Bihar Politics: बंगाल में था चुनाव पर छाया रहा बिहार, जानें 5 ऐसी बात जिसने डाला असर

तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी, प्रशांत किशोर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

तेजस्वी यादव, ममता बनर्जी, प्रशांत किशोर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

West Bengal Election: प्रशांत किशोर का ममता बनर्जी के साथ रहना या तेजस्वी यादव का ममता को समर्थन, यूपी-बिहार के लोगों को गुंडा कहे जाने का मुद्दा हो या फिर किशनगंज के इंस्‍पेक्‍टर की दिनाजपुर में मॉब लिंचिंग का मामला, पश्चिम बंगाल चुनाव में बिहार छाया रहा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 29, 2021, 12:09 PM IST
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पटना. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बिहार किसी न किसी तरह से हमेशा सुर्खियों में रहा है. बंगाल चुनाव में बिहार की चर्चा की शुरुआत वर्ष 2019 के नवंबर महीने में हो गई थी, जब पहली बार यह पता लगा कि चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर तृणमूल कांग्रेस पार्टी के इलेक्शन कैम्पेन का जिम्मा संभालने जा रहे हैं. यह बात खास तौर पर इसलिए चर्चा में रही, क्योंकि पीके जेडीयू से निष्कासन के तुरंत बाद ममता के खेमे में गए थे.

इससे यह बात चर्चा में रही कि पीके विपक्षी खेमे के लिए ममता बनर्जी को एक बड़े चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करना चाहते हैं. खास तौर पर केंद्र सरकार पर हमला बोला. पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह उनके निशाने पर रहे. जाहिर है पीके के ममता के साथ होने के साथ ही बिहार किसी न किसी तरह बंगाल इलेक्शन की चर्चा में आ ही गया.

ममता ने यूपी-बिहार के गुंडे पर की राजनीति

ममता बनर्जी और एनडीए के खेमे की ओर से पूरे चुनाव कैम्पेन को देखें तो बिहार हमेशा चर्चा में रहा. सबसे पहले ममता बनर्जी ने बंगाली बनाम बाहरी का नैरेटिव सेट करने की कवायद शुरू की ताकि वोटों के गणित में वह पिछड़ न जाएं. पूरे चुनाव के दौरान ममता बनर्जी लगातार अपने बयानों में यूपी-बिहार से आए लोगों को गुंडा बताकर निशाना साधती रहीं. दरअसल, ममता चाहती थीं कि बांग्ला अस्मिता के नाम पर लेफ्ट और कांग्रेस के हिस्से के कुछ वोट टीेमसी को मिल जाए तो उनका काम बन जाएगा और वह तीसरी बार सत्ता में आ जाएंगी.
पीएम मोदी ने भी किया यूपी-बिहार का जिक्र

ममता बनर्जी की इस रणनीति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान कई बार अपने अंदाज में कुंद करने की कोशिश की. उन्होंने अपने भाषणों में कई बार बिहार का जिक्र किया. उन्‍होंने बंगाल में रहने वाले बिहार-यूपी के लोगों को गुंडा कहे जाने पर आपत्ति जताई और बंगाली बनाम बाहरी की राजनीति पर प्रहार किया. यही वजह रही कि एनडीए खेमे को यह बात बार-बार दोहरानी पड़ी कि बंगाल का सीएम कोई बंगाली ही बनेगा न कि यूपी या बिहार से आने वाला कोई बाहरी. जाहिर है कि बंगाली बनाम बाहरी के इस मुद्दे में भी बिहार लगातार छाया रहा.

तेजस्वी यादव का ममता बनर्जी को समर्थन और बिहार की राजनीति



राष्ट्रीय जनता दल ने बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी का समर्थन किया, पर यूपी और बिहार के लोगों को लगातार गुंडा कहे जाने और RJD नेता की खामोशी को लेकर बिहार की सियासत गरमाती रही. दरअसल, तेजस्वी यादव खुद विभिन्न राज्यों में परप्रांतियों के साथ भेदभाव के विरोधी रहे हैं. वर्ष 2016 में महाराष्ट्र में गैर मराठियों के ऑटो रिक्शा जला देने की बात का तेजस्वी यादव ने खूब विरोध किया था, लेकिन ममता बनर्जी पर उनकी खामोशी पर भाजपा ने करारा प्रहार किया. भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व राज्यसभा सांसद आरके सिन्हा ने कहा कि ममता बनर्जी के पूर्वज भी उतने ही बिहारी थे, जितने कि हमारे पूर्वज. ममता बनर्जी ने बिहार का ही नहीं बंगाल का और अपने पूर्वजों का भी अपमान किया. उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी द्वारा लगातार बिहार का अपमान किया जा रहा है, सभी बिहारियों को गुंडा कहा जा रहा है, लेकिन लालू प्रसाद यादव के सुपुत्र तेजस्वी यादव की चुप्पी बिहारी जनमानस को गहरी चोट पहुंचा रहा है.

सुर्खियों में रहा शाहनवाज हुसैन पर पत्थर फेंकने का ममला

पश्‍च‍िम बंगाल के चुनाव में एनडीए की ओर से बिहार के गिरिराज सिंह जैसे नेताओं को जहां प्रचार में जगह नहीं मिली, वहीं बिहार के कई अन्य नेताओं ने चुनाव कैम्पेन में हिस्सा लिया. सबसे अधिक बिहार सरकार के उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन की मांग रही और वह सुर्खियों में भी रहे. दरअसल, शाहनवाज ने बंगाल में खूब रैलियां और सभाएं कीं तो कई बार बंगाल के स्‍थानीय प्रशासन ने कई जगह जाने से उन्‍हें रोका भी. कहा गया कि उनके जाने से विधि-व्‍यवस्‍था प्रभावित होगी. जाहिर है यह भी मुद्दा बना. शाहनवाज हुसैन ने कहा कि एक सभा में उन पर पत्‍थर फेंकने की कोशिश भी हुई. उन्होंने एक तरह से बंगाल से कश्‍मीर के हालात को बेहतर बताया और कहा कि वहां उनकी चुनावी सभा से कोई समस्‍या नहीं हुई.

बिहार के इंस्पेक्टर की बंगाल में हत्या पर राजनीति

किशनगंज के थानेदार इंस्‍पेक्‍टर अश्‍व‍िनी कुमार की पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर में भीड़ के हाथों हत्‍या के मामले ने खूब सुर्खियां बटोरीं. यह बात पूरे तौर पर चर्चा में रही कि बंगाल में कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति है. इस मामले में शामिल आरोपियों के विशेष धर्म से होने का मुद्दा भी उठाया गया और यह बात भी खूब चर्चा में रही कि बंगाल में मस्जिद से ऐलान कर जुटाई गई भीड़ ने की थी, इंस्‍पेक्‍टर की हत्‍या की थी. जाहिर है इसी बहाने ध्रुवीकरण की कोशिश भी हुई. प्रधानमंत्री ने किशनगंज के इंस्‍पेक्‍टर की हत्‍या का मसला भी चुनाव के दौरान उठाया. प्रधानमंत्री ने भी इस घटना की चर्चा करते हुए प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रहार किए और कहा कि किस तरह बंगाल में एक जांबाज और ईमानदार पुलिस अधिकारी को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई.
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