Bihar: चाचा-भतीजे के बीच खींचतान जारी, चिराग ने दिल्‍ली में बुलाई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक, दिखेगा किसमें कितना है दम?

चिराग पासवान आज कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं.

Political Controversy in LJP: चिराग पासवान ने आज सुबह 11 बजे दिल्ली में लोजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई हैं. इस बैठक में वो पार्टी में बड़ा बदलाव कर सकते हैं.

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    पटना/ नई दिल्‍ली. लोजपा (LJP) में पद और प्रतिष्‍ठा को लेकर चिराग पासवान (Chirag Paswan) और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस (MP Pashupati Kumar Paras) के बीच खींचतान का दौर जारी है. इस बीच चिराग ने आज दिल्‍ली में सुबह 11 बजे राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है, जिसमें वह बड़े फैसले कर सकते हैं. यही नहीं, चाचा और भतीजे की लड़ाई अब चुनाव आयोग तक पहुंच गई है. वहीं, इस समय चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस न सिर्फ पार्टी का असली नेता होने का दावा कर रहे हैं बल्कि दोनों नेता पार्टी के झंडा बैनर पर अपना-अपना वर्चस्व जमा रहे हैं.

    इससे पहले चिराग पासवान ने शनिवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर अपना पक्ष रखा था. हालांकि बिरला पिछले हफ्ते ही पशुपति कुमार पारस को लोकसभा में लोजपा के नेता के तौर पर मान्यता दे चुके हैं. बता दें कि लोजपा के छह सांसद हैं, जिसमें से पांच पारस को अपना नेता मान चुके हैं.

    पशुपति ने भंग की सभी पुरानी कमेटी, नई कार्यकारिणी का ऐलान
    एलजेपी के पारस गुट के अध्यक्ष पशुपति पारस ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी समेत सभी राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर की समितियों, प्रकोष्ठों को भंग कर दिया है. इसके साथ उन्‍होंने नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया है. पारस गुट ने इसकी सूचना चुनाव आयोग को देने की भी बात कही है. उनकी तरफ से बनाई गई नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी में 9 लोग हैं जिसमें अध्यक्ष पशुपति पारस के अलावा आठ सदस्य और बनाए गए हैं. उन आठ सदस्यों में चौधरी महबूब अली कैसर, वीणा देवी, चंदन सिंह, प्रिंस राज, सुनीता शर्मा (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष), संजय सराफ (राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता), रामजी सिंह (राष्ट्रीय महासचिव) और विनोद नागर (राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राष्ट्रीय प्रवक्ता) के नाम शामिल हैं.

    पारस गुट ने नहीं सौंपी सूची
    बता दें कि लोजपा में दो वर्षों से राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सूची अपडेट नहीं हुई है. ऐसे में यह मामला थोड़ा उलझा हुआ भी प्रतीत हो रहा है. इसी क्रम में बीते शुक्रवार का दिन भी बेहद महत्वपूर्ण था. दरअसल चिराग पासवान गुट की ओर से चुनाव आयोग के पास अपना पक्ष रखा गया. वहां चिराग गुट ने पशुपति पारस को राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किए जाने को असंवैधानिक बताया. इस दौरान चिराग गुट ने 77 सदस्यों के नाम आयोग को सौंप भी दिए. हालांकि पारस गुट ने चुनाव आयोग को कार्यसमिति की सूची अब तक नहीं सौंपी है.

    अब सबकी नजरें चुनाव आयोग पर
    इस बीच खुद के अध्यक्ष चुने जाने के बाद पशुपति कुमार पारस शुक्रवार को ही दिल्ली पहुंच चुके हैं. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि वे जल्द ही अपनी कार्यसमिति की सूची आयोग को सौंपेगे. साथ ही उन्होंने कहा कि फिलहाल राष्ट्रीय अध्यक्ष का नियुक्ति पत्र और पार्टी संविधान की प्रति आयोग को सौंपी है. इस बाबत चिराग ने आयोग से आग्रह किया कि एलजेपी संवैधानिक रुप से उनकी पार्टी है. अब दोनों गुटों की नजरें चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी हैं कि आखिर आयोग क्या फैसला लेता है.

    भतीजा बनाम चाचा
    इससे पहले चिराग पासवान ने कहा कि मेरे चाचा पशुपति ने मेरे पिताजी रामविलास पासवान के साथ मिलकर पार्टी बनाई थी. सदन का नेता चुनने का अधिकार केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड को है. उन्होंने जो गतिविधियां की हैं वह पार्टी के संविधान के खिलाफ हैं. वे पार्टी का गलत तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं.
    इसके साथ चिराग पासवान ने कहा कि करीब 75 केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड में से 9 लोगों ने मिलकर चाचा को निर्विरोध अध्यक्ष चुना है. जबकि ये सभी सस्‍पेंड चल रहे हैं. अध्यक्ष का चयन अवैध है. बाकी लोग हमारे साथ हैं. वहीं, पशुपति पारस ने राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चुने जाने के बाद कहा था कि जब भतीजा तानाशाह हो जाए तो चाचा मजबूरन क्या करेगा. पार्टी व्यवस्था में ये कहीं नहीं है कि कोई व्यक्ति आजीवन राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे. हमारी पार्टी का जो संविधान है, उसमें प्रत्येक 2-3 वर्ष में अध्यक्ष का चुनाव होना है. इसके साथ उन्‍होंने कहा कि पार्टी के हमारे कार्यकर्ताओं को मैं विश्वास दिलाता हूं कि लोजपा के अंदर कोई मतभेद नहीं है, कोई विरोध नहीं है.

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