आखिर तेजस्वी यादव 'गायब' क्यों हुए? ये है इसके पीछे की असली कहानी!

सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी ने इसी कोशिश में अपने आप को इन तमाम विवादों से अपने आप को दूर रहते हुए मनन चिंतन किया और अब विधानसभा में नए तेवर के साथ उतर गए हैं.

Amitesh | News18 Bihar
Updated: July 1, 2019, 8:20 PM IST
आखिर तेजस्वी यादव 'गायब' क्यों हुए? ये है इसके पीछे की असली कहानी!
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव
Amitesh | News18 Bihar
Updated: July 1, 2019, 8:20 PM IST
आरजेडी के भविष्य और लालू यादव के उत्तराधिकारी माने जाने वाले तेजस्वी यादव के अज्ञातवास से घर वापसी पर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं. तेजस्वी यादव के गायब होने पर काफी चर्चा हो रही है, इस चर्चा का सबसे बड़ा विषय यह है कि आखिर तेजस्वी गायब क्यों हुए. लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनकी गुमशुदगी 'गम' को लेकर थी या फिर लड़ाई सत्ता को लेकर थी.

सत्ता, पार्टी और परिवार पर वर्चस्व
लालू यादव ने जेल जाने से पहले तेजस्वी को पहले डिप्टी सीएम और फिर नेता प्रतिपक्ष बनाकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान बड़े भाई तेजप्रताप यादव की तरफ से दिखाए गए बागी तेवर ने तेजस्वी को परेशान कर दिया. जहानाबाद में हार ने साफ कर दिया कि तेजप्रताप के बागी उम्मीदवार ने ही आरजेडी के उम्मीदवार को हरा दिया, वरना आरजेडी शून्य पर आउट नहीं होती.

तेज प्रताप और तेजस्वी यादव


दो मोर्चों पर संघर्ष 
हार के बाद एकांतवास में तेजस्वी के जाने के पीछे की कहनी भी यही है. सूत्र बताते हैं कि तेजस्वी चाहते हैं पूरी पार्टी पर अब उनका नियंत्रण हो, इसीलिए हार के बाद लगभग एक महीने तक नदारद रहे. तेजस्वी को दो मोर्चों पर इसके लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. पहला पार्टी के भीतर और दूसरा परिवार के भीतर.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर रघुवंश प्रसाद सिंह, अब्दुलबारी सिद्दीकी, शिवानंद तिवारी जैसे सीनियर नेता तेजस्वी की कार्यशैली को लेकर नाराज हैं. खासतौर से लोकसभा चुनाव में हार के बाद उनका गायब रहना उन्हें और नागवार गुजरा है. इन नेताओं ने वक्त-वक्त पर इसका इजहार भी कर दिया है. तेजस्वी की कोशिश इन सबके ऊपर अपने-आप को स्थापित कर पार्टी का सर्वेसर्वा बनने की है.
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राजनीतिक मोर्च पर तेजस्वी को साबित करनी की चुनौती


परिवार में तेज प्रताप की चुनौती
दूसरी तरफ, परिवार के भीतर भी बड़े भाई तेजप्रताप और बहन मीसा भारती के ऊपर अपने आप को स्थापित करना उनके लिए बड़ी चुनौती है. बहन मीसा भारती तो मुखर नहीं हैं, लेकिन भाई तेजप्रताप की तरफ से बढ़ती सक्रियता कई बार पार्टी लाइन के खिलाफ भी हो जाती है. कभी तेज सेना बनाकर तो कभी अलग से बैठक बुलाकर, तेजप्रताप ऐसा कदम उठाते रहते हैं, जिससे तेजस्वी असहज रहते हैं.

ऐसे में तेजस्वी की कोशिश परिवार के भीतर चल रही खींचतान में भी अपने आप को सबसे ऊपर साबित करने की है. सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी ने इसी कोशिश में अपने आप को इन तमाम विवादों से अपने आप को दूर रहते हुए मनन चिंतन किया और अब विधानसभा में नए तेवर के साथ उतर गए हैं.

राजनीति हमले
आरजेडी प्रवक्ता मनोज झा न्यूज18 से बातचीत में कहते हैं कि तेजस्वी को गायब बताने वाले अब अपनी चिंता करें. आरजेडी की सहयोगी आरएलएसपी के प्रवक्ता और महासचिव माधव आनंद कहते हैं कि जेडीयू-बीजेपी को मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत पर चिंता करनी चाहिए, तेजस्वी यादव के स्वास्थ्य की चिंता करने के लिए हमलोग तो हैं ही.

बुझ चुकी है लालटेन
हालांकि जेडीयू विरासत में मिले तेजस्वी के नेता प्रतिपक्ष के पद पर कटाक्ष कर रही है. जबकि बीजेपी को आरजेडी का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है. लालू यादव के सहयोगी रहे बीजेपी सांसद रामकृपाल यादव ने दावा किया है कि अब लालटेन बुझ चुकी है.

लेकिन विरोधियों के हमले के बावजूद अब तेजस्वी की नज़र पार्टी - परिवार में सबकुछ अपने नियंत्रण में लेने की है. जल्द ही आरजेडी में संगठन का चुनाव होने वाला है. ऐसे में लालू यादव के जेल में रहने की स्थिति में संगठन के चुनाव से निकलने वाला संदेश लालू यादव की पार्टी-परिवार के भविष्य का फ़ैसला करने वाला होगा.

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First published: July 1, 2019, 6:52 PM IST
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