Bihar Election 2020: भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष का तेजस्‍वी पर हमला, औरंगजेब से तुलना करते हुए पूछा- लालू से दूरी क्‍यों?

 तेजस्वी यादव को देखकर औरंगजेब की याद आती है: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल
तेजस्वी यादव को देखकर औरंगजेब की याद आती है: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) की तारीखों का बेशक अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन सभी राजनीतिक दल इसकी तैयारी में जुट गए हैं. जबकि सत्‍ता और विपक्ष के बीच जमकार बयानबाजी हो रही है.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 20, 2020, 11:09 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Elections) की तारीख का ऐलान जल्‍दी होने वाला है और इस समय सभी पार्टियां एक दूसरे को घेरने में लगी हुई हैं. वहीं, राजद के नए पोस्टर को लेकर विवाद थमता नहीं दिख रहा है. पोस्टर पर अपनी अकेली तस्वीर को लेकर तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) विरोधियों के निशाने पर हैं. चुनाव से पहले बिना लालू प्रसाद यादव के राजद के इस पोस्टर के कई मायने निकाले जा रहे हैं. इसे कोई इसे तेजस्वी का अहंकार बता रहा है, तो कोई इसे लालू की छवि से दूर जाने की तेजस्वी की कोशिश. इस बीच, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल (BJP State President Sanjay Jaiswal) ने इसे लेकर तेजस्वी पर बड़ा हमला बोल दिया है.

तेजस्वी की तुलना औरंगजेब से
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा है कि तेजस्वी यादव को देखकर औरंगजेब की याद आती है. स्वर्गीय रघुवंश बाबू के साथ उन्होंने जो किया, वो तो सबको याद ही होगा, लेकिन अपने पिता और आरजेडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद के साथ वह क्या करना चाहते हैं, यह थोड़ा शोध का विषय है. आप कहीं भी देख लीजिए, तेजस्वी के अलावा किसी का चेहरा आरजेडी के पोस्टर पर नहीं लगता और लालू प्रसाद पूरी तरह से गायब हैं. आखिर, तेजस्वी का एजेंडा क्या है, वे उस चेहरे से क्यों भाग रहे हैं, जो उनके पिता भी होते हैं.

विरासत पर शर्मिंदा हैं तेजस्वी
संजय जायसवाल ने कहा कि क्या तेजस्वी अपनी विरासत पर शर्मिंदा हैं. अगर उन्हें लगता है कि उनके पिता और माता के शासनकाल में जो कांग्रेस के साथ मिलकर कुशासन और अराजकता का निर्माण किया गया, वह शर्मिंदगी की वजह है तो उन्हें पूरे राज्य की जनता से माफी मांगनी चाहिए, न कि छद्म आवरण में राजनीति करनी चाहिए. तेजस्वी का खुद अपने परिवार से घमासान चल रहा है, यह जानी हुई बात है. तेजप्रताप और मीसा का उनसे छ्त्तीस का आंकड़ा चल रहा है. तेजस्वी अपनी पार्टी के एकछत्र नेता बन गए हैं, जिनको लोकतंत्र से चिढ़ है. वह उस औरंगजेब की तरह हो गए हैं, जिसको न तो किसी पर भरोसा है, न वह किसी की बात सुनता है और न ही वह अपने सामने किसी को बढ़ने देना चाहता है.



सत्ता के लिए लालू से पीछा छुड़ा रहे तेजस्वी
भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष ने कहा कि तेजस्वी की राजनीति से ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता के लिए अब वह लालू से पीछा छुड़ाना चाहते हैं. राजद के अन्य सूत्रधारों से उनकी प्रतिद्वंदिता तो पहले ही जगजाहिर थी, लेकिन अब अपने पिता के साथ उनका यह व्यवहार उनके अति आत्मविश्वास और आसमान छूते अहंकार का परिचायक है जो बड़े बड़ों को ले डूबता है.
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