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बिहार:- कहने को सिर्फ उपचुनाव...लेकिन दोनों ओर से बहुत कुछ लगा है दांव पर...

Deepak Priyadarshi | News18 Bihar
Updated: October 20, 2019, 3:22 PM IST
बिहार:- कहने को सिर्फ उपचुनाव...लेकिन दोनों ओर से बहुत कुछ लगा है दांव पर...
बिहार में महागठबंधन के नेता

बीजेपी-जेडीयू की चुनौती यह है कि इस चुनाव में जीत का अंतर क्या रहेगा जबकि महागठबंधन में तो हालात यह है कि मानो सबकुछ ताश की पत्ते की तरह बिखर गया है..

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पटना. बिहार में कल यानि 21 अक्टूबर को फिर सभी की निगाहें मतदाताओं की ओर टिकी होंगी, जब एक लोकसभा (Loksabha) और पांच विधानसभा सीटों के मतदाता अपने नये प्रतिनिधियों को चुनेंगे. कहने को तो यह महज उपचुनाव (By Election) है, लेकिन इस उपचुनाव को परिणाम से बिहार की राजनीति और 2020 के विधानसभा चुनाव की रणनीति की दशा दिशा तय होगी. बीजेपी जेडीयू की प्रतिष्ठा इस मायने में दांव पर है कि लोकसभा चुनाव में जो बंपर जीत हुई थी, उस जीत की लय को बरकरार रखना होगा.

छह सीटों पर होना है चुनाव

निगाहें इस पर टिकी होगी कि कुल छह सीटों वाले इस चुनाव में जीत-हार का अंतर क्या होगा. चुनाव होने से पहले ही अमित शाह ने तस्वीर साफ कर दी कि बिहार में एनडीए का नेतृत्व नीतीश कुमार के ही हाथ में रहेगा. संभव है कि इसका लाभ भी बीजेपी-जेडीयू को मिलेगा, वहीं दूसरी ओर, ताश की पत्ते की तरह बिखर चुके महागठबंधन में सभी पार्टियों के बीच छत्तीस का रिश्ता है. सीटों को कोई तालमेल नहीं हुआ तो भागलपुर के नाथनगर सीट ने जीनराम मांझी की पार्टी हम ने और सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर से वीआईपी पार्टी ने अपने उम्मीदवार खड़े कर आरजेडी की मुश्किलें बढा दीं. इस उपचुनाव में सबसे अधिक तेजस्वी यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है कि महागठबंधन की ओर से नेता के रुप में नकार दिये गए तेजस्वी क्या अपने उपर लगे असफल नेता का दाग मिटा पाएंगे या नहीं. जानिए इस उपचुनाव में किस सीट पर क्या है समीकरण.

समस्तीपुर लोकसभा सीट

यह सीट एलजेपी की रही जिसपर रामविलास पासवान के भाई रामचन्द्र पासवान सांसद थे. लेकिन उनके अचानक निधन के बाद यह सीट खाली हो गई. इस उपचुनाव में एलजेपी ने उम्मीदवार को रुप में दिवंगत रामचन्द्र पासवान के बेटे प्रिंस पासवान को मैदान में उतारा है जबकि उनके मुकाबले में कांग्रेस के अशोक कुमार हैं. कुल 8 उम्मीदवार इस बार मैदान में हैं. 2014 में भी दिवंगत रामचन्द्र पासवान ही सांसद थे. उनके निधन के बाद सहानुभूति की लहर को भुनाने की कोशिश एनडीए खासकर एलजेपी की ओर की गई है. एलजेपी ने इसके लिए अपनी पूरी ताकत तो झोंकी ही, साथ ही बीजेपी और नीतीश कुमार ने चुनावी सभाएं कर एलजेपी का पूरा साथ दिया है. जातीय समीकरण को देंखे तो समस्तीपुर सुरक्षित सीट पर यादव मतदाता 32% कुशवाहा मतदाता 24% सवर्ण वोटर 18% मुस्लिम वोटर 12% और अन्य वर्ग के मतदाता 14 ℅ हैं.

