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    एक जुलाई से शुरू हो रहा है चातुर्मास, 148 दिनों तक नहीं करें कोई भी मांगलिक कार्य

     ज्योतिषाचार्य राजेश के मुताबिक, चातुर्मास 1 जुलाई से आरंभ होकर 25 नवंबर तक यानी देवउठनी एकादशी 148 दिनों तक जारी रहेगा.
    ज्योतिषाचार्य राजेश के मुताबिक, चातुर्मास 1 जुलाई से आरंभ होकर 25 नवंबर तक यानी देवउठनी एकादशी 148 दिनों तक जारी रहेगा.

    धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास की अवधि में मांगलिक कार्य शादी- ब्याह (Marriage) को वर्जित माना गया है.

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    पटना. एक जुलाई से चातुर्मास (Chaturmas) शुरू हो रहा है. ऐसे में एक जुलाई से लेकर 25 नवंबर तक कोई भी मांगलिक कार्य नहीं होगा. खास कर चातुर्मास के दौरान शादी- विवाह और मुंडन संस्कार (tonsure ceremony) को वर्जित माना गया है. जाहिर सी बात है इस अवधि में शादी- विवाह से जुड़े लोगों की जीविका का साधन भी ठप पड़ जाएगा. बताते चलें कि ऐसे भी कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान काफी लंबे समय तक शादी समारोह नहीं हो पाया था. यदि लॉकडाउन के दौरान किसी ने शादी की भी तो दूल्हा अकेले ही बारात लेकर गया. बमुश्किल से दूल्हे के साथ चार से पांच ही लोग जा पाते थे. काफी सादगी से शादी होती थी. इसमें बैंड- बाजे भी नहीं बजते थे. लेकिन अनलॉक 1.0 (Unlock 1.0) में कुछ छुट मिलते ही शादी समारोह ने जैसे ही रफ्तार पकड़ी तो चातुर्मास शुरू होने की तिथि नजदीक आ गई. अब ऐसे में शादी समारोह से जुड़े लोगों की आजीविका पर फिर से संकट के बादल छा गए हैं.

    दरअसल, 1 जुलाई से 25 नवंबर तक चातुर्मास का दौर रहेगा. चातुर्मास वह समय है जिसमें कोई भी मांगलिक कार्य जैसे शादी-विवाह और मुंडन संस्कार को वर्जित माना जाता है. जाहिर सी बात है कि इस अवधि में शादी -ब्याह से अपनी आजीविका चलाने वाले लोगों के ऊपर आफत आन पड़ेगी. एक रिपोर्ट के अनुसरा,  कोरोना संक्रमण के बाद अनलॉक 1.0 में मंदिरों के पट खुल गए हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों की तरफ से रुख कर रहे हैं. लेकिन मांगलिक और शुभ कार्य अभी पूरी तरीके से नहीं हो पा रहे हैं. वैसे तो कोविड-19 के कारण मार्च से लेकर जून तक होने वाली शादियों पर काफी असर पड़ा था. और ऐसे कई घरों में शहनाइयां नहीं बजी जहां पहले से शादी विवाह तय किए गए थे. लेकिन अब एक बार फिर से अनलॉक में भी शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं हो पाएंगे.

    यानी देवउठनी एकादशी 148 दिनों तक जारी रहेगा
    बता दें कि सनातन धर्मावलंबियों के लिए चातुर्मास की शुरुआत एक जुलाई से हो रही है. इस बार 2 आश्विन मास होने से 4 महीने तक रहने वाला चातुर्मास 5 महीने का होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार चातुर्मास की अवधि में मांगलिक कार्य शादी- ब्याह को वर्जित माना गया है. ज्योतिषाचार्य राजेश के मुताबिक, चातुर्मास 1 जुलाई से आरंभ होकर 25 नवंबर तक यानी देवउठनी एकादशी 148 दिनों तक जारी रहेगा. जाने माने ज्योतिसचाचार्य राजनाथ झा की माने तो इस अवधि में शादी- ब्याह करना अशुभ माना जाता है. जाहिर सी बात है लगभग 5 महीने तक शादी- ब्याह बाधित रहने से इनपर निर्भर रहकर जीविकोपार्जन करने वालो को आर्यथिक तौर पर दुश्वारियां झेलनी पड़ेंगी. कई ऐसे पेशा है जिससे जुड़े लोगों की व्यथा कष्टदायक है.
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