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डेंगू से हुई मौत तो थाने जा पहुंचा परिवार, स्वास्थ्य मंत्री समेत अधिकारियों के खिलाफ दी शिकायत

News18 Bihar
Updated: October 22, 2019, 2:16 PM IST
डेंगू से हुई मौत तो थाने जा पहुंचा परिवार, स्वास्थ्य मंत्री समेत अधिकारियों के खिलाफ दी शिकायत
पटना में जलजमाव के बाद डेंगू के कहर से लोगों में दहशत है. (प्रती‍कात्‍मक फोटो)

मामला राजधानी पटना (Patna) से जुड़ा है, जहां एक 36 साल की महिला की मौत डेंगू (Dengue) से हो गई थी. परिजन ने इस मामले में पुलिस (Police) से कार्रवाई की मांग की है.

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पटना. बिहार (Bihar) के अधिकांश जिले इन दिनों डेंगू (Dengue) की चपेट में हैं. डेंगू के कहर से बड़ी तादाद में लोग प्रभावित हुए हैं. राजधानी पटना (Patna) में डेंगू से मौत की शिकार हुई हाजीपुर की अर्चना के मामले ने इतना तूल पकड़ा की देखते-देखते मामला थाने तक पंहुच गया. लपेटे में बिहार के स्वास्थ्य मंत्री (Health Minister) से लेकर स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के प्रधान संचिव संजय कुमार औऱ पीएमसीएच के अधीक्षक तक आ गए हैं.

गलत जांच रिपोर्ट से हुई मौत!

दरअसल, अर्चना की मौत ने जिस कदर परिजनों को हिलाकर रखा दिया, उससे सिस्टम पर भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. परिजन कई दिनों तक मौत के बाद भी ठोकर खाते रहे. परिजनों ने सबसे पहले अर्चना को पीएमसीएच में गंभीर रूप से बीमार होने के बाद भर्ती कराया था. पीएमसीएच के डेंगू वार्ड में 36 वर्षीय अर्चना को भर्ती कर इलाज शुरू किया गया. डॉक्टरों ने डेंगू की जांच भी करवाई लेकिन जो बल्ड रिपोर्ट पीएमसीएच से दिया गया उसमें अर्चना को डेंगू ने होने की बात कही गई थी.

PMCH की व्यवस्था में चूक

डेंगू रिपोर्ट को नॉन रिएक्टिव दिखाया गया. हालांकि, अर्चना की तबियत में कोई सुधार नहीं हुआ. परिजनों ने बाद में पीएमसीएच की रिपोर्ट से आश्वस्त होकर उसे घर लाना बेहतर समझा. अर्चना को परिजन घर ले आए, लेकिन तबियत में कोई सुधार नहीं होता देख एक बार फिर से परिजनों ने अर्चना को कंकड़बाग स्थित श्री राम नर्सिंग होम में भर्ती कराया.

16 अक्टूबर को हुई थी मौत

श्री राम नर्सिंग होम में जब अर्चना का फिर से बल्ड टेस्ट शुरू किया गया तब डेंगू पुष्टि हुई. इसके बाद डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन अर्चना को बचाया नहीं जा सका और पिछले 16 अक्तूबर को उनकी मौत हो गई. परिजन अर्चना की मौत के लिए पीएमसीएच की गलत रिपोर्ट को जिम्मेवार ठहराने लगे, जिसमें उनके बुखार को वायरल बताया गया था. परिजन अर्चना की मौत के लिए बिहार के स्वास्थय मंत्री मंगल पांडेय, स्वास्थय विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार के साथ ही पीएमसीएच अधीक्षक के खिलाफ केस दर्ज करवाने के लिये पुलिस के पास पंहुचे.
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थाने-थाने घूमते रहे मृतका के परिजन

सबसे पहले परिजन कंकड़बाग थाना पंहुचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गांधी मैदान थाना में केस दर्ज कराने की सलाह दी. गांधी मैदान थाना की पुलिस ने उन्हें पीरबहोर थाना में केस दर्ज कराने की सलाह दी, क्योंकि पीएमसीएच पीरबोहर थाना क्षेत्र में आता है. इसके बाद पीरबहोर थाना की पुलिस ने केस दर्ज करेने से इनकार करते हुए पीड़ित परिजनों को उस थाना क्षेत्र में केस दर्ज करने की सलाह दी जहां मच्छरों ने काटा था. पीरबहोर थानाध्यक्ष रिजवान अमहद के बेतुके बयान के बाद परिजन एसएसपी से लेकर डीजीपी तक से गुहार लगाते रहे.

डीजीपी की गुहार के बाद हुई कार्रवाई

चार दिनों तक चक्कर लगाने के बाद भी पुलिस अधिकरियों ने शुरुआती दौर में उनकी एक न सुनी, लेकिन आखिरकार 21 अक्तूबर को परिजनों की गुहार का असर हुआ और उसी पीरबहोर थानाध्यक्ष ने लिखित लिखित शिकायत दर्ज कर ली, जिसने पहले इनकार किया था.

हो सकती है कार्रवाई

यह पहला मौका है जब बिहार में डेंगू के मामले ने इतना तूल पकड़ा की मामला पुलिस विभाग तक पंहुच गया. बहरहाल, इस पूरे मामले में पुलिस जांच में जुट गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि राज्‍य के मंत्री और प्रधान सचिव के खिलाफ पुलिस कैसे जांच करेगी.

रिपोर्ट- संजय कुमार

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First published: October 22, 2019, 8:33 AM IST
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