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क्या भारतीय रेल निजीकरण की ओर बढ़ रही है?

Neel kamal | News18 Bihar
Updated: October 22, 2019, 10:48 PM IST
क्या भारतीय रेल निजीकरण की ओर बढ़ रही है?
केंद्र सरकार के पीपीपी मोड का विपक्षी कर रही हैं विरोध.

केंद्र सरकार (Central Government) ने देश की 150 ट्रेनों के साथ-साथ 50 स्टेशनों को पीपीपी मोड (PPP Mode) पर निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है. इसी वजह से भारतीय रेल (Indian Railway) के निजीकरण (Privatization) की खबरों ने हलचल पैदा कर दी है. जबकि कुछ जगह रेलवे कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है.

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पटना. पिछले काफी समय से भारतीय रेल (Indian Railway) के निजीकरण (Privatization) की खबरों ने हलचल पैदा कर दी है. यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्‍योंकि मौजूदा केंद्र सरकार (Central Government) ने देश की 150 ट्रेनों के साथ-साथ 50 स्टेशनों को पीपीपी मोड (PPP Mode) पर निजी हाथों में सौंपने का निर्णय लिया है. सूत्रों की मानें तो भारतीय रेल फिलहाल 35 हजार करोड़ के घाटे में चल रही है.

केंद्र सरकार और रेलवे के सामने है ये चुनौती
इसके साथ ही केंद्र सरकार और रेलवे को सामने रेल यात्रियों को अधिक से अधिक और अत्याधुनिक सुविधा देने की भी बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. याद रहे कि रेलवे ने पिछले कई साल से यात्री टिकट के दाम नहीं बढ़ाए हैं. लिहाजा रेलवे ने पीपीपी मोड पर कुछ स्टेशन और ट्रेनों को निजी हाथों में सौंपने का मन बनाया है. हालांकि इसे पूरी तरह अभी अमल में नहीं लाया गया है. बावजूद इसके रेलवे कर्मचारी के साथ-साथ कई संस्थानों ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया है.
पूर्व मध्य रेल के दानापुर मंडल स्थित दैनिक यात्री संघ के लोगों ने रेलवे के निजीकरण के विरोध में एक बैठक भी बुलाई, जिसमें ट्रेन और स्टेशन को निजी हाथों में सौंपने का कड़ा विरोध किया गया.

बिहार दैनिक यात्री संघ ने कही ये बात
बिहार दैनिक यात्री संघ की कार्यकारिणी समिति संघ के अध्यक्ष बीरेन्द्र प्रसाद शर्मा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कहा गया कि राष्ट्रहित में नहीं है रेलवे का निजीकरण. इसलिए संघ रेलवे के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगा. जबकि सभी सदस्यों ने एक मत हो कर इसका समर्थन भी किया.
इस मीटिंग में ट्रेड यूनियन के राज कुमार झा भी अतिथि के तौर पर उपस्थित रहे. उन्होंने भी रेलवे का निजीकरण का जमकर विरोध किया. वही संघ के मुख्य संरक्षक मंजुल कुमार दास ने कहा कि जब बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ तो देश से मज़दूरी की समस्या का समाधान हुआ और बेरोज़गारी दूर हुई. लेकिन आज लाखों बेरोज़गार युवक नौकरी के लिए सड़कों पर भटक रहें है. बहाली का कोई रास्ता सरकार नहीं निकाल रही है.
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संघ के महासचिव नन्द किशोर प्रसाद और सचिव शोएब कुरैशी ने कहा कि रेलवे का निजीकरण होने से यात्रियों के साथ आर्थिक शोषण बढ़ जाएगा.

patna, indian railways
संघ रेलवे के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ेगा.


पटना में होगा विरोध
इधर रेलवे में निजीकरण के खिलाफ ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन (ECRKU) की ओर से बुधवार को पटना जंक्शन स्थित स्टेशन मास्टर के कमरे के बाहर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. इस दौरान ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के कर्मचारी जमा होंगे और वे निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे.

विरोधी पार्टियों ने साधा निशाना
जबकि विपक्षी पार्टियों ने भी इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है. राजद नेता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री हुआ करते थे, तो उन्होंने रेलवे को प्रॉफिट में लाने का काम किया था. लोग उन्हें मैनेजमेंट गुरु भी मानते थे, लेकिन अब रेल की स्थिति ऐसी हो गई है ना समय पर ट्रेन चलती है ना ही रेल यात्रियों को कोई सुविधा मुहैया हो रही है. जबकि कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार के इस फैसले को गलत करार दिया है.

हालांकि पूर्व मध्य रेल के दानापुर मंडल के मंडल प्रबंधक रंजन प्रकाश ठाकुर ने कहा है कि अभी तक उनके पास कोई जानकारी नहीं है कि पूर्व मध्य रेल के कितने स्टेशन और ट्रेनों को पीपीपी मोड पर दिया जाना है. अब देखना यह है कि केंद्र सरकार और भारतीय रेल को इस फैसले की वजह से आगे किस तरह के विरोध का सामना करता है.

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First published: October 22, 2019, 10:39 PM IST
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