बिहार में टूट के कगार पर महागठबंधन, मांझी के बाद अब कांग्रेस ने भी दिए संकेत

दरअसल लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में महागठबंधन के सभी घटक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ा था.

News18 Bihar
Updated: August 13, 2019, 1:47 PM IST
बिहार में टूट के कगार पर महागठबंधन, मांझी के बाद अब कांग्रेस ने भी दिए संकेत
बिहार में महागठबंधन के नेता
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Updated: August 13, 2019, 1:47 PM IST
बिहार में महागठबंधन (Mahagathbandhan) के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) की पार्टी हम (HAM) के बाद अब कांग्रेस (Congress) ने भी महागठबंधन से अलग होने के संकेत दे दिए हैं. पार्टी के वरीय नेता और एमएलसी (MLC) प्रेमचंद मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि महागठबंधन लोकसभा चुनाव (Lok sabha Election) के लिए बना था और कोई भी गठबंधन स्थायी नहीं होता.

फिर से बन सकता है नए आकार का गठबंधन

मिश्रा ने कहा कि जरूरी नहीं कि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी ऐसा ही चलेगा. विधानसभा चुनाव में आवश्यकता पड़ी तो एक विचारधारा रखने वाली पार्टियां मिलकर एक बार फिर से नया आकार दे सकती हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि आज की तारीख़ में हर पार्टी अपने अपने स्तर से अपनी-अपनी गतिविधियों को चला रही है.  प्रेमचंद ने ये भी साफ किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन पर फैसला आलाकमान से बात करने के बाद ही लिया जाएगा.

एक साथ चुनाव लड़े थे कई दल

दरअसल लोकसभा चुनाव में बिहार में कांग्रेस ने महागठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था. इस चुनाव में महागठबंधन के सभी घटक दलों को करारी हार का सामना करना पड़ा था. महागठबंधन में कांग्रेस-राजद समेत मांझी की पार्टी हम, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोसपा, शरद यादव और मुकेश सहनी की पार्टी भी थी.

मांझी ने पहले ही दिए थे अलगाव के संकेत

मिश्रा के इस बयान से पहले हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा ने 2020 का विधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया था. पार्टी के अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने इस बात का ऐलान करते हुए कहा था कि हमारी पार्टी को बचाने का सवाल है इसलिए ये फैसला लेना पड़ा है. उन्होंने कांशी राम की राह पर राजनीति करने की बात कहते हुए कहा कि महागठबंधन में किसी तरह का समन्वय नहीं बचा है.
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एकला चलो रे के मूड में आरजेडी

आरजेडी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिसे रहना है रहें, जिसे जाना है जाएं. मांझी ने अक्टूबर में इस बात की विधिवत घोषणा करने की बात की और मीडिया कहा कि महागठबंधन में किसी तरह का कोऑर्डिनेशन नहीं बचा है. इस मसले को लेकर पूर्व सीएम राबड़ी देवी से भी बात है, लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया.
First published: August 13, 2019, 1:38 PM IST
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