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शिवसेना के अलग होते ही लोजपा ने BJP पर बनाया दबाव, अब चिराग ने उठाई ये मांग

News18 Bihar
Updated: November 19, 2019, 11:37 AM IST
शिवसेना के अलग होते ही लोजपा ने BJP पर बनाया दबाव, अब चिराग ने उठाई ये मांग
चिराग पासवान ने उठाई ये मांग (फाइल फोटो)

लोजपा (LJP) की कमान मिलते ही चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने अपना रुख साफ़ कर दिया है. अब उन्होंने दिल्ली में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) की पार्टी के साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ ताल ठोंकने की बात कही है.

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  • Last Updated: November 19, 2019, 11:37 AM IST
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(रिपोर्ट- अमित कुमार सिंह)

पटना. शिवसेना (Shiv Sena) के एनडीए से अलग होते ही अन्य सहयोगी दलों ने बीजेपी (BJP) पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है. जेडीयू (JDU) के बाद अब लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान (Chirag Paswan) ने बीजेपी पर दबाव बनाया है. चिराग पासवान ने एनडीए की बैठक में कोर्डिनेशन कमेटी (Coordination Committee) के गठन की मांग की है. ऐसा करके वो न सिर्फ बीजेपी पर दवाब बनाना शुरू कर दिया है बल्कि अंदर ही अंदर जेडीयू से मिलकर भगवा पार्टी की घेराबंदी भी शुरू कर दी है. ऐसे में सवाल ये है कि कहीं चिराग पासवान महाराष्ट्र के बहाने बिहार में अपनी पकड़ मजबूत करने में तो नहीं जुट गए हैं. पेश है एक खास रिपोर्ट.

लोजपा की कमान मिलते ही चिराग ने अपना रुख साफ़ कर दिया है. पहले झारखंड में बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ना, फिर दिल्ली में नीतीश कुमार की पार्टी के साथ मिलकर बीजेपी के खिलाफ ताल ठोंकने की बात करना और अब एनडीए की बैठक में खुलकर कोर्डिनेशन कमिटी की मांग करके चिराग पासवान ने बीजेपी को साफ संकेत दे दिए हैं कि अब वो पुरानी वाली लोजपा नहीं जो उसकी पिछलग्गू बने. चिराग पासवान का यह आत्मविश्वास यूं ही नहीं है बल्कि इसके पीछे जेडीयू की एक बड़ी ताकत है. याद कीजिए चिराग से पहले नीतीश कुमार के विश्वस्त केसी त्यागी ने भी एनडीए में कोर्डिनेशन कमेटी की मांग उठाई थी. अब चिराग के फ्रंट फूट पर आने से बीजेपी पर दवाब बनना शुरू हो गया है.

सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल हो

चिराग पासवान ने कहा है कि गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल हो इसके लिए कोर्डिनेशन कमेटी का गठन होना बेहद जरूरी है. चिराग ने पहले तेलुगू देशम पार्टी और बाद में उपेन्द्र कुशवाहा का उदाहरण देते हुए कहा कि चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर उपेन्द्र कुशवाहा गठबंधन से अलग हुए थे. जबकि 2018 में आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा न मिलने से टीडीपी ने नाराज होकर एनडीए का साथ छोड़ दिया था. अब शिवसेना भी एनडीए से अलग हो गई है. ऐसे में चिराग किसी भी तरह से बीजेपी पर दवाब बनाकर कोर्डिनेशन कमेटी का गठन कराना चाहते हैं, जिससे उन्हें 2020 में बिहार के चुनाव में फायदा पहुंच सके.

बीजेपी कोई खास तवज्जो नहीं दे रही
वो और बात है कि बीजेपी इनकी मांगों को कोई खास तवज्जो नहीं दे रही. लेकिन खंड-खंड बिखड़े हुए महागठबन्धन के लिए यह खबर थोड़ा सुकून देने वाला है. बिहार में भले ही बीजेपी और नीतीश कुमार की पार्टी साथ- साथ हो, लेकिन इनके रिश्तों में मनभेद और मनमुटाव की खबरें आम बात हैं. फिर चाहे लोकसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर बराबरी का समझौता करने की बात हो या फिर मोदी कैबिनेट में नीतीश कुमार की पार्टी का न शामिल होना, इसका एक बड़ा उदाहरण है. ऐसे में चिराग पासवान का जेडीयू के करीब आना और बीजेपी पर दवाब बनाना ये बताता है कि बीजेपी से अलग जदयू और लोजपा प्लान बी बनाने में जुटी है.
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First published: November 19, 2019, 11:33 AM IST
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