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लालू के बुरे दिनों में भी नहीं छोड़ा था पार्टी का साथ, अब तेजस्वी को लगने लगे हैं बोझ!

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: September 16, 2019, 7:40 PM IST
लालू के बुरे दिनों में भी नहीं छोड़ा था पार्टी का साथ, अब तेजस्वी को लगने लगे हैं बोझ!
तेजस्वी ने मन बना लिया है कि पार्टी के पुराने चेहरों के बजाए अब नए और युवा चेहरों पर दांव आजमाया जाए!

क्या तेजस्वी यादव (TEJASHWI YADAV) ने मन बना लिया है कि पार्टी के पुराने चेहरों (OLD FACES) के बजाए अब नए और युवा चेहरों (NEW AND YOUNG FACES) पर दांव आजमाया जाए? क्या लालू प्रसाद यादव (LALOO PRASAD YADAV) समय के जितने भी पुराने चेहरे थे अब लालू के सक्रिय राजनीति में नहीं होने से हाशिए पर चले जाएंगे?

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  • Last Updated: September 16, 2019, 7:40 PM IST
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राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और बिहार (BIHAR) के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (TEJASHWI YADAV) लोकसभा चुनाव (LOKSABHA ELECTION 2019) में पार्टी की हार को भुलाते हुए एक बार फिर से बिहार की राजनीति में सक्रिय हो गए हैं. तेजस्वी लगातार कह रहे हैं कि अब युवाओं को आगे आना चाहिए. तेजस्वी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए कहते हैं, ‘लोकसभा चुनाव में हम हारे नहीं, हराए गए हैं.’ पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, 'तेजस्वी जब से अज्ञातवास से लौटे हैं उनको लगने लगा है कि पार्टी के ही कुछ नेताओं की वजह से हार झेलनी पड़ रही है.'

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या तेजस्वी ने मन बना लिया है कि पार्टी के पुराने चेहरों (OLD FACES) के बजाए अब नए और युवा चेहरों (NEW AND YOUNG FACES) पर दांव आजमाया जाए? क्या लालू प्रसाद यादव (LALOO PRASAD YADAV) समय के जितने भी पुराने चेहरे हैं अब लालू के सक्रिय राजनीति में नहीं होने से हाशिए पर चले जाएंगे? रघुवंश प्रसाद सिंह (RAGHUVANSH PRASAD SINGH), रामचंद्र पूर्वे (RAM CHANDRA PURVEY), जगदानंद सिंह (JAGDANAND SINGH) और कांति सिंह (KANTI SINGH) जैसे सीनियर नेताओं का भविष्य क्या होगा?

बिहार की राजनीतिक समीकरण में फिर बदलाव?

आरजेडी के मौजूदा दौर के ज्यादातर बड़े नेता, जिन्होंने लालू यादव के साथ कई दशकों तक राजनीति साथ की है, उनका मानना है कि 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार को महागठबंधन के पाले में लाना जरूरी है. इन नेताओं को लगता है कि नीतीश कुमार को अपने पाले में लाने का यह सबसे सही वक्त है, क्योंकि बीजेपी और जेडीयू नेताओं में लगातार वाकयुद्ध छिड़ा हुआ है. दोनों पार्टियों के नेताओं में खटास इस स्तर तक बढ़ गई है कि आरजेडी अगर अपने रुख में थोड़ी नरमी बरतेगी तो राज्य की राजनीतिक समीकरण बदल जाएगा. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या पार्टी के इन सीनियर्स नेताओं की बात से तेजस्वी यादव इत्तेफाक रखते हैं?

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार को महागठबंधन के पाले में लाने की कवायद
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार को महागठबंधन के पाले में लाने की कवायद (फाइल फोटो)


नीतीश को महागठबंधन के पाले में लाने की कवायद 

आरजेडी के कुछ सीनियर्स नेताओं की राय है कि अगर बीजेपी को बिहार में हराना है तो बिना नीतीश कुमार को साथ लिए यह मुमकिन नहीं है. आरजेडी के कुछ वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार को साथ लाने को लेकर लगातार बयान भी दे रहे हैं. आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह हों या फिर अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे नेता खुल कर नीतीश कुमार के साथ गठबंधन की वकालत कर रहे हैं.
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हालांकि, इस बात की उम्मीद फिलहाल दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रही है कि तेजस्वी यादव ऐसा करने जा रहे हैं या फिर नीतीश कुमार ही ऐसा करेंगे! पार्टी के एक युवा नेता न्य़ूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'तेजस्वी अब हवा-हवाई बात नहीं करेंगे. तेजस्वी राजनीतिक तौर पर अब पहले की तुलना में काफी परिपक्व हो गए हैं. फिलहाल तो वह जनता से जुड़े मुद्दों को ही प्रमुखता से उठाएंगे और उठा भी रहे हैं. नीतीश कुमार की तर्ज पर तेजस्वी भी अब बिहार के हर जिले का दौरा करेंगे.'

