बिहार इलेक्शन रिजल्ट: वोट में बदली वोटर्स की 'सिम्पैथी' और भभुआ में खिल गया जीत का कमल

बीजेपी की उम्मदीवार रिंकी रानी पांडेय ने कांग्रेस के प्रत्याशी शंभू पटेल को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. बीजेपी इस सीट को लेकर पहले से ही आश्वस्त थे.

Amrendra Kumar | News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 5:06 PM IST
बिहार इलेक्शन रिजल्ट: वोट में बदली वोटर्स की 'सिम्पैथी' और भभुआ में खिल गया जीत का कमल
भभुआ से एनडीए की प्रत्याशी रिंकी रानी पांडेय
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | News18Hindi
Updated: March 14, 2018, 5:06 PM IST
बिहार उपचुनाव में दो सीटों के नतीजे आ गये हैं. शुरूआती रूझानों में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर रही लेकिन बाजी 2-1 से महागठबंधन ने जीती. बिहार की भभुआ सीट को जीत बीजेपी ने अपनी साख बचाई. यहां पर लड़ाई काफी दिलचस्प रही. इस सीट पर फैसला अंतिम राउंड तक चला लेकिन शुरूआत से ही बीजेपी की रिंकी पांडेय ने कांग्रेस के शंभू पटेल से ली गई बढ़त को जीत में बदला. भाजपा की रिंकी को 64413 मत जबकि कांग्रेस के शंभू पटेल को 49547 मत मिले. रिंकी ने शंभू को 14866 मतों से हराया.

मतगणना के पहले राउंड से रिंकी ने जो लीड बनाई उसे उन्होंने अंत तक कायम रखा और 15 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की. बीजेपी की रिंकी रानी पांडेय और कांग्रेस के शंभू पटेल के बीच कड़ा मुकबला था लेकिन जातिगत समीकरणों के साथ-साथ जिस फैक्टर ने भभुआ में काम किया वो रहा सहानुभूति.

रिंकी रानी पांडेय को उनके पति और भभुआ के पूर्व विधायक आनंद भूषण पांडेय के निधन के बाद इस सीट से बीजेपी ने अपना टिकट दिया लिहाजा उनके साथ सहानुभूति एक बड़ा फैक्टर था और वो इस फैक्टर को वोट में बदलने में सफल भी रहीं. चुनाव प्रचार के दौरान भी रिंकी अपने बच्चे को गोद में लिये वोट मांगते देखी गई थीं लिहाजा उन्हें वोट के साथ-साथ वोटर्स की सहानुभूति भी मिलने के आसार थे.

उनसे पहले उनके पति की भी इलाके में काफी अच्छी छवि थी और वो चुनाव हारने के बाद विधानसभा जाने में सफल हुए थे. दूसरी तरफ शंभू पटेल को मुस्लिम, यादव, कुर्मियों का साथ मिला और सभी तबके के वोटर उनके साथ गोलबंद होते दिखे लेकिन वो अपनी पार्टी के अंदर चल रहे विवाद को दूर नहीं कर पाये.

भभुआ में महादलित वोटरों की तादाद भी अच्छी खासी है. इस विधानसभा से इस बार बसपा के चुनावी मैदान में नहीं होने के कारण ये वोट शंभू पटेल के पक्ष में जाने की संभावना थी लेकिन ऐन वक्त पर रिंकी रानी पांडेय को लोगों की सिम्पैथी के साथ वोट भी मिला और वो चुनाव जीतने में सफल रहीं.

स्थानीय पत्रकार प्रसुन्न मिश्रा के अनुसार, इस सीट पर सबसे बड़ा फैक्टर कुशवाहा वोटर्स  थे. इस सीट पर लगभग मुस्लिम 16 हजार, यादव -11 हजार, पासवान- 13 हजार, महादलित (राम) 33 हजार के साथ ब्रहामण-33 हजार, कुर्मी-17 हजार, राजपूत- 7 हजार, बनिया- 13 हजार, बिंद- 28 हजार, कुशवाहा 15 हजार हैं.

इसके अलावा बिंद वोट 10 हजार के करीब है. अति पिछड़ा समुदाय के 20 हजार के करीब वोटर्स हैं. ये भी माना जा रहा था कि सवर्ण वोटरों का प्रतिशत सामान्यत कम रहता है. बिहार में एनडीए के नेता भी भभुआ सीट पर रिंकी रानी की जीत को लेकर आश्वस्त थे.
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