बिहार में दलितों के दम पर बनेगी अगली सरकार? सभी दलों में 'दलित सियासत' करने की होड़
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बिहार में दलितों के दम पर बनेगी अगली सरकार? सभी दलों में 'दलित सियासत' करने की होड़
आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जीतन राम मांझी और RJD दोनों दलितों को अपने-अपने पाले में करने की कवायद में जुट गए हैं

आरजेडी ने बैठक से पहले अपने तमाम दलित विधायकों को इससे अलग कर लिया और दलितों की लड़ाई आरजेडी के बैनर के नीचे लड़ाई लड़ने की बात कह दलित मुहिम को झटका दे दिया

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पटना. नीतीश सरकार (Nitish Government) में मंत्री और जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) के दलित नेता श्याम रजक ने बिहार (Bihar) में दलित सियासत को मजबूत धार देने की कवायद शुरू की थी, जब यह परवान चढ़ने लगा तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने उस अभियान को झटका देने की कोशिश की. लेकिन अब राज्य की तमाम पार्टियों के दलित विधायकों ने बगैर आरजेडी (RJD) के दलित विधायकों के एकजुट होकर आगे की लड़ाई लड़ने का एलान भी कर दिया.

श्याम रजक (Shyam Rajak) ने सबसे पहले एससी/एसटी के लिए निजी क्षेत्रों (प्राइवेट सेक्टर) में आरक्षण, प्रमोशन में आरक्षण, न्यायालयों में आरक्षण जैसा मुद्दा उठाया था. धीरे-धीरे इस मुहिम में बिहार के तमाम दलों के दलित आदिवासी विधायक एकजुट होते चले गए, कई बैठकें हुईं लेकिन जैसे ही जीतनराम मांझी के आवास पर इससे जुड़ी बैठक हुई, आरजेडी ने बैठक से पहले अपने तमाम दलित विधायकों को इससे अलग कर लिया और दलितों की लड़ाई आरजेडी के बैनर के नीचे लड़ाई लड़ने की बात कह दलित मुहिम को झटका दे दिया.

दरअसल सूत्रों की मानें तो आरजेडी दो बात से परेशान है. पहला- जीतनराम मांझी ने तेजस्वी यादव के खिलाफ मोर्चा खोल लिया है, और उनके आवास पर हुए बैठक में आरजेडी के दलित विधायकों को ना भेजकर मांझी को झटका दे दिया. दूसरी बात आरजेडी नहीं चाहती थी कि दलितों के आवाज को उठाने में जिस तरह से जेडीयू के कद्दावर नेता श्याम रजक भूमिका निभा रहे थे उससे कहीं उसके दलित सियासत पर असर ना पड़ जाए, क्योंकि एससी/एसटी आरक्षण बचाओ संघर्ष मोर्चा का गठन कर अगली बैठक राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली में करने की थी जिसमें देश के तमाम दलित विधायकों और सांसदों को बुलाने की तैयारी थी.



'RJD हमेशा से इस लड़ाई को लड़ता है और आगे भी वो ही इसे लड़ेगा'



आरजेडी विधायक शिवचंद्र राम कहते हैं, जो दो बैठकों में शमिल हो चुके थे, जिस पार्टी ने आरक्षण के खिलाफ काम किया वो पार्टी और उसके समर्थक पार्टी क्या आरक्षण की लड़ाई लड़ेंगे. आरजेडी हमेशा से इस लड़ाई को लड़ता है और आगे भी वो ही इसे लड़ेगा. वही इस मुहिम को आगे बढ़ाने वाले जेडीयू नेता श्याम रजक कहते हैं, लड़ाई तो ठन चुकी है. जो लोग लड़ाई में साथ हैं उनका स्वागत है और जो लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश करेंगे, दलित समुदाय उन्हें माफ नही करेगा. क्योंकि यह लड़ाई किसी पार्टी के तरफ से नहीं लड़ा जा रहा है.

हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष जीतनराम मांझी भी आरजेडी के रूख से नाराज हैं. वो कहते हैं कि आरजेडी के सभी माननीय SC/ST विधायकों का अलग हो जाना मोर्चे को कमजोर करने का प्रयास के रूप में देखा जा सकता है. मांझी ने आरोप लगाया की कुछ लोगों के आपसी मतभेदों के कारण अब यह लड़ाई कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है, लेकिन लड़ाई जारी रहेगी.

आरजेडी की सहयोगी होने के बावजूद कांग्रेस भी उसके इस कदम से हैरान है. कांग्रेस के विधायक अशोक राम कहते हैं, दलितों के मांग की लड़ाई किसी राजनीतिक पार्टी के बैनर के तले नहीं लड़ा जा रहा है, इसके बावजूद बैठक से आरजेडी के दलित विधायकों का न आना थोड़ा हैरान तो करता ही है. लेकिन बिहार विधानमंडल अनुसूचित जाति/जनजाति आरक्षण बचाव संघर्ष मोर्चा ने आरक्षण के मुद्दे पर अगली बैठक 12 जून को रोसड़ा से कांग्रेस के विधायक डॉ. अशोक राम के आवास पर कर आरजेडी पर प्रेशर बढ़ा दी है. अशोक राम को उम्मीद है कि आरजेडी के विधायक उनके आवास पर होने वाले बैठक में ज़रूर शमिल होंगे.
First published: June 5, 2020, 11:12 PM IST
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