटेक सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है. नामांकन से लेकर मतगणना तक पूरी तरह तकनीक का उपयोग किया जा रहा है. बोगस वोटिंग रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर बायोमीट्रिक मशीन का सहारा लिया जा रहा है. महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तथा नितांत स्थानीय चुनाव के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने से यह साफ है कि हमारा लोकतंत्र परिपक्व हो रहा है.

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