अपना शहर चुनें

States

बिहार: नीतीश कुमार की रणनीति को अपने इस प्लान से दे जवाब दे रही BJP

नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

नीतीश कुमार की राजनीति के केंद्र में पिछड़ों की राजनीति ही रही है. हालांकि जिस तरह बीजेपी सबका साथ-सबका विकास की बात कहती है, ठीक वैसे ही नीतीश कुमार भी सर्वसमाज की बात करते हैं.

  • Share this:
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में मोदी सरकार ने बिहार से छह मंत्री बनाए जिसमें चार सवर्ण हैं. वहीं इसके दो दिन बाद ही बिहार सरकार ने नीतीश कुमार ने मंत्रिपरिषद का विस्तार कर आठ में से महज दो सवर्णों को मंत्री बनाया. दरअसल जेडीयू के केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल नहीं होने के बाद जिस तरह से सीएम नीतीश कुमार ने आबादी के लिहाज से हिस्सेदारी का सवाल उठाया, और फिर अपने मंत्रिपरिषद में आठ में छह सीटें  यानि 75 प्रतिशत सीटें पिछड़े, अति पिछड़े और दलित समाज के लोगों को देकर नई चाल चल दी.  जाहिर है जेडीयू ने अपनी नाराजगी को जमीन पर दिखाने की कोशिश की और इस दौरान बीजेपी और जेडीयू में शह और मात का खेल शुरू हो गया.

इसके बाद जब गिरिराज सिंह ने सीएम नीतीश कुमार के दावत-ए-इफ्तार पर सवाल उठाए तो इसे बीजेपी की रणनीति मानी गई. यानि नीतीश ने पिछड़ा कार्ड खेला तो बीजेपी ने गिरिराज सिंह के बयान के बहाने बिहार में फिर से हिंदुत्व का कार्ड खेलने की कोशिश की .

ये भी पढ़ें- NEET Result 2019: बेगूसराय का अपूर्व बना बिहार टॉपर



दरअसल यह ऐसा मुद्दा है जिसके बूते बीजेपी ने तमाम राजनीतिक सफलताएं हासिल की हैं. वहीं नीतीश कुमार की राजनीति के केंद्र में पिछड़ों की राजनीति ही रही है. हालांकि जिस तरह बीजेपी सबका साथ-सबका विकास की बात कहती है, ठीक वैसे ही नीतीश कुमार भी सर्वसमाज की बात करते हैं.
इस मसले पर राजनीतिक जानकारों की राय यही निकलकर आ रही है कि गिरिराज सिंह का बयान एक शिगूफा तो जरूर है, लेकिन बीजेपी अभी इस नीति पर आगे नहीं बढ़ रही है.

ये भी पढ़ें- RJD से क्यों दूरी बना रही हैं विपक्षी पार्टियां?

वरिष्ठ पत्रकार अरुण अशेष के अनुसार गठबंधनों के बीच कॉमन एजेंडा के साथ सभी पार्टियों के अपने-अपने एजेंडे भी हैं. ऐसे में बिहार एनडीए में भी तीन दल शामिल हैं और तीनों अपनी-अपनी रणनीति पर आगे बढ़ते हैं.

बकौल अरुण अशेष जेडीयू और बीजेपी के बीच एक तरह से सहमति भी है कि मंडल की राजनीति बीजेपी करेगी तो कमंडल की राजनीति नीतीश कुमार करेंगे. केंद्र और बिहार में हुए मंत्रिपरिषद का मामला भी यही दर्शाता है.

ये भी पढ़ें- बिहार: बेगूसराय छोड़ क्यों 'गायब' हो गए कन्हैया कुमार? वोटों के गणित में छिपा है जवाब

अरुण अशेष कहते हैं बीजेपी का आधार ही हिंदुत्व ही है. यह ऐसा मुद्दा है जो बिना कुछ किए ही बहुत बड़ा जनसमूह पार्टी से जुड़ जाता है और जातियों की सीमाएं टूट जाती हैं. इस एक मसले से बीजेपी 83 प्रतिशत वोटों में अपनी पहुंच बनाती है.

गिरिराज सिंह के ट्वीट पर अरुण अशेष कहते हैं कि इसपर बीजेपी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई. हालांकि  कहा गया कि अमित शाह ने उनको डांटा जरूर, लेकिन गिरिराज सिंह का वह ट्वीट अब भी उनके ट्विटर पर मौजूद है.

दावत-ए-इफ्तार पर गिरिराज सिंह के किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट


जाहिर है यह एक संकेत जरूर है कि गिरिराज सिंह को बीजेपी हाईकमान कहीं न कहीं इसके लिए सहमति जरूर मिली है. क्योंकि अक्सर ऐसा देखा जाता है कि हाईकमान के ऑब्जेक्शन होने पर बिना देरी किए ऐसे ट्वीट्स हटा दिए जाते हैं.

ये भी पढ़ें- बिहार: जनता की नब्ज टटोल रहे CM नीतीश कुमार!

वहीं वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि नीतीश कुमार के खिलाफ अभी बीजेपी फ्रंट पर नहीं आएगी क्योंकि उनके सामने देश-समाज के कई बड़े इश्यू हैं.

बकौल मणिकांत ठाकुर यह इसलिए भी है कि बीजेपी फिलहाल नीतीश कुमार के मसले को सीरियसली नहीं ले रही है. वह अभी 'वेट एंड वाच' की स्थिति में ही रहना चाहती है.

मणिकांत ठाकुर कहते हैं कि बीजेपी ये भी देखना चाहती है कि आने वाले कुछ समय में नीतीश कुमार किस तरह की रणनीति अपनाते हैं. यही वजह है कि अमित शाह ने  गिरिराज सिंह को काबू में रहने की नसीहत भी दी है.

मणिकांत ठाकुर यह भी कहते हैं कि नीतीश कुमार हमेशा से पिछड़ा कार्ड खेलते रहे हैं. पासवान को महादलित से अलग करने, महादलित में 22 जातियों को लेने और अब मंत्रिपरिषद का विस्तार भी इसी बात की तस्दीक करती है.

ये भी पढ़ें-

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज