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CM नीतीश की जल-जीवन जागरण अभियान यात्रा के पीछे सामाजिक चेतना या फिर राजनीतिक उद्देश्य?

Pankaj Kumar
Updated: December 16, 2019, 12:54 PM IST
CM नीतीश की जल-जीवन जागरण अभियान यात्रा के पीछे सामाजिक चेतना या फिर राजनीतिक उद्देश्य?
बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार जल-जीवन हरियाली यात्रा के जरिये प्रदेश की जनता से जुड़ने की जुगत में हैं. (फाइल फोटो)

Bihar Politics: मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) जल-जीवन हरियाली यात्रा के जरिये प्रदेश की जनता से संपर्क साधने की कोशिश में जुटे हैं. ऐसे में प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि यह यात्रा सामाजिक उद्देश्‍य के लिए निकाला गया है या फिर राजनीतिक हित (Political Interest) को साधने के लिए?

  • Last Updated: December 16, 2019, 12:54 PM IST
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नई दिल्‍ली. नागरिक संशोधन कानून (CAA) को लेकर भले ही राजनीतिक गहमागहमी तेज हो लेकिन बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार इस सबसे बेफिक्र हैं. वह इन दिनों जल, जीवन और हरियाली यात्रा पर प्रदेश के दौरे पर हैं. सीएम नीतीश दूसरे चरण की यात्रा समाप्त कर किसानों के बीच गहरी पैठ बनाने की कोशिश में जुटे हैं. वैसे जेडीयू की मानें तो नीतीश कुमार अपनी यात्रा के जरिए समाजिक चेतना जगाना चाहते हैं, जिससे जल संचयन, पौधा रोपण से लेकर खेतीबारी के तौर-तरीकों में बदलाव का गहरा संदेश है. लेकिन, विपक्ष इसे समाजिक खर्चे पर राजनीतिक करार देने से तनिक भी परहेज नहीं कर रहा है.

जल, जीवन और हरियाली यात्रा में बिहार सरकार अगले तीन साल में तकरीबन 24 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का ऐलान कर चुकी है. सरकार का दावा है कि राज्य में अगले कुछ वर्षों में हरियाली 15 फीसदी से बढ़कर 17 फीसदी जगहों पर किए जाने का लक्ष्य है. सीएम नीतीश खुद अपने कार्यक्रमों में इस बात पर पुरजोर बल दे रहे हैं कि उनकी सरकार के कार्यकाल में हरियाली 9 फीसदी से बढ़कर 15 फीसदी हुआ है, जिसे सरकार 17 फीसदी करने का लक्ष्य लेकर चल रही है.

सामाजिक चेतना या राजनीतिक उद्देश्य?
दरअसल, सीएम नीतीश कुमार बिहार विधानसभा चुनाव से महज 10 महीने पहले जल, जीवन और हरियाली यात्रा पर निकले हैं. इसको लेकर विपक्ष पूरी तरह से राजनीतिक यात्रा करार देकर सरकार पर हमलावर है. विपक्ष का दावा है कि नीतीश कुमार की लोकप्रियता मुजफ्फरपुर में तकरीबन 150 बच्चों की मौत (दिमागी बुखार) के बाद से लगातार गिरती जा रही है. इतना ही नहीं गर्मी में लू से सैकड़ों मौत और पटना में बाढ़ के कारण कई दिनों तक रहे जल-जमाव और बाढ़ से मची अफरातफरी के कारण सीएम नीतीश के पांव उखड़ चुके हैं. विपक्ष का कहना है कि इसलिए मुख्‍यमंत्री चुनाव से ठीक पहले अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का अंतिम प्रयास कर रहे हैं जो अब पूरा होने वाला नहीं है.

'विधानसभा चुनाव में दिखेगा असर'
आरजेडी (RJD) के भाई वीरेन्दर ने 'न्यूज 18' से बात करते हुए आगे कहा कि प्रशासक की भूमिका में पूरी तरह फेल हो चुके नीतीश कुमार समाज सुधारक होने का ढोंग रच रहे हैं, जिसे जनता पूरी तरह से समझ चुकी है. भाई वीरेन्द्र ने कहा कि समाज का हर वर्ग अब नीतीश कुमार द्वारा चलाए गए शराब बंदी अभियान से लेकर बाल विवाह और दहेज बिरोधी अभियान की असलियत जान चुका है. हाल में हुए उपचुनाव में जेडीयू को ट्रेलर दिख गया है और बचा-खुचा विधानसभा चुनाव में दिख जाएगा.

