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नीतीश कुमार के नाम पर अमित शाह की 'मुहर' से लगने लगे विपक्षी दलों में टूट के कयास

Brijam Pandey | News18 Bihar
Updated: October 19, 2019, 7:28 PM IST
नीतीश कुमार के नाम पर अमित शाह की 'मुहर' से लगने लगे विपक्षी दलों में टूट के कयास
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. (फाइल फोटो)

बिहार के सियासी माहौल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के बयान ने गर्मा दिया है. शाह ने News 18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में ही राजग (NDA) अगला विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) लड़ेगा. इससे दल-बदल के आकांक्षी नेताओं की छटपटाहट बढ़ गई है.

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पटना. भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) के एक बयान ने बिहार की सियासत को गर्मा दिया है. शाह ने बीते दिनों News 18 को दिए इंटरव्यू में कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग (NDA), बिहार में 2020 का विधानसभा चुनाव सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) के नेतृत्व में ही लड़ेगा. अमित शाह के बयान के बाद इसके सियासी मायने निकाले जाने लगे. राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल दल बीजेपी और जेडीयू (JDU) जहां इस बयान से उत्साहित दिख रहे हैं. उन्हें लगता है कि सफलता अब उनके हाथ में है. इसके उलट राज्य की विपक्षी पार्टियों (Opposition Parties) को लेकर इस बयान के अलग मायने निकाले जा रहे हैं. भाजपा और जदयू जैसे दलों को लगता है कि अमित शाह का बयान आने के बाद विपक्ष के कई दलों में अब फूट पड़ेगी, उसके नेता राजग की तरफ आएंगे. हालांकि सियासी जानकार मानते हैं कि जिस तरफ नीतीश कुमार रहे हैं उसका पलड़ा भारी जरूर रहा है, लेकिन ये कहना काफी जल्दबाजी होगी कि अन्य दलों के नेता टूटेंगे? क्योंकि सभी नेता अपना समीकरण देखकर ही पार्टी बदलते हैं.

जहां नीतीश, वहीं सफलता
आागामी विधानसभा चुनाव में भी नीतीश कुमार पर भरोसा करने के पीछे कई वजहें हैं. दरअसल, बिहार में हुए पिछले 3 विधानसभा चुनावों में सियासी समीकरण भले ही बदलते रहे हों, एक फॉर्मूला- जिधर नीतीश, उधर सफलता- कामयाब रहा है. साल 2005, 2010 और 2015 के चुनाव के आंकड़े इसकी गवाही देते हैं. 2015 के चुनाव में नीतीश कुमार एनडीए से अलग रहते हुए भी, सत्ता के शिखर तक पहुंचने में कामयाब रहे थे. बाद में एक महत्वपूर्ण नाटकीय सियासी घटनाक्रम ऐसा हुआ कि नीतीश और एनडीए फिर साथ आ गए. ऐसे में अमित शाह का बयान आने के बाद जहां राजग के दल चुनाव को लेकर उत्साहित दिख रहे हैं. वहीं इन दलों को ये भी लगता है कि नीतीश कुमार का यह रिकॉर्ड देखते हुए ही विपक्षी पार्टियों में टूट हो सकती है.

जदयू का दावा- कई नेता हैं संपर्क में

जदयू के मुख्य प्रवक्ता संजय सिंह ने दावा किया है कि विपक्ष के कई नेता उनके संपर्क में हैं. जैसे ही मौका मिलेगा वह अपनी पार्टी छोड़कर जेडीयू में शामिल हो जाएंगे. संजय सिंह पिछले तीन विधानसभा चुनावों के परिणामों का आंकड़ा देते हुए कहते हैं, 'नीतीश कुमार जिस तरफ रहे हैं, उस तरफ बहुमत रहा है. 2005, 2010 और 2015 के विधानसभा चुनाव के नतीजे देख लीजिए, जिस तरफ नीतीश कुमार हैं उस तरफ ही बहुमत है.' भाजपा के प्रवक्ता निखिल आनंद ने भी ऐसा ही दावा किया. आनंद ने कहा, 'अब दूसरी पार्टियां टूटने को तैयार हो गई हैं. उनके नेता भी अपने मुताबिक पार्टी बदलने को तैयार हैं. हमने तो यह भी ऑफर दिया है कि जो नेता राष्ट्रवादी सोच रखता है, उसका बीजेपी में स्वागत है.'

गृह मंत्री अमित शाह ने न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में नीतीश कुमार की अगुवाई में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने से जुड़ा बयान दिया.


विपक्ष ने कहा- सत्ता का बड़बोलापन
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सत्तारूढ़ दल के उत्साह और दावे से बिहार की विपक्षी पार्टियां नाराज हैं. विपक्षी दलों ने इसे सत्ताधारी गठबंधन का बड़बोलापन करार दिया है. इन नेताओं ने राजग के दावे से उलट कहा कि राज्य की जनता इस बार बदलाव चाहती है. राजद नेता मृत्युंजय तिवारी कहते हैं, '15 साल हो गए बिहार में, विकास नहीं हुआ. लोगों ने जिस उम्मीद से नीतीश कुमार को गद्दी पर बैठाया था, वह पूरी नहीं हुई. इस बार जनता बदलाव चाहती है. नीतीश कुमार को जनता बदल ही देगी. सत्तारूढ़ दल मुगालते में ना रहे. जनता बदला जरूर लेगी.'

सियासी जानकार की राय
हालांकि बिहार की सियासत के जानकार यह तो मानते हैं कि नीतीश कुमार जिस तरफ रहे हैं, उसका पलड़ा भारी रहा है. लेकिन यह भी सच है कि कई नेता अपना हानि-लाभ देखकर अन्य दलों के साथ जुड़े रहे हैं. जानकारों का मानना है कि चंद नेताओं को छोड़, विपक्ष में भारी टूट होने की आशंका नहीं है. वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं, 'आरजेडी के सदस्यता अभियान के दौरान कई नेताओं ने बगावत किया था. किसी भी दल का नेता हो, वह राजनीतिक समीकरण देखकर ही अपनी पार्टी बदलता है. हालांकि विधानसभा चुनाव में दल बदलने की परंपरा रही है. फिर भी यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि कोई विपक्षी नेता अभी से टूटने को तैयार होगा.' बहरहाल, विधानसभा चुनाव में अभी एक साल बाकी है. क्रिकेट और राजनीति में 'गेम' कब बदल जाए, कहा नहीं जा सकता. ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन का दावा हकीकत में कितना बदलेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा.

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First published: October 19, 2019, 7:28 PM IST
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