नीतीश कुमार ने किया पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन

'भोजपुरी के शेक्सपियर' कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की जीवनी पर बनाई गई श्रृंखला की बदौलत चित्रा ने कला के माध्यम से मिथिला और भोजपुरी संस्कृति का संगम दिखाया है.

आईएएनएस
Updated: December 18, 2017, 5:48 PM IST
नीतीश कुमार ने किया पेंटिंग प्रदर्शनी का उद्घाटन
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Updated: December 18, 2017, 5:48 PM IST
आमतौर पर मधुबनी पेंटिंग का विषय पौराणिक कहानियां होती हैं परंतु कलाकार चित्रा सिंह ने इसमें एक अनोखा प्रयोग करते हुए इसे आकर्षक बनाया है. चित्रा की पेंटिंग की प्रशंसा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी की है. चित्रा की बनाई पेंटिंग की एक प्रदर्शनी पटना के बिहार ललित कला अकादमी की आर्ट गैलरी में लगाई गई है, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार देर शाम किया. 'भोजपुरी के शेक्सपियर' कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की जीवनी पर बनाई गई श्रृंखला की बदौलत चित्रा ने कला के माध्यम से मिथिला और भोजपुरी संस्कृति का संगम दिखाया है.

मुख्यमंत्री ने इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हुए कहा कि मिथिला पेंटिंग के जरिए भिखारी की जीवनी को लेागों के सामने लाने का यह एक अनोखा प्रयास है. उन्होंने चित्रा की 'भक्ति श्रृंखला' की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस श्रृंखला में मिथिला पेंटिंग की तीनों शैलियों का अभिनव प्रयोग किया गया है.

नीतीश ने गैलरी में उनकी सभी पेंटिंग को देखा और काफी सराहा. नीतीश ने चित्रा के पेंसिल कार्य की भी सराहना की. 20 दिसंबर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में कलाप्रेमी यहां पहुंच रहे हैं. भोजपुरी साहित्य, नृत्य, संगीत और थियेटर के किंवदंती भिखारी ठाकुर को भोजपुरी का 'शेक्सपियर' कहा जाता है, जिनकी 18 दिसंबर को जयंती भी है.

प्रदर्शनी में चित्रकार चित्रा सिंह ने मधुबनी पेंटिंग को फइन आर्ट से जोड़ते हुए इसके विषयों को आधुनिकता से भी जोड़ा है. पटना की रहने वाली विज्ञान में स्नातक चित्रा सिंह जब आठवीं की शिक्षा ग्रहण कर रही थी, तभी से स्केचिंग करना प्रारंभ कर दिया था. एक गृहिणी के रूप में सफल होने के बाद चित्रा ने चित्रकारी के प्रति प्रेम के कारण एक बार फिर मिथिला पेंटिंग के जरिए पौराणिक चित्रों को रूप देने लगी.

उनकी पेंटिंग का मुख्य विषय रामायण, महाभारत और प्रातिक विषयों तथा सामाजिक और आधुनिक विषयों के इई-गिर्द घूमता है. इनकी पेंटिंग अगर सामजिक कुरीतियों को इंगित करता है, तो उनके समाधान को भी परिलक्षित करता दिखाया जाता है.

भारती दयाल, बउआ देवी और सीता देवी जैसे कलाकारों की प्रशंसक चित्रा अपनी पेंटिंग में खुद की शैली विकसित की. इनकी चर्चित पेंटंगों में दशरथ मांझी, अधिकार प्राप्त महिला, साहस के पत्रकारिता, सिद्घार्थ से गौतम, एकांत लड़की और बेटी बचाओ प्रमुख है. उनकी 'भक्ति' श्रृंखला में भरत, हनुमान, केवट, अहिल्या और शबरी भी प्रशंसनीय रही.

वर्ष 2016 में नागालैंड के दिमापुर में भोजपुरी समाज के वार्षिक समारोह में मंच का डिजायन करने के लिए तत्कालीन राज्यपाल पी़ बी़ आचार्य द्वारा सम्मानित किया गया.
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मधुबनी पेंटिंग में नए विषयों के समावेश और इसमें आने वाले बदलाव पर चित्रा सिंह कहती हैं कि हर कला में बदलाव समय के मुताबिक आता है.
First published: December 18, 2017, 5:48 PM IST
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