बिहार में संशय में हर पार्टी: किसी को नहीं पता, कौन किस राह पर चलेगा?

क्या एनडीए में दूर हो गया सारा भ्रम? आरजेडी के बिखर रहे संगठन में कैसे होगा संगठन का चुनाव? अब अकेले चलने का दम भरने वाली कांग्रेस किसके दम पर कर रही है दावे? कहां और किस हालत में है हम और RLSP.

Deepak Priyadarshi | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 31, 2019, 7:57 PM IST
बिहार में संशय में हर पार्टी: किसी को नहीं पता, कौन किस राह पर चलेगा?
अमूमन अपने राजनीतिक कारणों से चर्चा में रहने वाली बिहार की राजनीति इस समय इस समय एकदम शांत है. या फिर यूं कहे कि बिहार में राजनीति संशय में है.
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 31, 2019, 7:57 PM IST
अमूमन अपने राजनीतिक कारणों से चर्चा में रहने वाली बिहार की राजनीति इस समय इस समय एकदम शांत है. या फिर यूं कहे कि बिहार में राजनीति संशय में है. संशय इस मायने में कि एनडीए में बीजेपी और जेडीयू साथ-साथ हैं और आगे भी साथ रहने का दावा भी है. लेकिन जब राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक, 35-A जैसे मुद्दे सामने आते हैं तो दोनों दल आमने-सामने आ जाते हैं.

कुछ ऐसा ही महागठबंधन का है. आरजेडी में क्या हो रहा है, आगे क्या होगा, किसी को नहीं पता. खुद पार्टी के नेताओं को भी नहीं मालूम. कांग्रेस अब अलग राह चलने का दम दिखा रही है. लेकिन किस दम अलग चलेगी, खुद पार्टी के नेताओं को नहीं पता. बाकी जीतनराम मांझी की पार्टी हम, उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी RLSPकहां है और क्या कर रही है, किसी को पता नहीं.

सबसे पहले बात एनडीए की
बीजेपी और जेडीयू बिहार में साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं. लोकसभा चुनाव भी साथ लड़ा. लेकिन मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने के मसले पर खटास आ गई. खुद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो टूक कह दिया कि साथ रहेंगे, लेकिन राम मंदिर, धारा 370, तीन तलाक, 35-A जैसे मुद्दों पर वह बीजेपी के साथ नहीं है. उस समय शुरू हुई तकरार इतनी बढ़ी कि कयास लगने लगे कि क्या जेडीयू-बीजेपी अलग हो जाएंगे! दोनों तरफ से बयानबाजी भी होती रही.



कुछ बीजेपी नेता बाढ़ के मुद्दे पर सीधे नीतीश कुमार पर हमला करते रहे तो जेडीयू के नेता भी चुनाव में बीजेपी को अकेले जाने को कह दिया. अफवाहों को और हवा तब मिली जब नीतीश कुमार दरभंगा में बाढ़ ग्रस्त इलाकों का दौरा करते करते आरजेडी के कद्दावर नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के घर चाय पीने चले गए.

इस प्रकरण ने बीजेपी को सकते में डाल दिया. यही कारण है कि बिहार विधानसभा में विनियोग विधेयक पर सरकार का उत्तर देते देते सुशील मोदी ने बोल दिया कि अगला चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा, कोई भ्रम में न रहे. सुशील मोदी ने भले ही यह बयान देकर दोनों दलों के बयानवीरों को चुप करा दिया लेकिन हकीकत तो यह है कि सबकुछ ठीक होने और साथ रहने के बावजूद भी भ्रम तो अभी बना हुआ है.
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अब बात आरजेडी की
लालू यादव के रहते बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में बनी रहने वाली पूरी आरजेडी नेपथ्य में चली गई है. पार्टी के सर्वेसर्वा लालू प्रसाद यादव जेल में हैं. लालू के उत्तराधिकारी बने और कभी महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार, नेता प्रतिपक्ष और पार्टी की पूरी कमान संभाले तेजस्वी यादव चुनाव में हार के बाद कहां हैं, किसी को पता नहीं. दो महीने से वे बिहार से बाहर हैं. दो दिनों के लिए पटना आए, चेहरा दिखाया, फिर चले गए. चर्चा है कि दिल्ली में हैं.

खुद को लालू यादव का असल उत्तराधिकारी मानने वाले बडे़ बेटे तेजप्रताप यादव इस समय राजनीति से अलग पूजा-पाठ में लीन हैं. चर्चा में वे इस समय सिर्फ अपने लुक को लेकर रहते हैं. फिलहाल राजनीति से कोई मतलब नहीं दिख रहा. लालू-राबड़ी की बड़ी बेटी मीसा भारती भी पार्टी से पूरी तरह दूर हैं. सबसे विकट हालत पार्टी नेताओं की है. एक महीने तक विधानसभा का सत्र चला. लेकिन पूरे सत्र में विपक्ष चमकी बुखार, बाढ़-सूखा, कानून व्यवस्था सहित कई मुद्दों पर विपक्ष सरकार पर हमलावर इसलिए नहीं हो सका कि नेतृत्व ही गायब था.



अब कुछ दिनों में आरजेडी संगठन का चुनाव होना है. राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर हर स्तर के पदाधिकारी का चुनाव होना है. 15 अगस्त से सदस्यता अभियान के साथ पूरे अभियान की शुरुआत होगी. लेकिन सवाल बड़ा यह है कि आखिर इन सबको संचालित करेगा कौन? जब पार्टी की हालत खराब है तो जनता की सुध लेने कौन लेगा. पार्टी नेताओं की हालत यह हो गई है कि सभी को अब नीतीश कुमार खेवनहार के रूप नजर आने लगे हैं. यही कारण है कि रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे नेता कई बार कह चुके हैं कि नीतीश कुमार को महागठबंधन में फिर से लाने की कोशिश करनी चाहिए.

अब कांग्रेस...
लोकसभा चुनाव परिणाम से हताश कांग्रेस का महागठबंधन से ऐसा मोहभंग हुआ कि हार की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई बैठक तक में कांग्रेस का कोई नेता शामिल नहीं हुआ. अब कांग्रेस के नेता अलग राह चलने की बात कह रहे हैं. लोकसभा चुनाव के बाद खाली हुई पांच विधानसभा सीटों के उपचुनाव में अकेले चुनाव लड़ने की बात कांग्रेसी नेता कह रहे हैं. लेकिन यह किस दम पर होगा, इसपर पार्टी के नेता चुप्पी साध लेते हैं.

अंत में हम और RLSP...
लोकसभा चुनाव के बाद इन दोनों पार्टियों का मानों वजूद ही खत्म हो गया. दोनों ही पार्टियों में जो भी नेता थे, वो छिटककर दूसरे दलों में चले गए. कभी केन्द्रीय मंत्री रहे उपेन्द्र कुशवाहा आज कहां हैं, किसी को नहीं पता और जीतनराम मांझी की हालत यह है कि अपने अपको खबर और चर्चा में बनाए रखने के लिए आज़म खान के बयान को समर्थन में खुद अजीबोगरीब बयान देते फिर रहे हैं.



कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में शून्यता की स्थिति है. शायद इस इंतजार में कि बिहार विधानसभा के चुनाव 2020 में है. उससे पहले फिलहाल कोई उठापटक करने को तैयार नहीं है.
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First published: July 31, 2019, 6:18 PM IST
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