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Bihar Politics: बिहार में बीजेपी-जेडीयू के संबंधों को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

Bihar Politics: बिहार में बीजेपी-जेडीयू के संबंधों को लेकर क्यों उठ रहे सवाल?

जदयू और भाजपा के बीच बढ़ी तल्खी में राजद अपने लिए सत्ता में आने की संभावना तलाश रही है.

जदयू और भाजपा के बीच बढ़ी तल्खी में राजद अपने लिए सत्ता में आने की संभावना तलाश रही है.

JDU BJP Tussle in Bihar Politics: सियासत में संकेतों का बहुत बड़ा महत्व है. हाल के दिनों में बिहार की राजनीति में कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिससे प्रदेश में एनडीए गठबंधन में दरार व टूट की आशंका खबरें लगातार चर्चा में हैं. बीते दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़ी कुछ खबरों ने भी ऐसी चर्चाओं को और भी हवा दी है. राजनीति के जानकार बताते हैं कि ऐसे 7 संकेत स्पष्ट हैं जिससे लगता है कि बिहार में जदयू-भाजपा की जोड़ी टूट भी सकती है.

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पटना. क्या बिहार की सियासत में कुछ बड़ा होने वाला है? सूबे की सियासत के लिए आज का दिन बेहद ही महत्वपूर्ण है. एक ओर जदयू सांसदों की बैठक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवस पर होने वाली है तो भारतीय जनता पार्टी के कई दिग्गज नेता दिल्ली में हैं. सोमवार की शाम में बिहार भाजपा के नेताओं की भी बैठक पटना में हुई. इससे पहले राजद, कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर नीतीश कुमार एनडीए से अलग होते हैं तो वह उनका समर्थन करने के लिए तैयार है. इस बीच जदयू सांसदों की बैठक के साथ ही आज ही राजद और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने भी अपने-अपने विधायक दल की बैठक आयोजित की है. दरअसल,  सियासत में संकेतों का बड़ा महत्व होता है; ऐसे में बिहार के ताजा राजनीतिक हालात असमंजस में फंसी हुई दिखाई दे रहे हैं.

हालांकि, बड़ा तथ्य यह भी है कि हाल के घटनाक्रम ये संकेत दे रहे हैं कि जदयू और भाजपा के बीच तल्खी बढ़ी है. खास तौर पर बीते एक महीने में सीएम नीतीश कुमार के एक्शन यह इशारा कर रहे हैं कि नीतीश कुमार ने भाजपा से दूरी बना ली है. लेकिन, सभी के कारण अलग-अलग गिनाए गए; मगर यह साफ होता गया है कि सीएम नीतीश की भाजपा नेताओं से दूरी बढ़ गई है.बीते एक महीने के कुछ संकेतों को सियासत के जानकार इस तरह से बयां कर रहे हैं.

दरअसल, बीते 17 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में तिरंगे को लेकर देश के सभी मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई थी, लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस बैठक में शामिल नहीं हुए. इसके बाद 22 जुलाई को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के विदाई भोज में भी नीतीश कुमार को आमंत्रित किया गया था, मगर वे उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए.

लगातार बढ़ती दूरी के संकेतों के बीच बीते 25 जुलाई को सबसे बड़ा संकेत तब मिला जब नवनिर्वाचित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शपथ ग्रहण समारोह में भी नीतीश कुमार को आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे नहीं गए. खास बात यह भी कि सीएम नीतीश की पार्टी जदयू ने द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में मतदान किया था. इसके बाद और भी बड़े संकेत तब सामने आए जब गत 7 अगस्त को नीतीश कुमार प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग की बैठक में शामिल नहीं हुए. कारण; कोरोना के बाद की कमजोरी बताई गई, मगर उसी दिन पटना में सीएम नीतीश दो बड़े आयोजन में शामिल हुए.

सियासत के जानकारों की नजर में ये संकेत चंद महीने पहले जातीय जनगणना के मुद्दे पर तेजस्वी यादव की नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद से मिलने लगे थे. इसके बाद नीतीश-तेजस्वी का एक दूसरे की इफ्तार पार्टी में जाना और फिर विभिन्न मुद्दों पर तेजस्वी नीतीश की मुलाकात का लगातार सिलसिला. हालांकि, इसकी जड़ में वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा का नंबर वन और नीतीश कुमार की जदयू का तीसरे नंबर की पार्टी बन जाना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है. दरअसल, जदयू का मानना है कि नीतीश कुमार का सियासी कद घटने के पीछे भाजपा है जिसने चिराग पासवान को जदयू के खिलाफ खड़ा कर दिया.

इस बात का जिक्र रविवार को जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने भी अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कि था. इसमें आरसीपी सिंह के बहाने भाजपा पर निशाना साधा और यह कहा कि चिराग मॉडल का दूसरा रूप आरसीपी सिंह थे. दरअसल, बीते चुनाव में चिराग पासवान ने जिस तरह से जदयू के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े किए, और चुनाव परिणामों के बाद जैसे कभी बिहार की नंबर वन पार्टी जदयू नंबर तीन पर आ गई, इससे जदयू के नेता सकते में आ गए. इसकी समीक्षा की गई जिसमें जदयू नेताओं का साफ मानना रहा कि अगर भाजपा चाहती तो चिराग पासवान को जदयू के खिलाफ उम्मीदवार खड़े करने से रोक सकती थी.

राजनीति के जानकार यह भी बताते हैं कि हाल में जब द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने के बाद एनडीए की बैठक में चिराग पासवान का आना भी नीतीश कुमार को यह बात अंदर तक आहत कर गयी. ऐसा इसलिए कि जिस चिराग पासवान को जदयू ने अपने नुकसान का जिम्मेदार माना, उसे भाजपा ने साथ क्यों लिया? यही बात ललन सिंह की बातों से भी स्पष्ट हुआ जब उन्होंने कहा कि जदयू के खिलाफ साजिश रची गई और नीतीश कुमार का कद कम करने का फुल प्लान तैयार किया गया था. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा भी कि समय आने पर षडयंत्रों का खुलासा करेंगे.

Tags: Bihar NDA, Bihar News, Bihar politics, PATNA NEWS

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