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अंगदान: 19 साल के सौरव की आंखों से कोई देखेगा पटना तो कोलकाता में धड़केगा किसी का दिल

अंगदान: 19 साल के सौरव की आंखों से कोई देखेगा पटना तो कोलकाता में धड़केगा किसी का दिल

सौरव के हर्ट को ले जाते डॉक्टर

सौरव के हर्ट को ले जाते डॉक्टर

19 वर्षीय मरीज की मौत के बाद परिजनों ने एक साथ महत्वपूर्ण ऑर्गेन डोनेट करने की पहल की. इस पहल के बाद नेशनल ऑर्गन ट्रांसप्लांट संस्थान (नोटो) और क्षेत्रीय ऑर्गन ट्रांसप्लांट संस्थान (रोटो) से संपर्क किया गया था.

    बिहार के नालंदा का सौरभ प्रतीक 19 वर्ष की उम्र में ही दुनिया छोड़ गया लेकिन जाते-जाते वो कुछ ऐसा कर गया जिसकी मिसाल दुनिया देगी. एक हादसे में जान गंवाने वाला सौरभ भले जिंदा नहीं लेकिन उसके अंग 'जिंदा' रहेंगे. सौरभ के मरने के बाद उसके परिवार ने वो फैसला लिया जिसे शायद ही कोई लेता है. परिवार ने सौरभ के आर्गन डोनेट करने की पहली की जिसके बाद पूरी प्रकिया की गई.

    अब सौरभ की आंखों से कोई पटना देखेगा तो इस नौजवान का दिल कोलकाता में धड़केगा. उसके लिवर से दिल्ली में किसी को नई जिंदगी देने की तैयारी की गई है. पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (आईजीआइएमएस) में ब्रेन डेड सौरभ के शरीर से सोमवार को अंग लिए गए और संस्थान में विशेषज्ञों की मदद से पहली बार अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया हुई

    पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल ने इसको लेकर विशेष टीम का गठन किया जिसके बाद दिल्ली, कोलकाता और पटना की टीम ने ऑर्गेन डोनेट की प्रक्रिया पूरी की. दरअसल बिहार के नालंदा जिले के हिलसा गजेंद्र बिगहा निवासी सौरभ प्रतीक को शनिवार को दोपहर में भर्ती किया गया था. छत पर गिरने से सौरभ के सिर में रक्त जम गया था. निजी नर्सिंग होम द्वारा हाथ खड़े कर देने पर परिजन उसे अस्पताल लाए थे जिसके बाद रविवार की दोपहर एक बजे सौरभ को ब्रेन डेड घोषित किया गया.

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    19 वर्षीय मरीज की मौत के बाद परिजनों ने एक साथ महत्वपूर्ण ऑर्गेन डोनेट करने की पहल की. इस पहल के बाद नेशनल ऑर्गन ट्रांसप्लांट संस्थान (नोटो) और क्षेत्रीय ऑर्गन ट्रांसप्लांट संस्थान (रोटो) से संपर्क किया गया था. सौरभ के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद उसकी दोनों आंखें, लिवर और दिल को डॉक्टरों ने अंग प्रत्यारोपण के लिए निकाल लिया. इसके बाद आईजीआईएमएस ने विशेष सुरक्षा के साथ हार्ट को कोलकाता भेजा है वही लिवर को दिल्ली भेजने की प्रक्रिया जारी है.

    सौरव के किडनी को अस्पताल परिसर में ही में सुरक्षित रखा गया है. सौरभ के ब्रेन डेड होने के बाद उसकी मां सरिता सिन्हा बेटे के अंगदान के लिए आगे आईं. उसकी मां ने रोते हुए बताया कि मैं भी दूसरे से मिली किडनी पर जिंदा हूं ऐसे में मेरा बेटा भी दूसरे के शरीर में जिंदा रहकर किसी का सहारा बनेगा.

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