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निधन से पहले रघुवंश बाबू ने लिखी थी चिट्ठी, अब उनके अधूरे सपनों को पूरा करेंगे CM नीतीश कुमार

फाइल फोटो

फाइल फोटो

रघुवंश प्रसाद सिंह के 10 सितंबर को लिखे पत्र का यह जवाब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने 11 सितंबर को ही उन्हें भेजा था और कार्रवाई का भरोसा दिया था.

  • News18Hindi
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    पटना. दिग्गज समाजवादी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) की मौत के बाद बिहार में चुनावी राजनीति शुरू हो चुकी है. इस कड़ी में जहां नीतीश सरकार (Nitish Government) उनके सपनों को पूरा करने की ओर अग्रसर दिख रही है तो राजद चिट्ठी की टाइमिंग को लेकर जेडीयू पर सवाल खड़े कर रहा है. रविवार को रघुवंश बाबू श्रद्धांजलि देने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि उनका जाना अपूर्णीय क्षति है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि रघुवंश बाबू ने अपने पत्र के माध्यम से हमलोगों के समक्ष जो मांगें रखी हैं, उन पर काम शुरू हो चुका है.

    मुख्यमंत्री ने रविवार की शाम कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उस संदर्भ में कुछ बातें कही हैं और जल्द ही रघुवंश बाबू के अधूरे सपने को पूरा किया जाएगा. नीतीश कुमार ने कहा कि रघुवंश बाबू के गृह जिले का मुख्य मार्ग भी उनके नाम पर होगा. सीएम ने कहा कि उनकी स्मृति के लिए अगर और भी कुछ करना होगा तो हमलोग करेंगे. दरअसल, निधन से ठीक कुछ दिन पहले रघुवंश प्रसाद सिंह ने एक के बाद एक कई पत्र लिख कर सीएम नीतीश कुमार से मांग की थी कि वैशाली में मिले भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को वैशाली में रखा जाए, जो अभी पटना में रखा गया है. रघुवंश सिंह के इस पत्र का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने भरोसा दिया था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के बनने वाले संग्रहालय के पूर्ण होने पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को वैशाली में ही प्रदर्शित किया जाएगा.

    मुख्यमंत्री ने लिखा था पत्र
    मुख्यमंत्री ने रघुवंश सिंह को लिखे पत्र में कहा था कि भगवान बुद्ध के काबुल संग्रहालय (अफगानिस्तान) में रखे भिक्षा-पात्र को वैशाली वापस लाने के लिए कार्रवाई करने के अनुरोध से संबंधित आपका दिनांक 10.09.2020 का पत्र प्राप्त हुआ. सीएम के इस पत्र से यह जाहिर हो रहा है कि रघुवंश सिंह ने इससे पहले भी यह मांग की है. मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर हो रही कार्रवाई को लेकर उन्हें अपडेट करते हुए लिखा था कि राज्य सरकार बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-समृति स्तूप की योजना को क्रियान्वित कर रही है. 300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस संग्रहाल के पूर्ण होने पर भगवान बुद्ध के पवित्र अस्थि अवशेष को गरिमापूर्ण तरीके से वैशाली में ही प्रदर्शित किया जाएगा.

    RJD ने चिट्ठी की टाइमिंग पर उठाए सवाल
    दूसरी तरफ पार्टी के कद्दावर नेता रहे रघुवंश बाबू की मौत के बाद उनकी पुरानी पार्टी यानी राजद के नेता इस चिठ्ठी की टाइमिंग पर सवाल खड़े कर रहे हैं. पार्टी के सीनियर नेता और मनेर से विधायक भाई वीरेंद्र ने कहा है कि रघुवंश सिंह के पत्र में सरकार ने साजिश की है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति आईसीयू से पत्र नहीं लिख सकता है. आरजेडी नेता सुबोध राय ने भी चिट्ठी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि आईसीयू में रहकर ऐसा पत्र लिखना मुश्किल है. सुबोध ने कहा कि कोविड के बाद रघुवंश बाबु से मुलाकात हुई थी. उन्होंने कहा था आरजेडी छोड़ने का सवाल ही नहीं है, बावजूद इसके ऐसी चिठ्ठी पर सवाल खड़ा होता है. सरकार सियासत कर रही है.

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