Bihar Assembly Election 2020:‌ BJP के लिए रिकॉर्ड तो RJD की साख का सवाल होगी बांकीपुर सीट

दो बार बांकीपुर सीट पर कब्जा कर चुकी बीजेपी इस बार हैट्रिक बनाने के लिए जोर लगाएगी. (सांकेतिक फोटो)
दो बार बांकीपुर सीट पर कब्जा कर चुकी बीजेपी इस बार हैट्रिक बनाने के लिए जोर लगाएगी. (सांकेतिक फोटो)

बांकीपुर सीट पर दो बार हुए विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) में BJP ने अपना परचम लहराया है, इस सीट पर कांग्रेस को करारी हार झेलनी पड़ी है और आरजेडी ने तो कभी औसत प्रदर्शन भी नहीं किया. ऐसे में आरजेडी के लिए इस बार ये सीट साख का सवाल हो सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 27, 2020, 12:16 AM IST
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पटना. दीघा की तरह ही बांकीपुर विधानसभा सीट भी नई है. खास बात ये है कि यहां पर दो बार विधानसभा चुनाव हुए हैं और दोनों ही बार BJP ने अपना परचम लहराया है. ये भी शहरी मतदाताओं की सीट है और खासकर युवा, ऐसे में बीजेपी इसका पूरा फायदा उठाती है. JDU के साथ गठबंधन में भी ये सीट बीजेपी के ही खाते में आती है. पिछले चुनावों में भी ऐसा ही देखने को मिला और राजद व कांग्रेस को इस सीट पर हार से ही संतोष करना पड़ा. अब अगर जदयू के साथ सीट बंटवारा होता है तो बांकीपुर फिर एक बार बीजेपी को ही मिलने की संभावना है. ऐसे में राजद के लिए इस सीट पर कब्जा साख का सवाल भी हो सकता है.

जातिगत गणित भी महत्वपूर्ण
बांकीपुर सीट पर वैश्य और कायस्‍थ समाज का दबदबा है. वर्तमान में विधायक नितिन नवीन भी कायस्‍थ हैं. ऐसे में उन्होंने इस बात का फायदा बखूबी उठाया और भ‌विष्य में भी वे उठाएंगे. अब बीजेपी वैश्य समाज को साधने में जुटी है. साथ ही युवाओं में अपनी छवि को एक बार फिर उठाने की पूरी कोशिश में है. वोटरों की तरफ देखा जाए तो इस सीट पर करीब 1.70 लाख पुरुष और 1.40 लाख महिला वोटर मौजूद हैं.

आरजेडी का मुकाबला ही नहीं था
2015 के चुनावों की बात की जाए तो बीजेपी ने कांग्रेस को बड़ी हार का स्वाद चखाया था. यहां पर नितिन नवीन ने कांग्रेस के कुमार आशीष को करीब 40 हजार वोटों के अंतर से मात दी थी. ऐसे में आरजेडी तो मुकाबले में कहीं दिखी ही नहीं. यही एक कारण है कि इस बार ये सीट आरजेडी के लिए साख का सवाल भी हो सकती है. वहीं कांग्रेस भी इस पर कब्जा जमाने के लिए पूरजोर कोशिश में लगेगी.



सोशल मीडिया और युवा छवि
इस सीट पर वर्तमान विधायक नितिन नवीन की साफ सुथरी छवि है. साथ ही वे सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और युवा वोटरों को सीधे टार्गेट करते हैं. वहीं उनकी साफ छवि और लोगों के साथ संवाद यूएसपी के तौर पर काम करेगी. वहीं कायस्‍थ समाज का एक बड़ा तबका उनके साथ है. बात रही वैश्य वोटरों की तो उन्हें भी साधने में वे लगे हैं और शहरी वोटर होने के चलते उन्हें इस काम में खासी परेशानी नहीं होगी.
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