लोजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक आज दिल्ली में, NDA को लेकर चिराग पासवान ले सकते हैं बड़ा फैसला
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लोजपा के संसदीय बोर्ड की बैठक आज दिल्ली में, NDA को लेकर चिराग पासवान ले सकते हैं बड़ा फैसला
पिछले कुछ समय में एनडीए के घटक दलों लोक जनशक्ति पार्टी और जनता दल युनाइटेड के रिश्तों में तल्खी आई है (फाइल फोटो)

Bihar Assembly Election: चिराग पासवान पिछले कई दिनों से जेडीयू के खिलाफ हमलावर हैं ऐसे में ये बैठक काफी अहम मानी जा रही है. इस बैठक में पार्टी के नेता सीटों के बंटवारे को लेकर भी फैसला लेंगे.

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पटना. बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के मद्देनजर सोमवार का दिन सियासी दलों के लिए काफी अहम माना जा रहा है. सोमवार को जहां पटना में जेडीयू की वर्चुअल रैली (JDU Virtual Rally) है तो वहीं लोकजनशक्ति पार्टी (LJP) की बिहार प्रदेश की संसदीय बोर्ड की बैठक आज दिल्ली में बुलाई गई है. दोपहर बाद दिन में दो बजे पार्टी के राष्ट्रीय कार्यालय 12 जनपथ में होने वाली बैठक में बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारी और मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा होनी है. माना जा रहा है इस बैठक में हर तरह के विकल्प पर चर्चा होगी.

दरअसल एनडीए के भीतर इस वक्त आपस में ही खींचतान चल रही है. आगामी विधानसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर अबतक बात नहीं बन पाने से भी एलजेपी के भीतर नाराजगी है. एलजेपी चाहती थी कि जुलाई तक ही सीटों का बंटवारा हो जाए, जिससे चुनाव प्रचार करने और चुनावी तैयारी के लिए पार्टी को समय मिल सके. लेकिन, ऐसा हो न सका. सूत्रों के मुताबिक, एलजेपी 2015 के विधानसभा चुनाव के फॉर्मूले के आधार पर 40 विधानसभा सीटों पर इस बार भी चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन, गठबंधन में उसे 25 से 27 सीटों तक ऑफर किया जा रहा है. इस मुद्दे पर चिराग पासवान नाराज चल रहे हैं लेकिन, पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी की एनडीए में एंट्री ने चिराग पासवान की परेशानी को और बढ़ा दिया है.

दरअसल, मांझी की एंट्री ही इसी मकसद से की गई है, जिससे दलित चेहरे के तौर पर रामविलास पासवान और चिराग पासवान की काट के तौर पर उन्हें भुनाया जा सके. एनडीए में आने के साथ ही जीतनराम मांझी ने चिराग पासवान और उनकी पार्टी पर जिस तरीके से हमला किया है, उससे यह साबित हो रहा है. ताजा हालात में जीतनराम मांझी के आने के बाद अब एनडीए के भीतर का समीकरण पूरी तरह से उलझ गया है. खासतौर से एलजेपी को लगता है कि यह सबकुछ जेडीयू के इशारे पर हो रहा है. लिहाजा चिराग पासवान ने अपने तेवर तल्ख कर लिए हैं. लेकिन, इसकी शुरूआत काफी पहले  हो चुकी थी, जब चिराग पासवान ने इस साल अपनी ‘बिहार फर्स्ट बिहारी फर्स्ट’ यात्रा के समय से ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर सवाल उठाया था. उसका सिलसिला अबतक जारी है.



कभी कोरोना से निपटने का मामला हो या फिर JEE  और NEET परीक्षा टालने का मामला लगातार चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अपनी बात उठाई है. सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जांच की मांग को लेकर चिराग ने कई बार नीतीश कुमार से मांग की. यहां तक कि उन्होंने इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री की भूमिका पर एक बार सवाल खड़ा कर दिया था. लेकिन, अब चिराग पासवान जेडीयू की तरफ से नहीं बल्कि जीतनराम मांझी की तरफ से दिया जा रहा है. जेडीयू-एलजेपी के इस झगड़े में मांझी को मोहरा बनाकर नीतीश कुमार पासवान परिवार को निशाने पर रखना चाहते हैं. दूसरी तरफ, इस खेल में चिराग पासवान की तरफ से रणनीति यही अपनाई जा रही है कि मांझी के हमले का जवाब न देकर निशाने पर फिर से नीतीश कुमार को ही रखा जाए. इसकी एक झलक दिख भी गई है.
दिल्ली में होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक के एक दिन पहले ही एस एसटी के मुद्दे को लेकर एक बार फिर चिराग ने  मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार को पत्र लिख दिया है ऐसे में आज की एलजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक में एनडीए के भीतर एलजेपी के भविष्य का इशारा मिल सकता है.
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