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बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले CM नीतीश कुमार का बड़ा दांव, बैठक में की ये घोषणा

बिहार की राजनीति के चाणक्य कहे जाते हैं नीतीश कुमार

बिहार की राजनीति के चाणक्य कहे जाते हैं नीतीश कुमार

सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि दलितों को लंबित प्रकरणों को 20 सितंबर तक खत्म किया जाए.

  • News18 Bihar
  • Last Updated: September 5, 2020, 11:35 AM IST
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पटना.  बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2020) से ठीक पहले दलित को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा दांव खेला है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने दलितों को लेकर शुक्रवार को हुए बैठक में कई बड़ी घोषणा की है. SC-ST  के राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक में सीएम नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा  कि किसी भी अनुसूचित जाति या जनजाति के व्यक्ति की अगर हत्या होती है तो उनके परिवारों को एक सरकारी नौकरी  देने के नियम जल्द से जल्द बनाया जाए, ताकि पीड़ित परिवार को राहत मिल सके. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बैठक में सिर्फ यही नहीं बल्कि कई घोषणाएं की.

सीएम नीतीश ने दलितों को लेकर की बड़ी घोषणाएं

अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक में समीक्षा करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दलितों के लंबित कांडों को 20 सितंबर तक जल्द से जल्द खत्म करें. सीएम नीतीश कुमार ने दलितों को योजनाओं के जरिए मिलने वाले लाभों की मुख्य सचिव से समीक्षा करने का निर्देश दिया और बताया कि समीक्षा कर जरूरतमंदों तक जल्द से जल्द योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए. सिर्फ इतना ही नहीं दलित के रहने के लिए वास स्थान और मकानों का भी निर्माण तत्काल शुरू करने का निर्देश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया. बैठक में समीक्षा करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने अधिकारियों को बताया कि दलितों के लिए जो भी संभावित योजनाएं हो सकती हैं उसे भी बताया जाए. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की घोषणा को एक बड़ा ट्रंप कार्ड माना जा रहा है.



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विपक्षी दलों ने घोषणा पर उठाया सवाल

दलितों के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किए गए घोषणाओं को विपक्षी पार्टियों ने चुनावी घोषणा बताया है. कांग्रेस नेता  प्रेमचंद्र मिश्रा ने बताया कि पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा अत्याचार दलितों पर ही किए गए हैं. चुनाव से ठीक पहले नीतीश कुमार को दलितों की क्यों याद आ रही है. प्रेमचंद्र मिश्रा ने मांग करते हुए यह भी कहा कि सिर्फ दलितों के ही नहीं बल्कि किसी भी परिवार की हत्या होती है तो उनके परिजनों को नौकरी दिया जाना चाहिए. दूसरी तरफ आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने इस घोषणा पर हमला करते हुए कहा कि पिछले 15 सालों से दलित क्यों नहीं याद आए? एक तरफ श्याम रजक को पार्टी से निकालते हैं और दूसरी तरफ दलितों की का हितैषी होने की बात करते हैं. दलितों का असली हितैषी लालू प्रसाद यादव हैं.
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