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कैंसर के कारण काटनी पड़ी थी जीभ अब ब्लैक राइस की खेती कर दूसरों की बचा रहे जान

News18 Bihar
Updated: October 16, 2019, 3:15 PM IST
कैंसर के कारण काटनी पड़ी थी जीभ अब ब्लैक राइस की खेती कर दूसरों की बचा रहे जान
ब्लैक राइस की फसल के साथ पटना के बिक्रम के किसान

ब्लैक राइस की कीमत बाजार में 500 से 800 रुपए प्रति किलो है. इस वर्ष पटना के बिक्रम समेत झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश के विभिन्न जगहों पर इसकी खेती हो रही है.

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पटना. राजधानी पटना (Patna) से महज 35 किलोमीटर दूर स्थित बिक्रम के संग्रामपुर गांव में अब काले चावल (Black Rice) की खेती (farming) कर किसान अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. पहले यह चावल भारत के मणिपुर और असम में ही पैदा होता था लेकिन अब पटना से सटे बिक्रम के संग्रामपुर गांव के किसान अरुण कुमार शर्मा सहित अन्य किसानों ने भी ब्लैक राइस की खेती करनी शुरू कर दी है.

दो साल पहले हुआ था कैंसर

ब्लैक राइस की खेती करने वाले किसान अरुण कुमार शर्मा की स्टोरी काफी दिलचस्प है. उन्होंने खुद की जान बचाने के लिए ही इस खेती को पेशा बना लिया. उन्होंने बताया कि दो वर्ष पूर्व उनको मुंह में कैंसर हो गया था. इस बीमारी के इलाज के लिए वो मुम्बई गये थे. इस दौरान डॉक्टरों ने उनको जीभ में कैंसर की जानकारी दी थी. इलाज के क्रम में ही कैंसर के कारण जीभ को काट दी गई थी. उस समय डॉक्टरों ने काला चावल खाने के लिए बोला किंतु काला चावल कहीं सुलभ तरीके से नहीं मिल पाया था.

सोशल मीडिया से मिली जानकारी

अरूण शर्मा को सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी मिली. इसके बाद अरूण ने आवाज के पहल संस्था द्वारा काले चावल का बीज पाया. किसान को एक किलो बीज उपलब्ध कराया गया था. शर्मा ने उस बीज से खेती शुरू की और फिलहाल 18 कट्ठा खेत में काले चावल की खेती कर रहे हैं. काले चावल की खेती की बात करें तो आम धान के पौधे की तुलना में इसकी फलस डेढ़ गुना ज्यादा लम्बी होती है. इस पौधे की लंबाई 5 से 6 फुट होती है. इसकी धान की बाली 10 से 12 इंच की लंबी है. सबसे बड़ी बात है कि इस पौधे को नील गाय भी नहीं खाता है. इसमें पानी का पटवन भी कम लगता है.

मणिपुर से मंगवाया गया था बीज

आवाज के पहल संस्था के निदेशक लवकुश शर्मा ने बताया कि बीते वर्ष मणिपुर से ब्लैक राइस की बीज लाकर खेती कराया गया था जिसमे ट्रायल में सफलता मिली. इस वर्ष बिक्रम के अलावे झारखंड, उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश के विभिन्न जगहों पर इस वर्ष सौ किसानों को ब्लैक राइस का बीज उपलब्ध कराया गया है. ब्लैक राइस की खूबियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि कैंसर और दिल की विभिन्न बीमारियों को रोकने में कारगर होता हैं. इस चावल की खास बात यह है कि मधुमेह के मरीज भी इसे खा सकते है. इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट के गुणों से भरपूर माना जाता है.
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अपनी कटी जुबान को दिखाते किसान अरूण कुमार शर्मा


क्यों खास होता है ब्लैक राइस

यूं तो कॉफी और चाय में भी एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं लेकिन काले चावल में इसकी मात्रा सर्वाधिक होती है. आम तौर पर सफेद चावल के मुकाबले इसमें ज्‍यादा विटामिन B और  E के साथ कैलशिमय, मैगनीशियम, आयरन और जिंक की भी मात्रा ज्‍यादा होती है. अरूण शर्मा अपने गांव में करीब एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती कर रहे हैं. ब्लैक राइस बाजार में बहुत कम उपलब्ध है. इसकी कीमत 500 से 800 रुपए प्रति किलो बताई जाती है.

रिपोर्ट- आदित्य आनंद

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First published: October 16, 2019, 3:15 PM IST
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