Bihar Election: पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडेय पर बक्सर में भारी पड़े पूर्व हवलदार, पढ़ें पूरी कहानी

बक्सर से बीजेपी के प्रत्याशी परशुराम चतुर्वेदी के साथ पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (फाइल फोटो)
बक्सर से बीजेपी के प्रत्याशी परशुराम चतुर्वेदी के साथ पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (फाइल फोटो)

Bihar Election 2020: बिहार की बक्सर सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है और मुन्ना तिवारी यहां के विधायक हैं. इस बार उनका मुकाबला बीजेपी के परशुराम चतुर्वेदी से होगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2020, 3:42 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा के चुनाव में इस बार जिन 243 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें बक्सर (Buxar Assembly Seat) को हॉट सीट माना जा रहा है. बीजेपी के गढ़ रहे इस सीट का फिलहाल कांग्रेस (Congress) के विधायक मुन्ना तिवारी नेतृत्व कर रहे हैं. लेकिन, पिछले कई दिनों से यह सीट सुर्खियों में है और इसका सबसे बड़ा कारण बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय (DGP Gupteshwar Pandey) का इस सीट से कनेक्शन है. बिहार की इस सीट पर उम्मीदवारी की रेस में पूर्व डीजीपी और नौकरी छोड़कर जदयू का दामन थामने वाले गुप्तेश्वर पांडे पिछड़ गए. वह भी अपने ही विभाग के एक पूर्व सिपाही से.

जी हां! बक्सर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार चुने गए परशुराम चतुर्वेदी की बड़ी रोचक कहानी है. उन्‍होंने सभी अफवाहों पर विराम लगाते हुए बक्सर सीट से बीजेपी का टिकट हासिल करने में सफल रहे हैं. परशुराम चतुर्वेदी के बारे में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक वह भी बिहार पुलिस से वीआरएस ले चुके हैं. बात सन 1994 की है जब परशुराम चतुर्वेदी बिहार पुलिस में हवलदार के तौर पर मुजफ्फरपुर में कार्यरत थे.





बक्सर के वरिष्ठ पत्रकार शशांक शेखर ने न्यूज 18 बताया कि परशुराम चतुर्वेदी शुरू से ही नेता बनना चाहते थे और उनको पुलिस विभाग की नौकरी रास नहीं आ रही थी. जब उनका जुड़ाव बीजेपी से हुआ तो उन्होंने अपनी इस सरकारी नौकरी का त्याग कर दिया और सक्रिय राजनीति में आ गए. वो बिहार पुलिस में हवलदार रैंक पर कार्यरत थे और 26 साल पहले उन्होंने नौकरी छोड़ दी. शशांक के मुताबिक वो बक्सर में बीजेपी के बड़े और पुराने नेताओं में से एक हैं जिनको पार्टी ने टिकट उनके करियर, समर्पण और काम को देखते हुए दिया है. मूल रूप से बक्सर से सटे महदह के रहने वाले परशुराम बक्सर से बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और 19 साल पहले यानी सन 1991 से पार्टी में सक्रिय कार्यकर्ता के तौर पर लगातार जुड़े हुए हैं. परशुराम चतुर्वेदी की पहचान स्वंयसेवी के तौर पर होती है और इसकी बानगी लोगों ने कोरोना के दौरान भी देखी है.
परशुराम चतुर्वेदी


परशुराम चतुर्वेदी 1977 में छात्र नेता रहे, जबकि बीजेपी की स्थापना काल से ही वह पार्टी में शामिल हो गए. इस दौरान उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता और राजनीति में रुचि के कारण दो सरकारी नौकरियों का त्याग कर दिया. परशुराम चतुर्वेदी पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों में प्रांतीय नेता रह चुके हैं. साथ ही कई जिलों के चुनाव का भी काम देख चुके हैं. उन्होंने बक्सर सीट से गुरुवार को अपना नामांकन दाखिल किया. सोशल मीडिया पर भी उनकी खासी सक्रियता रहती है.

दरअसल, इस सीट से जिन चेहरों को लेकर सबसे अधिक कयास लग रहे थे, उनमें पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय सबसे ऊपर थे. जेडीयू के इस नेता को वीआरएस लेकर राजनीति में आने के बाद भी इस बार बक्सर ही नहीं, बल्कि अभी तक बिहार की किसी भी विधानसभा सीट से पार्टी का प्रत्याशी नहीं घोषित किया गया है.
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