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'आर्यभट्ट' पर CM नीतीश ने कुछ ऐसा कहा कि सबके दिल को छू गई बात! शिक्षा मंत्री बोले- ऐसा ही होगा

सीएम नीतीश कुमार ने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय को AKU कहने पर आपत्ति जताई.

Bihar News: सीएम नीतीश कुमार की इस इमोशन को शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने तत्काल समझते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी की भावना से विभाग के लोगों को भी अवगत करा दिया गया है. पहले इसे एकेयू (AKU) ही कहा जाता था, लेकिन अब आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ही कहा जाएगा.

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    पटना. आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, बिहार स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, बिहार खेल विश्वविद्यालय विधेयक-2021 को बिहार विधानमंडल से मंजूरी मिल गई. शिक्षा एवं संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी (Education and Parliamentary Affairs Minister Vijay Choudhary) ने मंगलवार को आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह बिहार को शिक्षा और ज्ञान के क्षेत्र में खोया गौरव लौटाएगा. इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने ऐसी बात कही कि हर किसी के दिल को छू गई. सीएम नीतीश ने कहा कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के नाम को कोई शार्ट में AKU नहीं कहेगा!

    सीएम नीतीश ने कहा कि देश में जिस दौर में यह चर्चा चल रही थी कि एक नॉलेज यूनिवर्सिटी बने, तब हमने इसे बिहार में बनाने का फैसला किया. जब ज्ञान विश्वविद्यालय बनाने की बात हो तो आर्यभट्ट से ज्यादा ज्ञानी भला कौन हो सकता है. उनके ज्ञान का लोहा दुनिया ने माना है. इसका नाम संक्षेप में नहीं लिया जाना चाहिए. आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय को एकेयू (AKU) कह देने से नई पीढ़ी के लोग आर्यभट्ट के बारे में भला कैसे जानेंगे?

    शिक्षा मंत्री ने समझी सीएम की भावना
    सीएम नीतीश कुमार की इस इमोशन को  शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने तत्काल समझते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी की भावना से विभाग के लोगों को भी अवगत करा दिया गया है. पहले इसे एकेयू ही कहा जाता था, लेकिन अब आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ही कहा जाएगा. विजय चौधरी ने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी की विशेष सोच निहित है. इसके नाम से ही विशिष्टता का बोध होता है.

    आर्यभट्ट ज्ञान विवि. में इन विषयों की पढ़ाई
    शिक्षा मंत्री ने कहा कि यह दूसरे विश्वविद्यालयों से पूरी तरह अलग है. मेडिकल और इंजीनियरिंग विधा के कॉलेज अब आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से अलग हो जाएंगे. वर्ष 2008 में इस विश्वविद्यालय को लेकर बने अधिनियम में संशोधन किया गया है. यहां नैनो टेक्नोलॉजी, खगोलशास्त्र, जलवायु परिवर्तन, रिवर स्टडीज, भूगोल, कला-संस्कृति, स्टेम सेल से जुड़े अत्याधुनिक विषयों की उच्चतम स्तर की पढ़ाई और शोध होंगे.

    प्रसिद्ध खगोलविद व गणितज्ञ थे आर्यभट्ट
    बता दें कि आर्यभट्‍ट प्राचीन समय के सबसे महान खगोलशास्त्रीयों और गणितज्ञों में से एक थे. विज्ञान और गणित के क्षेत्र में उनके कार्य आज भी वैज्ञानिकों को प्रेरणा देते हैं. आर्यभट्‍ट उन पहले व्यक्तियों में से थे जिन्होंने बीजगणित (एलजेबरा) का प्रयोग किया. उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना ‘आर्यभटिया’ (गणित की पुस्तक) को कविता के रूप में लिखा. यह प्राचीन भारत की बहुचर्चित पुस्तकों में से एक है. इसमें दी गई ज्यादातर जानकारी खगोलशास्त्र और गोलीय त्रिकोणमिति से संबंध रखती है. ‘आर्यभटिया’ में अंकगणित, बीजगणित और त्रिकोणमिति के 33 नियम भी दिए गए हैं.

    पृथ्वी गोल है, का प्रथम निष्कर्ष दिया था
    आज हम सभी इस बात को जानते हैं कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है और इसी कारण रात और दिन होते हैं. मध्यकाल में ‘निकोलस कॉपरनिकस’ ने यह सिद्धांत प्रतिपादित किया था पर इस वास्तविकता से बहुत कम लोग ही परिचित होगें कि ‘कॉपरनिकस’ से लगभग 1 हज़ार साल पहले ही आर्यभट्ट ने यह खोज कर ली थी कि पृथ्वी गोल है और उसकी परिधि अनुमानत: 24835 मील है. सूर्य और चन्द्र ग्रहण के हिन्दू धर्म की मान्यता को आर्यभट्ट ने गलत सिद्ध किया.

    बिहार की धरती पर हुआ आर्यभट्ट का जन्म
    इस महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ को यह भी ज्ञात था कि चन्द्रमा और दूसरे ग्रह सूर्य की किरणों से प्रकाशमान होते हैं. आर्यभट्ट ने अपने सूत्रों से यह सिद्ध किया कि एक वर्ष में 366 दिन नहीं बल्कि 365.2951 दिन होते हैं. आर्यभट्ट के कार्यों की जानकारी उनके द्वारा रचित ग्रंथों से मिलती है. इस महान गणितग्य ने आर्यभटीय के अतिरिक्त दशगीतिका, तंत्र और आर्यभट्ट सिद्धांत जैसे ग्रंथों की रचना की थी.गौरतलब है कि आर्यभट्ट का जन्म ईस्वी सन् 476 में कुसुमपुर (पटना) में हुआ था. यह सम्राट विक्रमादित्य द्वितीय के समय हुआ थे. इनके शिष्य प्रसिद्ध खगोलविद वराह मिहिर थे. आर्यभट्ट ने नालंदा विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी.

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