Article 370: भूपेंद्र यादव को याद आई महाभारत तो मनोज झा बोले- फिलीस्तीन बनने का रास्ता खोला

राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने अनुच्‍छेद 370 को लेकर लाए गए प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया. अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हमने कश्मीर के फिलीस्तीन बनने का रास्ता खोल दिया है.

News18 Bihar
Updated: August 6, 2019, 9:06 AM IST
Article 370: भूपेंद्र यादव को याद आई महाभारत तो मनोज झा बोले- फिलीस्तीन बनने का रास्ता खोला
राज्य सभा में बीजेपी के भूपेंद्र यादव और आरजेडी के मनोज झा ने बहस में भाग लिया
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Updated: August 6, 2019, 9:06 AM IST
सोमवार को राज्यसभा में अनुच्‍छेद 370 को समाप्त करने वाले विधेयक के समर्थन में 125 और विरोध में 61 मत पड़े. इस इससे पहले हुई बहस में बिहार के कई नेताओं ने शिरकत की. इनमें RJD के मनोज झा, JDU के रामनाथ ठाकुर और BJP के भूपेंद्र यादव ने अपने-अपने अंदाज में अपनी बातें रखीं. बिहार BJP के प्रभारी और राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव ने महाभारत के एक प्रकरण की याद दिलाते हुए कहा कि यह ऐसा मौका है जब पार्टियों को आपसी राजनीति भूलकर एक साथ खड़ा होना चाहिए.

भूपेंद्र यादव ने महाभारत का जिक्र किया
भूपेंद्र यादव ने कहा कि महाभारत काल में जब पांडव वनवास झेल रहे थे तो दुर्योधन काफी खुश था. वह यह देखने गया कि इन मुश्किल हालात में पांडव जंगल में कैसे रह रहे हैं. लेकिन, वहां के लोगों ने उसे बंधक बना लिया. युधिष्ठिर को जब यह बात पता चली तो दु्र्योधन की मदद के लिए गए और कहा कि भले ही वे कौरव और पांडव अलग-अलग हैं, लेकिन यहां वे 105 हैं.

जेडीयू ने किया वाकआउट

राज्यसभा में चर्चा के दौरान JDU के सदस्य रामनाथ ठाकुर ने कहा कि उनकी पार्टी समान नागरिक संहिता और अनुच्‍छेद 370 के मुद्दे को अदालत के फैसले या सभी पक्षों के बीच सहमति से हुए समझौते से निकाले जाने के पक्ष में है. उन्होंने कहा कि इससे इतर किसी अन्य तरीके का विरोध करते हुये उनका दल इस संकल्प और विधेयक का विरोध करते हुए सदन से वाकआउट करते हैं. इसके बाद जदयू के सदस्य सदन से बाहर चले गए.

मनोज झा बोले- फिलीस्तीन का रास्ता खोला
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया. अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हमने कश्मीर के फिलीस्तीन बनने का रास्ता खोल दिया है. मनोज झा ने सदन में जय प्रकाश नारायण की चिट्ठी का जिक्र भी किया जो उन्होंने कश्मीर के संबंध में इंदिरा गांधी और जवाहर लाल नेहरू को लिखे थे. उन्होंने कहा कि सरकार का फैसला संवैधानिक इतिहास की हत्या है. उन्होंने कहा, 'सिर्फ हाथ छोड़कर विनती करता हूं कि अंहकार छोड़िए और कश्मीरियों को गले लगाइए. पांच साल बाद कहा जाएगा कि सदन में कुछ लोग थे जिन्होंने अपनी सरकार को आगाह किया था.
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First published: August 6, 2019, 7:38 AM IST
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