आरजेडी और जेडीयू में गठबंधन को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही है
आरजेडी और जेडीयू में गठबंधन को लेकर तरह-तरह की बातें सामने आ रही है (फाइल फोटो)


तेजस्वी वरिष्ठ नेताओं का सलाह मान रहे हैं?

दूसरी तरफ राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि तेजस्वी यादव अज्ञातवास से लौटने के बाद पार्टी के कुछ सीनियर्स नेताओं से किनारा कर रखा है. रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं की सलाह भी तेजस्वी नहीं मान रहे हैं. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'हमारे जैसे कई और सीनियर्स नेताओं की राय है कि एक बार फिर से जेडीयू के साथ गठबंधन बना कर चुनाव लड़ा जाए. हम लोगों ने अपनी राय लालू प्रसाद यादव जी के साथ भी साझा किया था. हालांकि, वह अस्वस्थ हैं तो उन्होंने कहा कि जो आप लोगों को अच्छा लगे वह कीजिए. लेकिन, तेजस्वी हम लोगों के सुझाव को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं. हम लोगों ने कई बार उनको कहलवाया है कि सियासत में इस तरह की बेपरवाही पार्टी को आने वाले चुनाव में भारी पड़ सकता है. इसके बावजूद हमारी सलाह नहीं सुन रहे हैं.'

महागठबंधन में शामिल होने का निर्णय तो लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ही करेंगे.
महागठबंधन में शामिल होने का निर्णय तो लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ही करेंगे.


बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहते हैं, 'रघुवंश प्रसाद सिंह व्यवहारिक नेता हैं. उनको यह दिखाई दे रहा है कि नीतीश कुमार के साथ आने से ही हम बीजेपी से मुकाबला कर सकते हैं. इसलिए वह इस तरह का बयान दे रहे हैं. दूसरी बात, आरजेडी और जेडीयू के साथ आने का फैसला तेजस्वी कैसे करेंगे? इसका फैसला तो लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार ही करेंगे. हालांकि इसकी उम्मीद हमें दूर-दूर तक कहीं दिखाई नहीं दे रही है.'

किशोर आगे कहते हैं, 'तेजस्वी यादव सार्वजनिक तौर पर नीतीश कुमार के साथ जाने का एलान कैसे कर सकते हैं? इससे उनकी कमजोरी भी तो झलक जाएगी. रही बाद पार्टी के अंदर सीनियर्स लीडर्स की पूछ की तो यह अनिश्चितता अगले विधानसभा चुनाव तक रहेगी. तीसरी बात, जहां तक मुझे पता है लालू प्रसाद यादव ने तेजस्वी यादव को हिदायत दे रखा है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं से सलाह-मशविरा ले कर ही कुछ निर्णय लें. अब तेजस्वी यादव कितना सलाह ले रहे हैं इसकी जानकारी मुझे नहीं है.'

पार्टी में सीनियर्स नेताओं की पूछ कम हो गई है?
पार्टी में सीनियर्स नेताओं की पूछ कम हो गई है?


बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, 'लालू प्रसाद यादव ने जिस उम्मीद के साथ तेजस्वी को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था, उस पर वह अभी तक खरे नहीं उतर पाए हैं. तेजस्वी कुछ चापलूस नेताओं के चंगूल में फंस कर रह गए हैं. ये उस तरह के नेता हैं, जिनका जमीनी स्तर पर कोई ठोस आधार नहीं है और वह जमीनी नेताओं का भविष्य तय कर रहे हैं. पार्टी के अंदर ही इस बात को लेकर रोष है. पार्टी के कई सीनियर्स नेता तेजस्वी के व्यवहार से आहत हैं. कांति सिंह और रघुवंश प्रसाद सिंह हो या फिर अब्दुल बारी सिद्दिकी या फिर जगदानंद सिंह. इन नेताओं ने पार्टी के बुरे दिनों में भी पार्टी से किनारा नहीं किया था.अगर ये नेता चाहते तो दूसरे दल में भी जा सकते थे.'

पांडेय आगे कहते हैं, 'लालू यादव के जेल जाने के बाद तेजस्वी यादव जिस तरह से फैसले ले रहे हैं उससे लगता है कि वह हारने के लिए ही राजनीति कर रहे हैं. लालू यादव ने अपनी किताब ‘गोपालगंज टू रायसीना मेरी राजनीतिक यात्रा’ में लिखा है कि 'अपने राजनीतिक जीवन में मैंने कई गलती की. पार्टी नेताओं की सलाह को कभी गंभीरता से नहीं लिया. इसी का नतीजा आज भुगत रहे हैं.' शायद तेजस्वी यादव भी इस समय वही कर रहे हैं, जिसका पछतावा उनको बाद में आएगा.'

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First published: September 16, 2019, 7:35 PM IST
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