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क्षेत्रीय दलों से भी बदतर हो गई है बिहार कांग्रेस की हालत!, दिन कब बहुरेंगे?

दास ने पहली ही बैठक में बिहार कांग्रेस की गुटबाजी का लाइव टेलिकास्ट अपने आंखों से देखा.
दास ने पहली ही बैठक में बिहार कांग्रेस की गुटबाजी का लाइव टेलिकास्ट अपने आंखों से देखा.

कांग्रेस (Congress) आलाकमान ने छत्तीसगढ़ के दिग्गज कांग्रेसी भक्त चरण दास (Bhakta Charan Das) को बिहार कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया है. दास ने पहली ही बैठक में बिहार कांग्रेस की गुटबाजी का लाइव टेलिकास्ट अपने आंखों से देखा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 15, 2021, 10:32 PM IST
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पटना. बीते बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में कांग्रेस (Congress) का प्रदर्शन काफी खराब रहा था. खराब प्रदर्शन को लेकर पार्टी के अंदर लेटर बम भी फोड़े गए थे. बिहार चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल (Kapil Sibbal) सहित कई नेताओं ने प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े किए थे. कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली को लेकर अंदर-बाहर चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया था. इस बीच कांग्रेस आलाकमान ने छत्तीसगढ़ के दिग्गज कांग्रेसी भक्त चरण दास (Bhakta Charan Das) को बिहार कांग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया है. दास ने पहली ही बैठक में बिहार कांग्रेस की गुटबाजी का लाइव टेलिकास्ट अपने आंखों से देखा. भक्त चरण दास की मौजूदगी में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के बीच जमकर हाथापाई हुई और कुर्सियां चलीं. इतना ही नहीं बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़ने वाले ज्यादातर प्रत्याशी भी पार्टी मीटिंग से गायब रहे. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार में कांग्रेस के दिन अब कब बहुरेंगे?



बिहार कांग्रेस में गुटबाजी कब खत्म होगी?
बिहार कांग्रेस का प्रभारी बनने के बाद पहली बार भक्त चरण दास अपनी तीन दिवसीय बिहार यात्रा पर जब पटना पहुंचे तो उन्हें अपनी पहली ही बैठक में कांग्रेस के अंदर चल रही गुटबाजी और अंतर्कलह का पता चल गया. कांग्रेस नेता संजीव टोनी ने दास के सामने जमकर हंगामा किया. दास ने पार्टी के सभी छोटे-बड़े नेताओं को मीटिंग में बुलाया था. इस मीटिंग में तकरीबन सभी लोग आए, लेकिन हाल ही में चुनाव लड़ने वाले 51 प्रत्याशियों में ज्यादातर प्रत्याशी गायब रहे. पार्टी का सिंबल हासिल करने के लिए जो प्रत्याशी पटना से दिल्ली दौड़ लगाते थे, वही प्रत्याशी दास के तीन दिन पटना ठहरने के बाद भी उनसे नहीं मिल सके. हारे हुए 51 प्रत्याशियों में से ज्यादातर प्रत्याशी भक्त चरण दास के बुलाने पर मीटिंग में नहीं आए.
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क्या बिहार में कांग्रेस को अब लोग विकल्प नहीं मानते?




कांग्रेस को अब लोग विकल्प क्यों नहीं मानते
क्या बिहार में कांग्रेस को अब लोग विकल्प नहीं मानते? बिहार में आने वाले दिनों में पंचायत चुनाव होने हैं. पंचायत चुनाव में भी जहां दूसरी पार्टियां रणनीति बनाने मे लग गई है, वहीं कांग्रेस पार्टी को इसको लेकर कोई ठोस रणनीति का अभाव है. बीते विधानसभा चुनाव में पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया है. इसके पीछे के कारण लोगों को अब पार्टी प्रभावी विकल्प के तौर पर नजर नहीं आती है. कांग्रेस पार्टी भी इसको समझने को तैयार नहीं है. कांग्रेस से जुड़े लोगों को कहना है कि चुनाव के वक्त दूसरे पार्टी के नेता टिकट लेने जरूर आ जाते हैं, लेकिन जैसे ही जीतते हैं तो मोल-भाव करने लगते हैं. जो प्रत्याशी चुनाव हार जाते हैं वह अगले चुनाव तक किसी दूसरी पार्टी का ठीकाना तलाशने में लगा देते हैं.

क्या कहना है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का
जब बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा से न्यूज 18 ने सवाल किया कि कांग्रेस पार्टी पिछले 35 सालों से आत्ममंथन क्यों नहीं कर रही है? जिस पर झा ने कहा, 'संगठनात्मक रूप से पार्टी लगातार आगे बढ़ रही है. हम ये भी जान रहे हैं कि गलती कहां हुई और आगे इसमें कैसे सुधार होगा. बीते दिनों जो घटना घटी है उस पर हमने दो-तीन नेताओं पर कार्रवाई की सिफारिश की है. अगर ये लोग पार्टी में हैं तो उनको निकाला जाएगा और अगर पार्टी में नहीं हैं तो फिर उनसे हमारा कोई लेना-देना नहीं है. हमारे कांग्रेस प्रभारी ने सख्त लहजे में कहा है कि पार्टी में अनुशासन पहली प्राथमिकता है और हमलोग भी उसी पर अमल करेंगे. बिहार के सभी 9 प्रमण्डलों में कांग्रेस प्रभारी की यात्रा होने वाली है. भागलपुर से इसकी शुरुआत होगी. हमलोग बिहार के बेहतर भविष्य के लिए कांग्रेस पार्टी को मजबूत कर रहे हैं.'

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पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा था कि सच को स्वीकार करने के लिए कांग्रेस को अब बहादुर होना ही पड़ेगा. (सांकेतिक फोटो)


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बिहार चुनाव में पार्टी की हार के बाद कांग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा था कि सच को स्वीकार करने के लिए कांग्रेस को अब बहादुर होना ही पड़ेगा और ये जितना जल्दी हो जाए उतना अच्छा है. बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता रणदीप सुरेजेवाला ने भी कहा था कि 'यह चुनाव नई दशा बनाम दुर्दशा का चुनाव है' लेकिन, यह बात कहीं न कहीं कांग्रेस पर ही फिट बैठ रही है. बिहार के नए कांग्रेस प्रभारी को भी अब गुटबाजी और अंतर्कलह से पार पाना पहली प्राथमिकता होगी.
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