बिहार: नीतीश के गृह जिले नालंदा में नहीं है कोई कोचिंग सेंटर! पढ़िये क्या है कारण

वर्ष 2009 में कोचिंग सेंटरों की मनमानी के खिलाफ छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा था. इस प्रोटेस्ट में एक छात्र की मौत भी हो गई थी. तब तत्कालीन नीतीश सरकार ने आनन-फानन में कोचिंग एक्ट 2010 बनाया था. इसके तहत हर कोचिंग संस्थान को जिला मुख्यालय में अपना निबंधन करवाना अनिवार्य था.

News18 Bihar
Updated: June 14, 2019, 4:38 PM IST
बिहार: नीतीश के गृह जिले नालंदा में नहीं है कोई कोचिंग सेंटर! पढ़िये क्या है कारण
बिहार में कोचिंग एक्ट का पालन करवाने में नाकाम साबित हो रही सरकार
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Updated: June 14, 2019, 4:38 PM IST
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में एक भी कोचिंग संस्थान नहीं है. ये बात सुनने में थोड़ी अटपटी लगती है, लेकिन सरकारी आंकड़ों की हकीकत यही है. ये हाल सिर्फ नालंदा का ही नहीं बल्कि बिहार के तकरीबन सभी जिलों का है. दरअसल इन सभी जिलों में बिहार कोचिंग एक्ट की धज्जियां उडाई जा रही हैं. कई जिलों में एक भी कोचिंग संस्थान का निबंधन नहीं हुआ है जबकि कई में  काफी कम रजिस्ट्रेशन हुए हैं.

वर्ष 2009 में हुआ था छात्र आंदोलन



गौरतलब है कि 2009 में कोचिंग सेंटरों की मनमानी के खिलाफ छात्रों का आक्रोश फूट पड़ा था. इस प्रोटेस्ट में एक छात्र की मौत भी हो गई थी. तब तत्कालीन एनडीए सरकार ने आनन-फानन में कोचिंग एक्ट 2010 बनाया था. इसके तहत हर कोचिंग संस्थान को जिला मुख्यालय में अपना निबंधन करवाना अनिवार्य था.

नालंदा में एक भी कोचिंग संस्थान रजिस्टर्ड नहीं

प्रावधान यह भी था कि एक्ट के तहत दिए गए  प्रावधानों के तहत अगर कोचिंग संस्थान पर खरे नहीं उतरते हैं तो उनपर आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा, लेकिन अब तक इस कानून का पालन नहीं हो पाया है. स्थिति ये है कि कानून के बने 10 साल हो गए, लेकिन सीएम नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा आज तक एक भी कोचिंग का निबंधन जिला मुख्यालय में नहीं हो पाया है.

दरअसल आरटीआई एक्टिविस्ट शिव प्रकाश राय ने जब सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी तो नालंदा जिला प्रशासन ने खुद ये सूचना दी है. सिर्फ नालंदा ही नहीं बिहार के कई जिले ऐसे हैं जहां सरकार की नजर में एक भी कोचिंग नहीं हैं.

जिला            आवेदन                  निबंधन                     जुर्माना (दंड)
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नालंदा            00                       00                                 00
भोजपुर           00                       00                                00
मुंगेर               00                      00                                 00
बांका              09                       00                                00
अररिया          03                       00                                 00
कटिहार         12                       00                                 00
सीवान           225                     00                                 00
मुजफ्फरपुर   166                      00                                00
औरंगाबाद     102                      47                    23 को बंद करने का आदेश
दरभंगा          128                     00                                 00
नवादा           170                     00                                  00
गोपालगंज      15                       00                                  00
पटना            978                     286               111 रद्द, 581 संस्थानों की जांच जारी
बक्सर             94                     61                                   00
बेगूसराय        67                      00                                   00
भागलपुर       267                     00                                   00
समस्तीपुर      33                       00                                   00
खगड़िया        20                       00                                   00
सारण            151                     40                     39 को दंडित किया गया

इन आंकड़ों के मुताबिक 10 सालों में 19 जिलों में 2440 कोचिंग संस्थानों का आवेदन निबंधन के लिए आया था. आरटीआई के मुताबिक मात्र चार जिलों 434 कोचिंग के निबंधन का ही रिपोर्ट दिया गया है.ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि 19 जिलों में क्या मात्र 434 ही कोचिंग चलाने लायक है.

राजधानी पटना की ही बात करें तो लगभग 8 हजार से ज्यादा कोचिंग संस्थान बिना निबंधन के चलाए जा रहे हैं. इन पर कोई कार्रवाई करने वाला नहीं है.

सूरत हादसे से भी नहीं मिली सीख

गौरतलब है कि पिछले दिनों सूरत में एक कोचिंग संस्थान में आग लगी. इसमें 20 से अधिक छात्रों और शिक्षकों की मौत हो गई थी.बिहार के प्रत्येक जिले में हजारों कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं, सवाल ये है कि क्या बिहार में भी सूरत जैसी ही किसी घटना का इंतजार है.

 रिपोर्ट- बृजम पाण्डेय

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