बिहार: तो क्या एक बार फिर होने जा रही है सियासी उथल-पुथल? ये रहे 8 संकेत

बिहार के राजनीतिक गलियारों में तो ये चर्चा भी जोरों पर है कि आरजेडी के कुछ विधायक टूटेंगे और जेडीयू तथा कांग्रेस मिलकर प्रदेश की राजनीति को नया आकार देने जा रही है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: July 22, 2019, 11:35 AM IST
बिहार: तो क्या एक बार फिर होने जा रही है सियासी उथल-पुथल? ये रहे 8 संकेत
रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और आरजेडी नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी की अकेले में मुलाकात हुई (फाइल फोटो)
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: July 22, 2019, 11:35 AM IST
क्या बिहार में सत्ताधारी दल बीजेपी और जेडीयू के बीच रिश्तों में काफी तल्खी आ गई है? क्या जल्दी ही बिहार में कोई नई सियासी हलचल दिख सकती है? दरअसल इन सवालों के उभरने के पीछे रविवार को हुआ दो वाकया है. पहला महासचिव और पूर्व सांसद नेता पवन वर्मा का बयान और दूसरा मुख्यमंत्री नतीश कुमार की आरजेडी के एक बड़े नेता से अकेले में हुई मुलाकात.

हालांकि JDU, RJD और BJP, तीनों ही पार्टियां प्रदेश में किसी तरह के राजनीतिक उलटफेर का संकेत मानने से इनकार कर रही हैं. बहरहाल सवाल यह है कि क्या अंदरखाने वाकई कोई हलचल है? दरअसल बीते दिनों कई ऐसे प्रकरण हुए हैं जिससे लगता है कि बीजेपी-जेडीयू के बीच रिश्तों में तल्खी जरूर आई है. ऐसे में इन मुलाकातों के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. बहरहाल इसके पीछे क्या कारण हैं, आइये इसपर एक नजर डालते हैं.

JDU नेता ने दी BJP को खुली चुनौती
बता दें कि जेडीयू नेता ने पवन वर्मा ने बीजेपी को 2020 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने की चुनौती दे डाली है. रविवार को एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, हमलोग देख रहे हैं कि बीजेपी के कुछ नेता नीतीश सरकार से समर्थन वापसी की धमकी दे रहे हैं. उन्हें अकेले होकर एक चुनाव लड़ लेना चाहिए. चुनावी परिणाम समझ आ जाएगा.

नीतीश-सिद्दीकी मुलाकात से कयासों ने पकड़ा जोर
वहीं, रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने दरभंगा दौरे के दौरान RJD नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से उनके आवास पर आधे घंटे अकेले मुलाकात की. इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि ये बिहार की राजनीति में सियासी हलचल के संकेत हैं. बिहार के राजनीतिक गलियारों में तो ये चर्चा भी जोरों पर है कि आरजेडी के कुछ विधायक टूटेंगे और जेडीयू तथा कांग्रेस मिलकर प्रदेश की राजनीति को नया आकार देने जा रही है.

यहां से बढ़ने लगी BJP-JDU में दूरी
Loading...

माना जाता है कि दोनों दलों के बीच रिश्तों में कड़वाहट मोदी-2 मंत्रि परिषद में शामिल नहीं होने के जेडीयू के फैसले के बाद शुरू हुई है. जेडीयू ने सांकेतिक भागीदारी से इनकार करते हुए मंत्री पद ठुकरा दिया था. इसके बाद बिहार में मंत्रि परिषद के विस्तार में बीजेपी को शामिल नहीं किया था.

मोदी सरकार -2 में शामिल नहीं होने का फैसला लेकर सीएम नीतीश कुमार ने बीते नाराजगी के संकेत दे दिए थे.


RSS 'जासूसी' मामले ने बढ़ा दी और तल्खी!
बिहार में आरएसएस सहित 19 हिंदूवादी संगठनों और उनके सदस्यों से संबंधित सूचनाएं एकत्रित करने के लिए 28 मई को जारी बिहार विशेष शाखा की चिट्ठी पर सियासी घमासान मचा हुआ है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सीएम नीतीश के आदेश से जारी किया गया था, क्योंकि गृह विभाग उनके जिम्मे है. बताया जा रहा है कि नीतीश सरकार की सफाई देने के बावजूद आरएसएस और बीजेपी दोनों ही इस प्रकरण को लेकर बेहद नाराज है.

प्रशांत किशोर को नीतीश की परमिशन
जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार ने बीजेपी विरोधी मानी जाने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए काम करने की इजाजत दे दी थी. बताया जा रहा है कि इससे भी भाजपा नेतृत्व बेहद नाराज है. दरअसल बीजेपी बंगाल में पूरा जोर लगा रही है ऐसे में पीके की रणनीति से उसे परेशानी हो सकती है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर को ममता बनर्जी के लिए काम करने की परमिशन देकर बीजेपी नेताओं को पशोपेस में डाल दिया है.


मंगल पांडे से इस्तीफा मांगने का प्रकरण
इसके बाद चमकी बुखार से 180 से अधिक मौतों के लिए जेडीयू-बीजेपी में भी एक दूसरे पर भौहें सिकोड़ी गईं. चर्चा तो यह भी थी की सीएम नीतीश कुमार ने इस मामले में हुई फजीहत के कारण बीजेपी नेता और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से इस्तीफा भी मांगा था. हालांकि इस बात पर दोनों ही दलों ने पर्दा डाल दिया था.

विवादित मुद्दों पर जेडीयू का विरोध
जिस तरह से जेडीयू ने तीन तलाक प्रकरण में संसद में एनडीए सरकार के बिल का विरोध किया है, यह बताता है कि दोनों एक दूसरे की राजनीति के परस्पर विरोधी भी हैं. NRC, 35A और धारा 370 के मुद्दे पर बीजेपी का समर्थन नहीं भी दोनों के बीच दूरी का बड़ा सबब है. यही नहीं अब तक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का सामने नहीं आना भी बड़ा उदाहरण है.

बीजेपी-जेडीयू नेताओं का आमना-सामना
हाल के दिनों में जिस तरह से जेडीयू और बीजेपी के नेताओं ने एक-दूसरे के नेताओं पर जुबानी हमले किए हैं, ये भी दोनों ही पार्टियों के बीच चल रही अंदरूनी खींचतान की तस्दीक करती है. बीजेपी की ओर से जहां केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और एमएलसी सच्चिदानंद राय जैसे नेताओं ने मोर्चा संभाल रखा है, वहीं जेडीयू की ओर से पवन वर्मा और संजय सिंह जैसे नेताओं ने.

हालांकि राजनीतिक जानकारों की मानें तो बिहार में जेडीयू-बीजेपी की सरकार बनी रहे, इसके लिए भी प्रयास जारी हैं. बीजेपी ने जहां जेडीयू और सीएम नीतीश कुमार के विरुद्ध बोलने वाले एमएलसी सच्चिदानंद राय को कारण बताओ नोटिस जारी किया है वहीं जेडीयू ने भी अपने नेताओं को नियंत्रित बयान जारी करने के निर्देश जारी किए हैं.

ये भी पढ़ें- बिहार: राजकीय सम्मान के साथ होगा रामचंद्र पासवान का अंतिम संस्कार


दरभंगा में बाढ़ पीड़ितों से मिले नीतीश कुमार, RJD नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से भी की मुलाकात

First published: July 22, 2019, 9:55 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...