RJD Leader Tejaswi Yadav
राजद नेता तेजस्‍वी यादव नीतियों को लेकर नीतीश पर हमलावर रहे हैं. (फाइल फोटो)
'जनता का पैसा हो रहा खर्च'
हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ( HAM) के प्रवक्ता दानिश रिजवान सीएम नीतीश की यात्रा को पूरी तरह से चुनावी यात्रा करार देते हुए कहते हैं कि सरकारी पैसे से एक बार फिर कुर्सी पर बने रहने के लिए यह असफल प्रयास है और इसका खामियाजा जनता को ही भुगतना पड़ेगा. दानिश कहते है कि नीतीश कुमार पूरे प्रशासनिक अमले के साथ प्रदेश की यात्रा पर निकल चुके हैं जो पूरी तरह से राजनीतिक है, लेकिन पैसा भोली-भाली जनता का खर्च हो रहा है. दानिश कहते हैं कि राजनीतिक महत्तवकांक्षा इस कदर हावी है कि इस यात्रा में नीतीश कुमार अपने साथ न तो कृषि मंत्री को साथ लेकर चल रहे हैं और न ही फॉरेस्ट मिनिस्टर को, क्योंकि दोनों उनके सहयोगी दल बीजेपी के हैं जिनके साथ वो सरकार चला रहे हैं.

जनता की नब्‍ज टटोलने में निपुण हैं सीएम नीतीश
दरअसलख, यात्रा के जरिये लोगों का नब्ज टटोलने और उसे अपने पक्ष में करने में नीतीश कुमार निपुण हैं. साल 2005 से लेकर अभी तक यात्राओं का लंबा दौर चलाकर पिछले 14 साल से लगातार वह सत्ता पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं.. ऐसे में यह माना जा रहा है कि चुनाव से 10 महीने पहले एक नई यात्रा की शुरूआत कर नीतीश कुमार सामाजिक चेतना के साथ-साथ अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने का भी प्रयास कर रहे हैं और इस कड़ी में इस बार नीतीश कुमार का पूरा ध्यान बिहार के किसानों पर है.

HAM Chief Jitan Ram Manjhi
जीतनराम मांझी कई मौकों पर नीतीश सरकार की आलोचना करते रहे हैं. (फाइल फोटो)


सामाजिक चेतना लाने की जरूरत क्यों?
एक आंकड़े के मुताबिक, बिहार के GDP में कृषि की भागीदारी 20 फीसदी है, वहीं 90 फीसदी लोग इससे जुड़े हैं. इस साल खरीफ सीजन में बारिश तकरीबन 50 फीसदी तक कम रहा है और 15 जिलों में सूखे का कहर रहा है. इससे तकरीबन 5 लाख हेक्टेयर जमीन पर खेती नहीं हो सकी है.

जेडीयू (JDU) के एक कार्यकर्ता के मुताबिक, प्रखंड में नीतीश कुमार किसानों के साथ संवाद पर जोर दे रहे हैं और कार्यकर्ताओं से ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाने के लिए कहा जा रहा है.
ज़ाहिर है नीतीश कुमार सीधा किसान से संवाद स्थापित कर उन्हें बदलते समय में खेती करने की विधा सिखाने का प्रयास कर रहे हैं. वहीं, लोग इसे आने वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं.

क्‍या कहते हैं जानकार?
राजनीतिक विश्लेषक डॉ संजय के मुताबिक सीएम नीतीश कुमार सामाजिक चेतना और जागरुकता का काम करते रहे हैं, जिसमें शराबबंदी से लेकर दहेज प्रथा और बाल विवाह के खिलाफ मुहिम भी शामिल है. सामाजिक चेतना का काम रिस्क से भरा होता है, जिससे राजनीतिज्ञ अमूमन दूर रहना पसंद करते हैं, लेकिन नीतीश कुमार इस चुनौती को अक्सर स्वीकार करते रहे हैं और इससे उन्हें राजनीतिक लाभ भी मिला है. जैसे कि शराब बंदी और साइकिल और पोशाक योजना से महिलाओं में उनकी लोकप्रियता काफी रही है. ऐसे में जल, जमीन और हरियाली जैसी यात्रा का प्रभाव जन मानस पर तो पड़ेगा, क्योंकि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया मैसेज लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन यह देखना दिलचस्‍प होगा कि किसानों का कितना वोट उन्‍हें मिलता है.

 

 

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First published: December 16, 2019, 12:53 PM IST
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