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नागरिकता संशोधन विधेयक: पीके के बाद JDU के इन दो बड़े नेताओं ने भी उठाए सवाल

News18 Bihar
Updated: December 10, 2019, 1:08 PM IST
नागरिकता संशोधन विधेयक: पीके के बाद JDU के इन दो बड़े नेताओं ने भी उठाए सवाल
नागरिकता संशोधन बिल पर एनडीए सरकार का साथ देने को लेकर जेडीयू के भीतर सवाल उठने लगे हैं.

पवन वर्मा ने ट्विटर पर लिखा, विधेयक जेडीयू के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ होने के अलावा असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और देश की एकता और सद्भाव के खिलाफ है. अगर गांधी होते तो वे भी इसका कड़ा विरोध करते.

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पटना. लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) का समर्थन किए जाने पर जेडीयू के भीतर विरोध के स्वर उठने लगे हैं. सबसे पहले पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि यह विधेयक लोगों से धर्म के आधार पर भेदभाव करता है. साफ है कि पीके का ये बयान पार्टी के उस स्टैंड से अलग है जो जेडीयू ने लोकसभा में (Lok Sabha) में विधेयक पर मतदान का समर्थन कर किया है. अब इस फैसले के विरोध में पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन वर्मा (Pawan Verma) ने भी इस बिल को एकता और सद्भाव के लिए खतरा बताया है.

पवन वर्मा ने माइक्रो बेलॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, मैं श्री नीतीश कुमार से राज्यसभा में Citizenship Amendment Bill को समर्थन पर पुनर्विचार करने का आग्रह करता हूं. विधेयक जेडीयू के धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों के खिलाफ होने के अलावा असंवैधानिक, भेदभावपूर्ण और देश की एकता और सद्भाव के खिलाफ है. अगर गांधी होते तो वे भी इसका कड़ा विरोध करते.



पीके और पवन वर्मा के साथ जेडीयू के एक और सीनियर नेता और पूर्व आइपीएस एनके सिंह ने सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल पर पार्टी के स्टैंड का विरोध किया है. जेडीयू नेशनल एग्जीक्यूटिव के सदस्य और रिटायर्ड आईपीएस एन के सिंह ने  ट्विटर पर लिखा, कल आजादी के बाद का काला दिन था. कल दिन गांधी, नेहरू और पटेल के धर्मनिरपेक्ष बहुलतावादी, लोकतांत्रिक भारत को पीछे छोड़ते हुए, गोलवलकर, सावरकर और आरएसएस के एक हिन्दू राष्ट्र की ओर पहला कदम बढ़ा दिया गया.


बता दें कि इसके पहले जेडीयू राज्य कार्यकारिणी के सदस्य ग़ुलाम गौस ने भी इशारों में बीजेपी पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल एक धर्म विशेष के ख़िलाफ़ है. देश भर में इस बिल को लेकर लोगों में शंका है. कई विवादास्पद मुद्दों को उठा बीजेपी ध्रुवीकरण करने की कोशिश कर रही है.
जेडीयू ने इस पर समर्थन क्यूं दिया ये जेडीयू के बड़े नेताओं से पूछिए.

बहरहाल लोकसभा में तो यह बिल पास होना तय माना जा रहा है. जबकि राज्यसभा में इस बिल के पारित होने की पूरी संभावना है क्योंकि वाईएसआर कांग्रेस, जेडीयू और बीजेडी के समर्थन से साफ है कि राज्यसभा में बहुमत न रखने वाला एनडीए तीन तलाक और आर्टिकल 370 की तरह ही इस बिल को भी उच्च सदन से भी पारित करा सकता है.

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First published: December 10, 2019, 1:05 PM IST
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