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मोहन भागवत के 'जवाबदेह हिंदू' को BJP ने 'ब्रह्मवाक्य' कहा, JDU बोली- हम नोटिस नहीं लेते

संघ प्रमुख मोहन भागवत पांच दिवसीय दौरे पर झारखंड पहुंचे हैं.

संघ प्रमुख मोहन भागवत पांच दिवसीय दौरे पर झारखंड पहुंचे हैं.

मोहन भागवत के बयान पर जेडीयू एमएलसी ने कहा कि मोहन भागवत न तो सदन के सदस्य हैं और न ही बीजेपी के कोई पदाधिकारी हैं कि हम उनका नोटिस लें. देश संविधान से चलता है, कौन क्या बोलता है इसे देश की जनता नोटिस नहीं लेती है.

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    पटना. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत (RSS chief Mohan Bhagwat) ने कहा कि भारत को बनाने में हिन्‍दुओं की जवाबदेही सबसे ज्‍यादा है. हिंदू अपने राष्‍ट्र के प्रति और जिम्‍मेवार बनें. भारत को विश्‍वगुरु बनाना सबका ध्‍येय होना चाहिए. भागवत ने कहा कि राष्ट्रवाद जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. क्योंकि इसका मतलब नाज़ी या हिटलर से निकाला जा सकता है, ऐसे में राष्ट्र या राष्ट्रीय जैसे शब्दों को ही प्रमुखता से इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि दुनिया के सामने इस वक्त ISIS, कट्टरपंथ और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दे बड़ी चुनौती हैं. संघ प्रमुख के इस बयान जहां बीजेपी ने पुरजोर समर्थन किया है, वहीं एनडीए में शामिल जेडीयू ने किनारा कर लिया है.

    जेडीयू बोली- देश संविधान से चलता है
    मोहन भागवत के बयान पर जेडीयू एमएलसी ने गुलाम रसूल बलियावी ने कहा कि मोहन भागवत न तो सदन के सदस्य हैं और न ही बीजेपी के कोई पदाधिकारी हैं कि हम उनका नोटिस लें. देश संविधान से चलता है, कौन क्या बोलता है इसे देश की जनता नोटिस नहीं लेती है.

    उन्होंने कहा, ये देश राम-रहीम का है. हम बापू , अशफाकउल्ला और अंबेडकर की बात करते हैं. जिन्हें जो बोलना है बोलते रहें. वहीं बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि समाज एक ऐतिहासिक समुदाय है जो सभ्यता और संस्कृति का वाहक रहा है. उस परिवर्तन का सारथी हिंदू समाज ही रहा है.

    बीजेपी ने कहा- ये काम समाजशात्रियों को करना चाहिए था
    मोहन भागवत ने कहा है देश की जटिलताओं को दूर करने के लिए हिंदू समाज को पहल करनी होगी. जब हिंदू समाज संगठित होगा तो स्वभाविक रूप से उसका प्रभाव उन धार्मिक समुदायों पर होगा जो राष्ट्र कि मुख्यधारा से अलग होकर धार्मिक संबंध में सोचते हैं और कार्य करते हैं.

    उन्होंने कहा कि मोहन भागवत ने आज वो काम किया है जो भारत के समाजशास्त्री को करना चाहिए था. भारतीय समाज में नेशनलिज़्म की अवधारणा थी ही नहीं हमलोग सभ्यताया समाज की अवधारणा में जीते थे जिसमें संस्कृति, सभ्यता, सामाजिक जीवन का महत्व था.

    राकेश सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रवाद की अवधारणा प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद यूरोप के द्वारा दुनिया पर आरोपित किया गया है. जिसमें संघर्ष और कटुता और आधिपत्य का भाव आता है राष्ट्रीयता है भारत कि अवधारणा जो राष्ट्र के चरित्र का द्योतक होता है.

    हमारे लिए भागवत का बयान ब्रह्मवाक्य- बीजेपी नेता
    वहीं बीजेपी के नेता व बिहार सरकार में मंत्री विनोद झा ने कहा कि मोहन भागवत का बयान हमारे लिए ब्रह्मवाक्य के समान है. बीजेपी के लिए मोहन भागवत आदरणीय हैं, फिर उनके बयान पर जो कोई प्रतिक्रिया दें, उससे हमें कोई मतलब नहीं. हमारे लिए तो यह बयान ब्रह्म वाक्य है.

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