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जहां जातिगत राजनीति का है बोलबाला वहीं पर जाति आधारित जनगणना की क्यों उठ रही है मांग?

बिहार से जाति आधारित जनगणना की मांग के समर्थन में कई आवाजें उठ रही हैं.

बिहार से जाति आधारित जनगणना की मांग के समर्थन में कई आवाजें उठ रही हैं.

Caste Census: आखिरकार बिहार की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां जेडीयू और आरजेडी (JDU and RJD) जाति आधारित जनगणना (Caste Based census) क्यों कराना चाह रही हैं? बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) जातिगत जनगणना करा कर क्या हासिल करना चाहते हैं?

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पटना. पिछले कुछ दिनों से देश में खासकर बिहार (Bihar) से जाति आधारित जनगणना (Caste Based Census) की मांग के समर्थन में कई आवाजें उठ रही हैं. बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के साथ-साथ बिहार विधानसभा में विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) भी जातिगत जनगणना की मांग कर रहे हैं. बता दें कि फरवरी 2019 में बिहार विधानमंडल और 2020 में बिहार विधानसभा में जातीय जनगणना कराने का प्रस्ताव पास हो चुका है. बिहार सरकार दोनों सदनों से जाति आधारित जनगणना कराने को लेकर केंद्र सरकार को अब तक दो बार प्रस्ताव भी भेज चुकी है, लेकिन दोनों बार केंद्र सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार बिहार की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियां जेडीयू और आरजेडी जाति आधारित जनगणना क्यों कराना चाह रही हैं? बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव जातिगत जनगणना करा कर क्या हासिल करना चाहते हैं? जातिगत जनगणना कराने के पीछे कहीं दोनों पार्टियों की राजनीतिक चाल तो नहीं है?  क्यों बीजेपी को जातिगत जनगणना कराने से एतराज है?

क्यों उठने लगी है जाति आधारित जनसंख्या की मांग?
बता दें कि बिहार में जातिगत जनगणना को लेकर भले ही मत अलग-अलग रहे हों, लेकिन बिहार में जातिगत राजनीति का ही बोलबाला रहा है. जेडीयू और आरजेडी दोनों पार्टियां सत्ता प्राप्त करने के लिए जातिगत समीकरणों पर ही ज्यादा भरोसा करती हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार जातिगत जनगणना करा कर ओबीसी वोटबैंक को साधने की कवायद में लगे हुए हैं तो वहीं आरजेडी जनगणना करा कर ओबीसी वोटबैंक को और मजबूत करेगी. अभी तक सिर्फ एससी और एसटी की ही गणना होती रही है, लेकिन पहली बार ओबीसी को भी जनगणना में शामिल कराने की मांग की गई है.

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देश में पहली बार कास्ट बेस जनगणना 1931 में हुई थी.


नीतीश कुमार का क्या है तर्क
नीतीश कुमार का इसके पीछे तर्क है कि देश में जातिगत जनगणना होनी चाहिए. इससे एससी-एसटी के अलावा अन्य कमजोर वर्ग की जातियों की भी वास्तविक संख्या के आधार पर विकास के कार्यक्रम बनाने में सहायता मिलेगी. इसलिए केंद्र सरकार को इस मुद्दे पर पुनर्विचार करना चाहिए.

जातिगत आधारित जनगणना पहले कब हुई थी
बता दें कि देश में पहली बार कास्ट बेस जनगणना 1931 में हुई थी. इसके बाद 2011 में भी हुई, लेकिन इस रिपोर्ट में कई खामियां बता इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है. अब जातिगत आधार पर जनगणना की मांग के पीछे तर्क दिया जा रहा है कि इससे यह पता चलेगा कि कौन जाति अभी भी पिछड़ेपन का शिकार है. ताकि उन जातियों को उनकी संख्या के हिसाब से आरक्षण का लाभ देकर स्थिति को और मजबूत किया जा सके.

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जातिगत आधार पर जनगणना की मांग से पता चलेगा कि कौन जाति अभी भी पिछड़ेपन का शिकार है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)


क्या कहते हैं जानकार
देश में जाति आधारित जनगणना की मांग को लेकर वरिष्ठ पत्रकार सुनील पांडेय कहते हैं, ‘इसमें कुछ गलत नहीं है क्योंकि इससे किसी भी जाति की आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक स्तर की सही वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल जाएगी. जाति आधारित जनगणना से यह भी पता चलेगा कि किस जाति में कितने लोग अब तक बदतर जिंदगी जीने को मजबूर हैं. लेकिन, नीतीश कुमार और आरजेडी के नेता इसमें भी अपना हित साध रहे हैं. नीतीश कुमार जहां उस हिसाब से अपना राजनीतिक समीकरण बना सकते हैं तो वहीं आरजेडी इसको मुद्दा बना कर आगामी बिहार विधान सभा या लोक सभा चुनाव में भुनाना चाहेगी. वहीं, बीजेपी को लग रहा है कि अगर अभी जातिगत जनगणना की गयी तो उसके कई दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं.’

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पांडेय के मुताबिक, ‘बीजेपी नेताओं को लगता है कि जातीय जनगणना कराए जाने से देश का सामाजिक ताना-बाना बिगड़ सकता है. देश में अनुसूचित जाति और जनजाति की जनगणना इसलिए कराई जाती है क्योंकि संविधान के तहत उन्हें सदन के अंदर आरक्षण दिया गया है. जातीय जनगणना के आधार पर तैयार की गई संख्या के आधार पर ही अनुसूचित जाति और जनजाति की सीटों को घटाया और बढ़ाया जाता है. बीजेपी को लगता है कि जातिगत आधार पर जब किसी को यह पता चलेगा कि उनके समाज की संख्या घट रही है, तो वह जाति परिवार नियोजन को अपनाना छोड़ सकती है. जिससे देश की जनसंख्या में और भी अधिक तेजी से इजाफा हो सकता है.'

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