जलवायु परिवर्तन का स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा प्रभाव, बचने के लिए लगाने होंगे पेड़- नीतीश कुमार

सीएम ने कहा कि बदलते पर्यावरण के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. मगध क्षेत्र में लू से बहुत लोग मर गए. वज्रपात से 54 लोगों की मौत हो चुकी है और मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाके में एईएस से गरीब बच्चों की मौत हुई.

News18 Bihar
Updated: July 13, 2019, 3:37 PM IST
जलवायु परिवर्तन का स्वास्थ्य पर पड़ रहा बुरा प्रभाव, बचने के लिए लगाने होंगे पेड़- नीतीश कुमार
जलवायु परिवर्तन पर सर्वदलीय बैठक में सीएम नीतीश ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए सबको सजग होना पड़ेगा. (फाइल फोटो)
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Updated: July 13, 2019, 3:37 PM IST
लगातार हो रहे वज्रपात और चमकी बुखार जैसी बीमारियों के कहर से जूझते बिहार में अब जलवायु परिवर्तन भी बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है. आलम ये है कि आधा बिहार बाढ़ से डूबा रहता है तो आधे बिहार में सूखे का प्रकोप रहता है. जानकारों की राय में ये सब जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है. ऐसे में बिहार के नेता भी जलवायु परिवर्तन को एक बड़ी समस्या के तौर पर  देखने लगे हैं. इसी क्रम में शनिवार कोजलवायु परिवर्तन और उसके दुष्प्रभावों पर विधान मंडल के सेंट्रल हॉल में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई जिसमें सभी दलों के नेताओं ने अपने विचार व्यक्त करने के साथ सुझाव भी साझा किए.

बैठक की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के चलते आग बाढ़ और सूखे की समस्या बढ़ गई है इसलिए हम सब को पर्यावरण की रक्षा के लिए आगे आना होगा. सबको सजग होना पड़ेगा. लोगों को अपने घरों के आसपास और अपनी जमीन पर पेड़ लगाने चाहिए.



उन्होंने कहा कि आजकल कटनी के बाद किसान फसल के अवशेष जला देते हैं. उनको पता नहीं किसने बता दिया है कि राख से जमीन की उत्पादकता बढ़ेगी. इससे उत्पादकता नहीं बढ़ेगी. आग लगाने से धरती में मौजूद कई चीजें जल जाएंगी. इसके लिए हमने जागरूकता अभियान चलाया है.

विधानमंडल में बुलाई गई बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि लोग अपनी जमीन पर भी पेड़ लगाएं. उन्होंने सदस्यों को आश्वासन दिया कि बाढ़ से निबटने की पूरी तैयारी है.


मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि यह जागरूकता अभियान रोहतास, कैमूर के इलाके से शुरू हुआ था और अब पटना जिले के इलाके में भी ऐसा किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि मैंने कृषि विभाग से जागरूकता अभियान चलाने को कहा.

सीएम ने कहा कि बदलते पर्यावरण के चलते लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है. मगध क्षेत्र में लू से बहुत लोग मर गए. वज्रपात से 54 लोगों की मौत हो चुकी है और मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाके में एईएस से गरीब बच्चों की मौत हुई. हालांकि एईएस के बारे में अभी पूरा पता लगाना बाकी है, लेकिन स्पष्ट है कि यह सब पर्यावरण को हुए नुकसान के कारण हो रहा है.

रेन वाटर हार्वेस्टिंग के संबंध में सीएम ने कहा कि जमीन के अंदर का पानी शुद्ध है. अगर हम ऊपर से गंदा पानी भेज देंगे तो और नाश हो जाएगा, इसलिए इस बात पर भी ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता पर विपरीत असर हो रहा है.
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मुख्यमंत्री ने कहा कि जब झारखंड और बिहार एक था तो कोई वन संरक्षण पर ध्यान नहीं देता था क्योंकि झारखंड में जंगल अधिक थे. जब झारखंड अलग हो गया तब बिहार का वन क्षेत्र 9 प्रतिशत से थोड़ा अधिक रह गया. बिहार के लगभग 94 हजार स्क्वायर किलोमीटर में 12 करोड़ लोगों की आबादी रह रही है.

सीएम ने कहा कि जंगल लगाने के लिए उतना जमीन उपलब्ध नहीं है. हालांकि हमारी सरकार ने 17 फीसदी ग्रीन कवर का लक्ष्य रखा है. अब तक 22 करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए गए, जिसके चलते ग्रीन कवर 15 प्रतिशत तक आ गया है. बावजूद इसके बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करने की जरूरत है.

इनपुट-  नीलकमल/रवि एस नारायण

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