किशनगंज विधानसभा सीट 
यह उपचुनाव में यही एकमात्र सीट बीजेपी के खाते में हैं जहां से बीजेपी ने स्वीटी सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है. किशनगंज सीट परंपरागत रुप से कांग्रेस की सीट मानी जाती है. लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने इसी एकमात्र सीट पर जीत हासिल कर महागठबंधन की कुछ हद तक इज्जत बचायी थी. कांग्रेस से डाक्टर जावेद यहां से विधायक थे जिन्होंने महागठबंधन की ओर से एकमात्र सीट जीती. कांग्रेस ने उपचुनाव में डा जावेद की मां शाहिदा बानो को उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर मुकाबला कड़ा होने के आसार हैं क्योंकि औवेसी की पार्टी AIMIM ने भी अपने उम्मीदवार खड़ा कर लडाई को दिलचस्प बना दिया है.
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बिहार एनडीए, एनडीए, बिहार उपचुनाव
NDA के नेताओ के साथ अमित शाह


नाथनगर विधानसभा सीट (भागलपुर)
नाथनगर विधानसभा क्षेत्र में कुल चौदह उम्मीदवार मैदान में है. जेडीयू से लक्ष्मीकांत मंडल, आरजेडी से राबिया खातून, हम(सेक्यूलर) से अजय राय, वंचित समाज पार्टी से डॉली मंडल, भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी से मनोहर मंडल, सीपीआई से सुधीर शर्मा अन्य उम्मीदवार चुनावी अखाड़े में हैं. जीतनराम मांझी की पार्टी हम ने भी अजय राय के रुप में अपना उम्मीदवार उतार कर इस सीट को चर्चा में ला दिया है लेकिन राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आरजेडी और जेडीयू के बीच ही आमने-सामने की टक्कर है हालांकि हम सेक्यूलर और निर्दलीय प्रत्याशी डा.अशोक कुमार आलोक चतुष्कोणीय बनाने में लगे हैं, लेकिन टक्कर आमने-सामने की है.

बेलहर विधानसभा (बांका)
इस सीट पर से जेडीयू के गिरधारी यादव विधायक रहे लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वे सांसद बन गए. उनकी जगह पर जेडीयू ने उनके भाई लालधारी यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है तो आरजेडी ने रामदेव यादव के रुप में अपने पूर्व विधायक को ही मैदान में उतारा है। है. मूल रूप से इस विधान सभा क्षेत्र में यादव जाति का दबदबा रहा है और दोनों ही उम्मीदवार यादव जाति से ही आते हैं इसलिए मुकाबला बराबर का माना जा रहा है. अगर चुनावी गणित देखें तो आरजेडी अपने MY समीकरण के भरोसे है तो जेडीयू इसमें सेंध लगाने के अलावा अन्य जातियों के वोट बैंक पर भी नजर गड़ाए हुए हैं.

सिमरी बख्तियारपुर विधानसभा (सहरसा)
सहसा जिले की इस सीट पर कुल 6 उम्मीदवार मैदान में हैं. जेडीयू ने अरुण यादव को तो आरजेडी ने जफर आलम को उम्मीदवार बनाया है. महागठबंधन में जब फूट पड़ी तो नाथनगर के बाद सिमरी बख्तियारपुर ही दूसरी सीट जहां पर महागठबंधन के सहयोगी वीआईपी ने आरजेडी के सामने दिनेश निषाद के रुप में अपना उम्मीदवार खड़ा कर दिया. इस सीट की खासियत यह है कि 1952 के बाद से अब तक यहां यादव या मुसलमान ही विधायक बना ऐसे में जाहिर है कि सीधी टक्कर तो जेडीयू आरजेडी के बीच ही होगी.

दरौंदा विधानसभा (सीवान)
इस सीट पर चुनावी मैदान में कुल 11 उम्मीदवार हैं. इस सीट पर से जेडीयू से कविता सिंह विधायक थीं, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में वे सांसद बन गईं. जेडीयू ने इस चुनाव में कविता सिंह के पति अजय सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है जबकि आरजेडी ने उमेश सिंह उम्मीदवार हैं लेकिन बीजेपी से बागी होकर निर्दलीय रुप में कर्मजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह भी चुनाव में खड़े हैं. उनके चुनाव में खड़े होने बाद मामला त्रिकोणीय हो गया है.

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First published: October 20, 2019, 3:22 PM IST
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