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महाराष्ट्र में टूटा 'राजनीति का भ्रम'! क्या बिहार पॉलिटिक्स पर भी पड़ेगा असर?

News18 Bihar
Updated: November 28, 2019, 2:05 PM IST
महाराष्ट्र में टूटा 'राजनीति का भ्रम'! क्या बिहार पॉलिटिक्स पर भी पड़ेगा असर?
महाराष्ट्र की राजनीति का हो सकता है दूरगामी असर, बिहार चुनाव के बाद बदल सकता है समीकरण (फाइल फोटो)

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि चुनाव से पहले बीजेपी-जेडीयू में किसी तरह की जिच होने जा रही है, लेकिन वास्तविकता यह भी है कि चुनाव बाद की राजनीति उलट भी सकती है.

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पटना. बीजेपी का साथ छोड़ महाराष्ट्र (Maharashtra) में शिव सेना (Shiv sena) के नेतृत्व में एनसीपी और कांग्रेस की मिलीजुली सरकार बनने का रास्ता जैसे ही साफ हुआ वैसे ही राजनीति के कई भ्रम भी टूट गए. पहला तो ये कि चुनाव पूर्व गठबंधन (Alliance) के भी अब शायद कोई मायने न हो. इसी तरह विचारधारा और आदर्शवाद (Ideology and Idealism) जैसी बातें भी अब काफी पीछे छूटती लग रही हैं. हालांकि ऐसा नहीं है कि ये पहली बार महाराष्ट्र में ही हुआ है. ऐसा ही मामला इससे पहले कर्नाटक (Karnataka) में सामने आया था जब एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ी जेडीएस और कांग्रेस (JDS and Congress) ने परिणाम आने के बाद मिलकर सरकार बना ली थी.

इसी तरह बिहार में भी वर्ष 2015 में सीएम नीतीश कुमार की जेडीयू और लालू प्रसाद यादव की जेडीयू ने साथ चुनाव लड़ा, जीते और सरकार भी बनाई. लेकिन,  वर्ष 2017 में सीएम नीतीश कुमार ने पाला बदल लिया और भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर सरकार बना ली. एक बार फिर बिहार सुर्खियों में है क्योंकि यहां अगले साल अक्टूबर-नवंबर के महीने में विधान सभा का चुनाव होना है.

दरअसल कहा जा रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति का असर बिहार पर भी दिख सकता है क्योंकि महाराष्ट्र  के राजनीतिक घटनाक्रम ने फिर एक बार कई भ्रम तोड़ दिए हैं. हालांकि राजनीतिक जानकार बताते हैं कि चुनाव तक तो बीजेपी और जेडीयू साथ चुनाव लड़ेगी, लेकिन परिणाम के बाद की राजनीति क्या होगी, इसको लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं.

जानकार बताते हैं कि महाराष्ट्र में जब शिव सेना-कांग्रेस एक साथ आ सकती हैं तो बिहार विधान सभा चुनाव के बाद नये राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं. (नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी की फाइल फोटो)


वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेल्लारी कहते हैं, मुझे कि फिलहाल ऐसा नहीं लगता कि चुनाव से पहले बीजेपी-जेडीयू में किसी तरह की जिच होने जा रही है, लेकिन वास्तविकता यह भी है कि चुनाव बाद की राजनीति उलट भी सकती है.

बकौल कन्हैया भेल्लारी चुनाव में अगर जेडीयू थोड़ी कमजोर पड़ती है और बीजेपी अगर मजबूत होगी तो आने वाले समय में आरजेडी वही दांव खेल सकती है जो वर्ष 2017 में जेडीयू ने उसके साथ खेला था. यानि बीजेपी की महत्वाकांक्षा बढ़ती है और वह अपने मुख्यमंत्री की मांग करने लगी तो जेडीयू के लिए मुश्किल स्थिति हो सकती है.

कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि हो सकता है कि आने वाले समय में बीजेपी बिहार में सरकार बना ले और आरजेडी बीजेपी को बाहर से सपोर्ट कर दे. यह इसलिए भी है कि एक बार फिर जेडीयू और आरजेडी के एक साथ आने की संभावना नगण्य है.
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वहीं, वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कुमार कहते हैं कि जिस तरह से महाराष्ट्र में शिव सेना और झारखंड में आजसू ने बीजेपी का साथ छोड़ा है, ऐसी स्थिति में बीजेपी नीतीश कुमार का साथ खोना नहीं चाहेगी. हालांकि यह भी सत्य है कि फिलहाल एनडीए में शामिल दलों का बीजेपी से विश्वास घटा है.

बकौल प्रेम कुमार यह इसलिए भी है कि जेडीयू पर जब बीजेपी ने भरोसा किया तो नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए ने बिहार की 40 में से 39 सीटें जीत लीं. लेकिन, बीजेपी ने जेडीयू को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया जिस पर नीतीश कुमार अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं.

प्रेम कुमार कहते हैं  कि इसी तरह पटना में जल जमाव और मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार के मसले पर बीजेपी के नेता और मंत्री घिरे, उसमें नीतीश कुमार ने भी भाजपा का उस हद तक साथ नहीं निभाया, जितना पिछले वक्त में वे प्रोटेक्ट करते हैं. जाहिर है यह सब बीजेपी के प्रति जेडीयू का अविश्वास ही है.

एनडीए में शामिल रहे उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी के साथ बीजेपी के व्यवहार का जिक्र करते हुए प्रेम कुमार कहते हैं कि बीजेपी अपने सहयोगियों का फायदा तो उठा रही है, लेकिन उसे लाभ देने से भाग जा रही है. ऐसे भी कई विवादित मुद्दों को लेकर भी जेडीयू और बीजेपी के बीच नाजुक रिश्ता रहा है.  इसलिए बीजेपी-जेडीयू के बीच भी रिश्ता बहुत भरोसे वाला नहीं दिख रहा है.

बिहार में वर्ष 2017 में जेडीयू ने आरजेडी का दामन छोड़ बीजेपी के साथ सरकार बना ली थी. (फाइल फोटो)


प्रेम कुमार कहते हैं कि विधान सभा चुनाव के दौरान एक बार फिर समीकरण की तलाश होगी और बीजेपी-जेडीयू के बीच फिफ्टी फिफ्टी के फॉर्मूले पर पेंच फंस सकता है. जहां जेडीयू यह सुनिश्चित करना चाहेगी कि वही बड़ा भाई बनकर रहे, इसी तरह बीजेपी भी जेडीयू से अधिक नहीं तो कम सीट पर सहमत होगी ऐसा नहीं लगता.

बकौल प्रेम कुमार अगर दोनों ही दल साथ मिलकर लड़ी और कहीं बीजेपी का परफॉर्मेंस बेहतर हुआ, और जिस तरह से जेडीयू-बीजेपी के संबंधों में अविश्वास का साया है, ऐसे में आने वाले समय में कुछ भी हो सकता है. ऐसे भी आज की राजनीति में वैचारिक-सैद्धांतिक मर्यादा खत्म हो गई है, तो कहीं कांग्रेस-शिव सेना की तरह हम आरजेडी के सपोर्ट से बीजेपी की सरकार भी देख सकते हैं.

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First published: November 28, 2019, 2:04 PM IST
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