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Bihar Politics: अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के खिलाफ थे CM नीतीश, 10 उदाहरण से जानें क्यों पसंद है विरोध की राजनीति?

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने आर्टिकल 370 व 35ए समाप्त करने का विरोध किया था.

Bihar News: सीएम नीतीश की पार्टी जेडीयू का कई मामलों पर स्टैंड बार-बार यही साबित करता है कि वह बीजेपी से दूर-दूर, पास-पास वाली रणनीति पर चलती रही है. हालांकि विरोधियों की नजर में यह 'धोखा' है. वहीं, JDU के नेता इसे 'नीतीश की नैतिकता' से जोड़कर देखते हैं.

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पटना. ‘भारतीय जनता पार्टी से कई मुद्दों पर हमारी मतभिन्नता है, लेकिन हम केन्द्र और बिहार सरकार में साथी हैं और सही शासन चला रहे हैं.’ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) अक्सर अपनी इस बात को जाहिर करते हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस तरह वह अपनी राजनीतिक लाइन को परिभाषित करते हुए सहयोगियों को संदेश देते हैं कि वह अपने स्टैंड पर अटल रहते हैं. आज आर्टिकल 370 (Article 370) हटने के दो साल पूरे हो चुके हैं, वहीं राम मंदिर के भूमि पूजन (Ayodhya Ram Mandir Bhoomi Pujan) को एक साल हो गया है. ऐसे में केंद्र सरकार में शामिल जदयू के स्टैंड को याद करना भी जरूरी है, क्योंकि एनडीए (NDA) में रहते हुए भी जदयू (JDU) के नेता और बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार अलग राय रखते रहे हैं. अनुच्छेद 370, 35ए, राम मंदिर, ट्रिपल तलाक, एनआरसी और असम नागरिकता संशोधन विधेयक जैसे कई मुद्दे हैं, जिसपर एनडीए के सत्ता सहयोगी सीएम नीतीश कुमार अपनी विरोध की राजनीति को आगे बढ़ाते रहे हैं.

पेगासस जासूसी मामले (Pegasus spy case) पर विपक्ष लगातार केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार (Prime Minister Narendra Modi Government) पर आक्रामक है. संसद नहीं चलने दे रहा है तो विपक्ष के विरोध से अब नीतीश कुमार की भी आवाज मिल गई है. नीतीश ने इस मामले की जांच कराए जाने और संसद में इस पर चर्चा होने की बात कही है. साफ है कि सीएम नीतीश ने अपनी विरोध की राजनीति से अभी भी किनारा नहीं किया है, जब उनकी जेडीयू बिहार में तीसरे नंबर की राजनीतिक पार्टी बन गई है.

विरोध की राजनीति को पसंद करते हैं नीतीश!
दरअसल सीएम नीतीश की पार्टी जेडीयू का कई मामलों पर स्टैंड बार-बार यही साबित करता है कि वह बीजेपी से दूर-दूर, पास-पास वाली रणनीति पर चलती रही है. हालांकि विपक्ष की नजर में यह धोखा है. यह जनता को भ्रमित कर वोट पाने की महज जुगत भर है. बहरहाल सियासी आरोप जो कुछ भी हों, लेकिन सीएम नीतीश की नीतियों व एक्शन पर गौर करें तो यह स्पष्ट है कि वह विरोध की राजनीति को पसंद करते हैं और इसे कायम रखना चाहते हैं.

पेगासस मामले केंद्र की दलील का विरोध
पेगासस जासूसी प्रक्ररण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर जांच की मांग को लेकर बयान देकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए से अलग एक लाईन लेने की कोशिश कर रहे हैं. हाल में ही पटना में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए सीएम नीतीश ने कहा, निश्चित रूप से जांच कर लेनी चाहिए ताकि जो भी सच्चाई हो, वो सामने आ जाए. कभी भी, किसी को परेशान करने के लिए इस तरह का काम करता है तो ये नहीं होना चाहिए. इसके लिए ये जरूरी है कि सब चीजों पर बात हो जाए. केंद्र की इस दलील के बावजूद कि इस मामले में कुछ भी गड़बड़ नहीं है नीतीश ने विपक्ष के सुर में सुर मिलाकर उन्होंने मोदी सरकार को आईना दिखाने का प्रयास किया है.

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